ब्रज और रूहेलखंड क्षेत्र में अधिकतर सीटें भाजपा के खाते में जाने की छाप मंत्रिमंडल पर भी दिखी। बरेली मंडल से 6 और आगरा मंडल से 5 मंत्री बनाए गए हैं। अलीगढ़ से भी दो विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। मंत्रिमंडल में इस प्रतिनिधित्व को जनता के लिए बंपर सीटें जिताने का रिटर्न गिफ्ट माना जा रहा है।
बरेली जिले की आंवला सीट से पांचवीं बार जीते धर्मपाल सिंह को योगी सरकार-2.0 में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। पिछली सरकार में भी वे शुरुआती दो साल कैबिनेट मंत्री रहे थे। लोधी राजपूत होने के चलते उन्हें रूहेलखंड में भाजपा का पिछड़ा वर्ग का चेहरा माना जाता है। बरेली शहर से तीसरी बार के विधायक डॉ. अरुण कुमार को पहली बार मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। माना जा रहा है कि कायस्थ जाति के प्रतिनिधित्व के तहत उन्हें मंत्री बनाया गया है।
पिछली सरकार में मंत्री रहे सिद्धार्थनाथ सिंह का पत्ता कटने के बाद उन्हें यह मौका मिला है। पीलीभीत से लगातार दूसरी बार जीते संजय गंगवार को राज्यमंत्री बनाया गया है। बरेली और पीलीभीत में कुर्मी बिरादरी की भूमिका को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
शाहजहांपुर शहर सीट से लगातार नवीं बार विधानसभा में पहुंचे सुरेश कुमार खन्ना को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। उन्हें इस बार भी अहम मंत्रिमंडल मिलने की संभावना है। मनोनीत कोटे से एमएलसी बनाए गए शाहजहांपुर के जितिन प्रसाद को फिर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद कांग्रेस से भाजपा में आए थे। ब्राह्मणों के बीच उनके प्रभाव को देखते हुए वह दूसरी बार योगी मंत्रिमंडल में जगह पाने में सफल रहे। शाहजहांपुर के ही जेपीएस राठौर को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
इसी तरह से आगरा मंडल से बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह और योगेंद्र उपाध्याय के रूप में चार कैबिनेट मंत्री मिले हैं। बेबीरानी मौर्य जहां भाजपा का प्रमुख दलित चेहरा मानी जाती हैं, वहीं लक्ष्मी नारायण चौधरी योगी-1.0 सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे थे। जयवीर सिंह और बेबीरानी मौर्य पहली बार मंत्री बने हैं। आगरा मंडल के ही धर्मवीर प्रजापति को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
अलीगढ़ मंडल से संदीप सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। वह पहली बार स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री बने हैं, पिछली सरकार में राज्यमंत्री रहे थे। वह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रपौत्र हैं। इस तरह से इस बार उनका भी कदम बढ़ाया गया है। इसी मंडल से पहली बार चुनाव जीते अनूप प्रधान वाल्मीकि को भी राज्यमंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।