गोंडा। गठिया यानि आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो बड़ी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। गठिया बीमारी की एक सौ से अधिक किस्मों से आज चाहे बच्चा हो या बूढ़ा, हर कोई परेशान है। बावजूद इसके लोगों को दर्दरहित जीवन से निजात दिलाने वाले स्वास्थ्य महकमे को न तो गठिया रोग से बीमार मरीजों की कोई चिंता है न ही 12 अक्तूबर को पूरे विश्व में मनाए जाने वाले गठिया दिवस की। यही वजह है कि जिले की किसी भी सीएचसी-पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठिया रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए न तो स्वास्थ्य विभाग ने कोई अभियान चलाया न ही गुरुवार को पड़ रहे विश्व गठिया दिवस के दिन किसी तरह की कोई गोष्ठी ही आयोजित की गई है। जबकि मौजूदा दौर में चाहे गांव हो या शहर ज्यादातर जगहों पर रहने वाली आबादी इस रोग से पीड़ित है। गोंडा जिले की साढ़े 34 लाख आबादी में एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन 8 लाख से ऊपर लोग इस बीमारी से परेशान हैं। पेश है रिपोर्ट-
कैसे होता गठिया व क्या है इलाज
शर्करायुक्त पेय पदार्थों व फ्रक्टोस की अधिकता वाले आहार के सेवन से इसकी बीमारी जल्दी होती है। साथ ही मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर व शरीर का बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल भी इसका प्रमुख कारण होता है। गठिया का इलाज दवाओं से ही संभव है, जो कि जोड़ों में क्रिस्टल बनकर जमे हुए यूरिक एसिड को घोल देती है। दर्द निवारक दवाएं दर्द व सूजन कम करती हैं। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्सशन पर आपको एक डाइट चार्ट के तहत खाना खाना पड़ सकता है। ताकि यूरिक एसिड के स्तर को बैलेंस रखा जा सके।
100 से ज्यादा किस्म की होती गठिया
गठिया यानि आर्थराइटिस के मुख्यत: 9 प्रकार बेहद कष्टकारक होते हैं। जिसमें रुमेटाइड आर्थराइटिस, ज्यादातर लोगों में होता है। वहीं सोराइटिक आर्थराइटिस होने पर अगर इसका इलाज समय से नहीं हुआ तो यह बीमारी आगे चलकर लाइलाज और घातक हो जाती है। जबकि आस्टियोसोराइटिस आर्थराइटिस आनुवांशिक होता है। इससे व्यक्ति के शरीर में भार सहन करने वाले अंग मसलन, पीठ, कमर, घुटने व पांव पर ज्यादा असर पड़ता है। इसी तरह पोलिया मायल गटिका रुमेटिका, एनकायलाजिंग स्पोंडलाइटिस, रिएक्टिव आर्थराइटिस, गाउट (गांठ), सिडडोगाउट व सिस्टेमिक ल्यूपस आर्थिमेटोसस।
गठिया एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को सकती है। लेकिन 40 साल की उम्र से ऊपर के ज्यादातर लोग आस्टियो आर्थराइटिस से पीड़ित होते हैं। ऐसे लोग अगर समय रहते अपना उपचार नहीं कराते हैं तो उन्हें घुटने का प्रत्यारोपण तक कराना पड़ सकता है। खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की बीमारी होती है। ऐसे लोग जब सुबह सोकर उठते हैं तो उनके हाथ की उंगलियां टाइट रहती हैं। शरीर के छोटे से छोटे जोड़ में दर्द होता है। -डा. डीके राव, हड्डी रोग विशेषज्ञ, गोंडा
आर्थराइटिस जैसी बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। ज्यादा दिनों तक अगर कोई व्यक्ति इसका इलाज नहीं कराता है तो यह लाइलाज हो जाती है। दवाओं के सेवन तक व्यक्ति इसके प्रकोप से बचा रहता है और जैसे ही दवाएं बंद होती हैं यह फिर से व्यक्ति पर हावी हानी शुरू हो जाती है। जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों में जो भी मरीज इसकी बीमारी से ग्रसित होकर आते हैं उसे परामर्श के साथ दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। लेकिन ऐसे मरीजों का कोई आंकड़ा उनके पास नहीं है। -डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ गोंडा