समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग में 10,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जिनके लिए आवश्यक न्यूनतम 30 छात्र उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इनको बंद कर वहां तैनात शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। यहां के छात्रों को निकट के प्राइमरी या निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने को कहा गया है।
चतुर्थ श्रेणी अनुकंपा नियुक्ति पर रोक का सुझाव
इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग में भविष्य में अनुकंपा के आधार चतुर्थ श्रेणी के रूप में नियुक्ति की व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया गया है।
सिंचाई विभाग : 10 हजार पद व भूमि अध्याप्ति विभाग खत्म होगा
समिति ने कहा है सिंचाई विभाग में विभिन्न श्रेणी के 10,000 अनुपयोगी पदों को समाप्त कर दिया जाए। इसी तरह बदले परिवेश में भूमि अध्याप्ति विभाग की आवश्यकता न होने का तर्क देते हुए विभाग के विभिन्न श्रेणी के पदों को दूसरे विभागों में हस्तांतरित करने को कहा गया है।
अनुपयोगी निगम, स्वशासी संस्थाएं भी हों बंद
ऐसे निगमों, स्वशासी संस्थाओं में जिनकी उपयोगिता समाप्त हो गई है, अथवा वे उन उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं, जिनके लिए उनका गठन किया गया था, उन्हें समाप्त करने की संस्तुति की गई है।
समिति के अनुसार, व्यापार कर विभाग में विभिन्न श्रेणी के 2,500 पद ऐसे हैं जिन्हें दूसरे विभाग में समायोजित किया जा सकता है। इसी तरह जल निगम में चतुर्थ श्रेणी के करीब 6000 कार्मिक ऐसे हैं जिनकी उपयोगिता निगम को नहीं रह गई है। बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में लगभग 12,000 कार्मिकों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। अब तक इनकी उपयोगिता विभाग में नहीं बताई गई है। इन पदों को ऐसे विभागों में हस्तांतरित करने का सुझाव दिया गया है जहां इनकी उपयोगिता हो।