फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल के इन 'रोजेदारों' से सीखो दंगे फैलाने वालों!

Mon, 07 Jul 2014 01:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बाराबंकी जिला जेल में 48 हिंदू कैदी 213 मुस्लिम कैदियों के साथ रोजे रख रहे हैं।
विज्ञापन


जेल प्रशासन भी इसमें उनकी मदद कर रहा है। इन कैदियों को सेहरी और इफ्तार के लिए खजूर, दूध जैसे सभी जरूरत के सामान दिए जा रहे हैं।

बाराबंकी जिला जेल में कुल 1000 कैदी हैं। हिंदू कैदी भी मुस्लिम कैदियों की तरह दिन भर रोजा रखते हैं और उनके साथ तड़के सुबह 3 बजे उठकर सेहरी करते हैं।

जेल अधीक्षक अशोक सागर कहते हैं कि जेल में इस तरह मुस्लिम-हिंदू भाईचारा देखकर हमें खुशी होती है। वहीं, वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन सिंह राठौर का कहना है, 'सांप्रदायिक सौहार्द का यह एक शानदार उदाहरण है। हम इन कैदियों को सलाम करते हैं।

बाहर के लोग भी कर रहे जेल प्रशासन की मदद

जेल प्रशासन के अलावा बाहर के लोग भी इन कैदियों की मदद करने को आगे आ रहे हैं।

बाराबंकी के व्यापारी नेता कपिल जैसवाल ने कैदियों को सेहरी और इफ्तार का सामान देने के लिए जेल प्रशासन से पूछा है।

उनका कहना है कि कैदियों में इस तरह की एकता को हम जेल की दीवारों से बाहर ले जाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि यह संदेश समाज में पहुंचे।
विज्ञापन

नहीं लगाते हैं लाउडस्पीकर

एक ओर प्रदेश के पश्चिमी जिले मुरादाबाद में धर्मस्‍थल पर लाउडस्पीकर हटाने की वजह से आग फैली हुई है वहीं, लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में हिंदू-मुस्लिम एकता देखने को मिल रही है।

यहां के हिंदू पुजारी मुस्लिम भाइयों के लिए लाउडस्‍पीकर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

बाराबंकी के एक हिंदू पुजारी शंकर तिवारी का कहना है कि वह नमाज, सेहरी और इफ्तार के वक्त लाउडस्पीकर लगाकर भजन-आरती नहीं करते हैं। यहां के जिला जेल में ‌हिंदू-मुस्लिम कैदी भी एक खूबसूरत संदेश दे रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें