सड़े-गले और कटे-फटे नोटों के मामले में 500 के नोट सबसे तेज रफ्तार से भाग रहे हैं। तीन साल पहले करीब 200 करोड़ पीस 500 रुपये के आए जो अब बढ़कर 600 करोड़ से भी ज्यादा हो गए। 10, 20 और 50 के नोट सबसे कम खराब हो रहे हैं। पिछले तीन साल में इनकी संख्या घटकर करीब आधी रह गई है।
आरबीआई के मुताबिक दो हजार के नोट बंद होने की वजह से सबसे तेजी से केंद्रीय बैंक पहुंचे। तीन वर्ष में आरबीआई पहुंचने वाले दो हजारी की संख्या करीब पांच गुना हो गई। वहीं पांच सौ के नोट की बात करें तो सबसे ज्यादा चलन में होने की वजह से सबसे ज्यादा खराब भी यहीं करेंसी हो रही है। तीन साल में सड़-गल कर तीन गुना आरबीआई पहुंचने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है।
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इसी तरह दो सौ के नोट भी जमकर इस्तेमाल हो रहे हैं। इसीलिए इनके खराब होने की रफ्तार तीन साल में दोगुना से ज्यादा हो गई। सौ के नोटों के चलन और इस्तेमाल में ज्यादा अंतर नहीं आया है। ऐसे में इनके खराब होने की रफ्तार भी बराबर है। दिलचस्प बात ये है कि 50, 20 और 10 के नोट के सड़ने-गलने की स्पीड घटती जा रही है। यानी ये नोट सबसे कम खराब हो रहे हैं।
100 और 50 के नोटों की मांग सबसे ज्यादा
दो हजार के नोट बंद होने के बाद 500 के नोटों पर बोझ तो बढ़ा लेकिन जनता की पसंद में पहले और दूसरे नंबर पर 100 और 50 के नोट हैं। पचास फीसदी से ज्यादा लोगों ने 100 और 50 के नोटों के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही। वहीं आरबीआई के सर्वे में ये खुलासा हुआ। साथ ही लोगों का एक, दो और पांच के सिक्कों से मोह भी नहीं खत्म हुआ है। बाजार में जितने सिक्के चलन में हैं, उनमें 82 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्ही तीन सिक्कों का है।
इस तरह घट-बढ़ रहे सड़े-गले नोट
| नोट |
2021-22 |
2022-23 |
2023-24 |
| 2000 रुपये |
3,847 |
4824 |
18,458 |
| 500 रुपये |
22,082 |
51,092 |
63,320 |
| 200 रुपये |
6167 |
13,062 |
13,594 |
| 100 रुपये |
59,203 |
58,282 |
60,217 |
| 50 रुपये |
27,696 |
34,219 |
19,095 |
| 20 रुपये |
20,771 |
21,393 |
13,971 |
| 10 रुपये |
46,778 |
45,077 |
23,461 |