चुनावी समर निर्णायक दौर में है। यूपी में पांचवें चरण में 7 मई को वोट डाले जाएंगे।
इसी चरण में मोदी लहर की कड़ी परीक्षा भी होनी है। इस चरण की 15 सीटों पर भाजपा को उम्मीदें तो हैं लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
इनमें से फिलहाल 7 कांग्रेस, 5 बसपा ओर 3 सीटें सपा के पास हैं। भाजपा खाता भी नहीं खोल पाई।
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पुराने नतीजों को आधार बनाएं तो इन सीटों पर भाजपा को कांग्रेस और बसपा से कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है। देखना होगा मोदी लहर कुम्हलाया कमल खिल पाता है कि नहीं।
क्यों है भाजपा को जीत की उम्मीद
इन सीटों पर भाजपा उम्मीद इसलिए कर सकती है क्योंकि इस चरण की अधिकांश सीटें उस जमीन पर हैं जो अतीत में भाजपा के लिए उर्वरा रही है।
भगवा एजेंडे के प्रमुख हिस्से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के आंदोलन का हिस्सा रही इस धरती ने भाजपा के सफर को फर्श से अर्स पर पहुंचाने में योगदान दिया।
भाजपा का ग्राफ बढ़ाने और प्रदेश से लेकर केंद्र तक सरकार बनाने में इस इलाके की सीटों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चुनौतियां दूसरी पार्टियों के लिए भी है
जहां तक चुनौतियों का सवाल है तो कारण आबोहवा में परिवर्तन हो अथवा भाजपा का कमजोर संगठन या फिर सूबे की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव, पिछले दो चुनावों से यहां कमल कुम्हलाता ही रहा है।
कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां राम लहर में भी पार्टी का परचम नहीं लहरा पाया।
चुनौतियां कांग्रेस, बसपा और सपा के लिए भी कम नहीं हैं। भाजपा जहां सीटें जीतने की चुनौती से जूझ रही है तो इन दलों के सामने अपनी सीटें बचाने की चुनौती खड़ी है।