नगर निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के छह सदस्य सोमवार को रिटायर कर दिए गए।
इसके लिए लाटरी प्रक्रिया अपनाई गई। रिटायर हुए कार्यकारिणी के सदस्यों में उपाध्यक्ष भी शामिल हैं। चुनाव होने तक अधूरी कार्यकारिणी निष्प्रभावी रहेगी और यह किसी नीतिगत मामलों पर अपनी मंजूरी नहीं दे सकेगी।
लाटरी प्रक्रिया से नगर निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के जो छह सदस्य रिटायर हुए हैं, उनमें भाजपा के तीन, सपा केदो और कांग्रेस के एक सदस्य शामिल हैं।
अब शेष बचे छह कार्यकारिणी सदस्यों में भाजपा के चार और सपा के दो सदस्य बचे हैं। कार्यकारिणी में कांग्रेस का एक ही सदस्य था, वह भी रिटायर हो गया है।
महापौर डा. दिनेश शर्मा ने बताया कि कार्यकारिणी सदस्य का कार्यकाल दो साल का होता है लेकिन नगर निगम अधिनियम में किए गए प्रावधान के तहत सदन का गठन होने के बाद पहली बार जो कार्यकारिणी गठित होती है उसके आधे सदस्य एक साल बाद लाटरी प्रक्रिया से रिटायर किए जाते हैं।
शेष छह सदस्य दो साल का कार्यकाल पूरा करते हैं। इस तरह जो नए सदस्य चुने जाएंगे वह सभी दो साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। पहली बार कार्य कार्यकारिणी के छह सदस्यों के एक साल बाद रिटायर हो जाने से अब छह सदस्य हर साल रिटायर होंगे।
जब तक नए छह कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव नहीं होगा कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो सकेगी। कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव गत वर्ष सितंबर में हुआ था।
इस हिसाब से छह सदस्यों का कार्यकाल पहली सितंबर को समाप्त हो गया था। कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का भी चुनाव होगा। नगर निगम अधिनियम की व्यवस्था के तहत कार्यकारिणी के 12 सदस्यों के बीच से ही कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाता है।