आवास विकास परिषद अपने आवंटियों को समय से फ्लैट नहीं दे सका, अब करीब मकानों की कीमत 45 फीसदी बढ़ाकर उनकी कमर तोड़ दी। पंजीकरण के वक्त आवंटियों को बताया गया था कि निर्माण के दौरान महंगाई बढ़ने पर फ्लैट की कीमत बढ़ सकती है, लेकिन किसी भी दशा में यह 20 फीसदी से अधिक नहीं होगी। अब परिषद आवंटियों की सुनने को तैयार नहीं है।
कुछ आवंटियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने परिषद को आदेश दिया है कि वह आवंटियों को बकाया जमा करने के लिए चार माह का समय दे। इसके बाद परिषद ने इसके लिए दो माह का समय देने का फैसला किया है।
आवास विकास परिषद ने 2012 में रायबरेली रोड स्थित वृंदावन योजना में जी प्लस थ्री योजना में चार श्रेणियों के फ्लैटों के लिए पंजीकरण किया था। उस समय निर्माण सामग्री आदि की महंगाई की संभावना को लेकर फ्लैट की अनुमानित कीमत में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया था।
परिषद ने फ्लैटों की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। फ्लैट के अनुमानित मूल्य में इस वृद्धि से सर्विस टैक्स, विज्ञापन शुल्क और रजिस्ट्री का खर्च भी बढ़ गया है। इस तरह कुल मिलाकर आवंटी पर करीब 45 प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।