राज्य सरकार ने सूबे के 50 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। हालांकि सरकार की ओर से अभी इस फैसले की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। सूखाग्रस्त जिलों में 49 जिले वे हैं, जहां सामान्य से 60 फीसदी तक बारिश हुई है।
बलरामपुर जिले में बारिश तो 60 प्रतिशत से अधिक हुई है लेकिन फसल के 33 फीसदी से अधिक नुकसान के कारण इसे भी सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
सूखाग्रस्त घोषित जिलों में अवध के गोंडा, बलरामपुर, फैजाबाद, बाराबंकी, लखनऊ, अमेठी, रायबरेली व अंबेडकरनगर जिले भी शामिल हैं। इन जिलों में 31 मार्च 2016 तक मुख्य व अन्य तरह की राजस्व वसूली स्थगित रहेगी। साथ ही कृषि ऋण से संबंधित बकाया वसूली के लिए किसानों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
प्रदेश में लगातार चौथा सीजन है, जब किसान दैवी आपदा के शिकार हुए हैं। बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से अपनी पूरी फसल गंवा चुके किसानों पर लगातार यह दूसरी बड़ी चोट है। सूत्रों ने बताया कि राजस्व विभाग ने सरकार के पास 50 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भेजा था।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब जिलों से फसलों के नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट व सूखा प्रबंधन के लिए पानी, चारा, बिजली आदि की व्यवस्था के संबंध में रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट आने पर केंद्र को मदद के लिए मेमोरेंडम भेजा जाएगा। अधिकारी ने बताया कि नुकसान की अभी विस्तृत रिपोर्ट नहीं आई है। पिछले साल सूबे के 58 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था।
सूखाग्रस्त घोषित किए गए जिले
संत रविदासनगर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, मिर्जापुर, बलिया, सिद्धार्थनगर, शाहजहांपुर, बांदा, प्रतापगढ़, चंदौली, इटावा, बस्ती, बागपत, जौनपुर, फैजाबाद, गोंडा, कन्नौज, बाराबंकी, संतकबीरनगर, झांसी, जालौन (उरई), गोरखपुर, हाथरस, एटा, इलाहाबाद, गाजियाबाद, फर्रुखाबाद, मऊ, उन्नाव, रामपुर, हमीरपुर, ललितपुर, चित्रकूट, कानपुर नगर, लखनऊ, देवरिया, मैनपुरी, महराजगंज, आगरा, औरैया, पीलीभीत, अमेठी, महोबा, रायबरेली, कुशीनगर, कानपुर देहात, कौशांबी, फतेहपुर, अंबेडकरनगर और बलरामपुर।
सूखाग्रस्त घोषित होने से मिलेगी राहत
- किसानों से अब किसी भी तरह की वसूली नहीं की जा सकेगी।
- किसानों के खिलाफ किसी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।
- पानी, बिजली, मजदूरों की मजदूरी, चारा की उपलब्ध बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
- केंद्र से फसलों के 33 फीसदी नुकसान के आधार पर मुआवजे की मांग की जा सकेगी।
- 50 जिलों में से 20 जिलों में 33 प्रतिशत से अधिक हुआ है फसलों को नुकसान।
- फसल बीमा करने वाली कंपनियों को तत्काल क्षतिपूर्ति का वितरण शुरू करना होगा।