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इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों के 59 प्रतिशत पद खाली

Fri, 06 May 2016 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध सूबे के 10 शासकीय व अनुदानित कॉलेजों में शिक्षकों के 59 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। एक तरफ सरकार तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए कॉलेज खोल रही है। दूसरी ओर पहले से संचालित कॉलेजों की अनदेखी हो रही है। इनमें सर्वाधिक 79 फीसदी पद प्रोफेसर के खाली हैं।
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एसोसिएट प्रोफेसर के 66 फीसदी जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 53 फीसदी पद रिक्त हैं। इस स्थिति को देख आसानी से अंदाज लगाया जा सकता है कि इन कॉलेजों में पढ़ाई कैसे होगी। रिक्त पदों की जगह संविदा के शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे हालात में इन कॉलेजों से अच्छे इंजीनियर व प्रबंधकों के निकलने की उम्मीद करना बेमानी है।

सरकार द्वारा स्थापित चार राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को खुले तीन साल से अधिक हो गए हैं लेकिन अभी तक इनमें एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई। इनमें बांदा, बिजनौर, आजमगढ़ और अंबेडकरनगर के कॉलेज शामिल हैं।
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इन चारों कॉलेजों में शिक्षकों के 47-47 पद हैं लेकिन सभी रिक्त पड़े हैं। यहां संविदा परशिक्षकों को रख कर पढ़ाई हो रही है। शुरू में इन कॉलेजों के छात्रों को कुछ साल तक उनके नजदीकी अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में भेज कर पढ़ाया गया।

संविदा शिक्षकों के भरोसे चल रही है पढ़ाई

- फोटो : Demo pic
कॉलेजों में आधे से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई काफी हद तक संविदा शिक्षकों के भरोसे है। प्रोफेसर के 71 पदों में मात्र 15 कार्यरत जबकि 56 रिक्त हैं।

इन कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर के 143 पदों में से मात्र 43 पर ही नियुक्ति है जबकि 94 खाली पड़े हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है। इसमें भी आधे से अधिक पद खाली हैं। इन 10 कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 336 पदों में से 177 खाली जबकि 159 ही भरे हैं।

अनुदानित कॉलेजों से भी उठ रहा भरोसा
हर साल काउंसलिंग के समय छात्रों की पहली पसंद शासकीय व अनुदानित कॉलेज होते हैं। इसके दो कारण हैं। पहला, शुल्क कम होना और दूसरा गुणवत्तापरक पढ़ाई का भरोसा।

यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह विश्वास खत्म होने में अधिक समय नहीं लगेगा। वैसे यह विश्वास धीरे-धीरे खत्म होने भी लगा है। शायद यही वजह है कि गत वर्ष यूपीएसईई काउंसलिंग के बाद सरकारी कॉलेजों में भी करीब 10 फीसदी सीटें रिक्त रह गई थीं। यह स्थिति हर साल बन रही है।

स्वीकृत और भरे पदों का ब्यौरा

कॉलेज--प्रोफेसर(स्वीकृत/भरे)--एसोसिएट(स्वीकृत/भरे)----असिस्टेंट(स्वीकृत/भरे)
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी लखनऊ--11-2--21-12--42-28
फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर लखनऊ--2-0--5-2--7-7

कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सुल्तानपुर--7-2--19-9--40-38
एचबीटीआई कानपुर--19-5--38-15--74-48
यूपीटीटीआई कानपुर--5-2--6-2--16-13

बीआईईटी झांसी--7-4--14-9--29-25
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बांदा--5-0--10-0--32-0
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर--5-0--10-0--32-0

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज आजमगढ़--5-0--10-0--32-0
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबेडकरनगर--5-0--10-0--32-0
कुल--71-15--143-49--336-159
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दो माह में भर्ती के लिए चल रही हैं कोशिशें

इस पर प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा मुकुल ‌सिंघल का कहना है कि शिक्षकों के पद कई साल से रिक्त हैं। इन पर भर्ती के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कुछ मानक बनने थे जो बन चुके हैं। प्रयास है कि दो माह में भर्तियां पूरी कर ली जाएं ताकि आगामी सत्र में शिक्षकों की कमी न रहे। हालांकि रिक्त पदों की जगह गेस्ट फैकल्टी रखकर पढ़ाया गया है जिससे छात्रों को पढ़ाई का नुकसान न हो। अच्छी गेस्ट फैकल्टी लाने के लिए उनका पारिश्रमिक भी बढ़ाया गया है।

एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का कहना है क फ्लेक्सिबल काडर की नीति अपनानी चाहिए। यदि किसी असिस्टेंट प्रोफेसर को कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत किया जाए तो एसोसिएट प्रोफसर के रिक्त पद को भरा माना जाना चाहिए। जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद को रिक्त मानते हुए नियुक्ति की जाए। इससे नए लोगों को भी अधिक अवसर मिलेगा। कॉलेजों को लगातार पद भरने के लिए कहा जा रहा है।
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