सूबे के हर ब्लॉक में पंचायत उद्योगों के जरिये सस्ती सेनेटरी नैपकिन बनाने की यूनिटें लगाई जाएंगी। इसके लिए महिलाओं को नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह घोषणा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी व कन्नौज की सांसद डिंपल यादव ने सोमवार को यहां एक कार्यक्रम में की।
इस मौके पर उन्होंने पंचायत उद्योगों द्वारा लगाई गई सेनेटरी नैपकिन की 40 यूनिटों का शुभारंभ किया। बता दें, छह सेनेटरी नैपकिन का पैकेट महज 15 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में डिंपल यादव ने कहा, एक सर्वे के मुताबिक देश भर में महज 12 फीसदी किशोरी व महिलाएं ही सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। जबकि शेष महिलाएं ऐसे साधनों का इस्तेमाल करती हैं, जो बेहद असुरक्षित है।
सूबे की ऐसी ही महिलाओं को सस्ती सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की योजना है। अभी सूबे के 40 जिलों में सस्ती सेनेटरी नैपकिन उत्पादन यूनिटें शुरू की गई हैं। जल्द ही शेष जिलों में यूनिटें शुरू की जाएंगी।
पंचायत उद्योगों मे हुआ सुधार
डिंपल ने कहा कि ज्यादातर जिलों में पंचायत उद्योग ठप पड़े थे। सेनेटरी नैपकिन की यूनिटें लगाए जाने से उनमें जान आ गई है। वहीं इससे महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है और उनका सशक्तीकरण हो रहा है।
वहीं कोयंबटूर से आए जयश्री इंडस्ट्रीज के मुरूगनाथन ने कहा, यूपी सरकार से काम करने में अच्छा लग रहा है। यही इंडस्ट्री यूपी सरकार को नैपकिन उत्पादन के मशीनें व कच्चा माल मुहैया करा रही है।
कार्यक्रम में पंचायत उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं व व्यवस्थापकों को प्रमाण पत्र बांटे गए। इससे पहले महिलाओं के रॉक बैंड ने ‘मेरी जिंदगी’ ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरूकता गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह भी मौजूद थीं।
23 फीसदी किशोरियां माहवारी के समय छोड़ देती हैं स्कूल
सांसद डिंपल यादव ने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि करीब 23 फीसदी किशोरियां माहवारी के समय स्कूल जाना छोड़ देती हैं। क्योंकि ये महंगे नैपकिन खरीद नहीं पाती हैं। ऐसे में इन किशोरियों के लिए सस्ती सेनेटरी नैपकिन बहुत फायदेमंद साबित होगा।
रोजाना 28 हजार सेनेटरी नैपकिन का उत्पादन
मौजूदा समय में पंचायत उद्योगों के जरिये सूबे में रोजाना 28 हजार सस्ती सेनेटरी नैपकिन का उत्पादन हो रहा है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी ने बताया कि अभी तक कारागार विभाग ने महिला बंदियों के लिए 38 हजार, बेसिक शिक्षा विभाग ने 70 हजार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 2.50 लाख नैपकिन खरीदे हैं।
यही नहीं खुले बाजार में भी 78 हजार नैपकिन बेचे जा चुके हैं।