प्रदेश की कौशल विकास नीति को मंजूरी मिल गई है। इस नीति का मुख्य मकसद प्रदेश के 45 लाख युवाओं को दक्ष बनाकर रोजगार देना है।
यह जानकारी अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन ने दी है। उन्होंने बताया कि कृषि के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाला यह दूसरा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा।
उन्होंने कहा, बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है। इसे समुचित रणनीति से ही समाप्त किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने इस उद्देश्य के लिए कौशल विकास नीति बनाई है, जिसे अनुमोदित कर दिया गया है।
इसका अनुमोदन औद्योगिक घरानों की उपस्थिति में किया गया। एलएंडटी के क्षेत्रीय प्रबंधक राजन मल्होत्रा, शाखा प्रबंधक संजू जॉन, मारुति के महाप्रबंधक एमके गुप्ता और एकैडेमिक्स की निदेशक अंजनी सिंह से विचार-विमर्श के बाद इसे अनुमोदित किया गया है।
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उन्होंने बताया कि यह एक आदर्श स्थिति है जब प्रदेश के नवयुवकों के भविष्य निर्माण में सरकार के साथ औद्योगिक क्षेत्र के बड़े रोजगारदाताओं को भी शामिल किया गया है।
औद्योगिक विकास आयुक्त ने बताया कि इस नीति में सभी पूंजी निवेशकों के साथ मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) किया जाएगा। इसकी विशेषता यह होगी कि युवकों में कौशल विकास के लिए सरकार के प्रयासों में औद्योगिक घराने भागीदार बनेंगे।
इसके पाठ्यक्रम में क्या-क्या रखा जाए, इस बाबत औद्योगिक घरानों का मार्गदर्शन लिया जाएगा। इस मौके पर एमओयू की दो प्रस्तुतियां की गईं। इसे सभी ने सामूहिक रूप से सहमति प्रदान की।
पहली प्रस्तुति के अनुसार औद्योगिक घराने कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए अवस्थापना सुविधाएं देंगे और प्रशिक्षण संबंधी अन्य व्यवस्थाएं जैसे कोर्स, फैकल्टी, लैब आदि में मदद करेंगे।
दूसरी प्रस्तुति के अनुसार सरकार औद्योगिक घरानों से संपर्क के बाद उनकी आवश्यकतानुसार कोर्स तय करेगी और प्रशिक्षण की व्यवस्था कर युवकों में रोजगारपरकता बढ़ाएगी। औद्योगिक घरानों ने इस पर सहमति जताई है।