इसके बाद विवि प्रशासन ने पूर्व में हो चुकी परीक्षा निरस्त कर दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह मान लिया गया है कि ऑडियो लीक होने के बाद परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है तो फिर इसका खामियाजा सिर्फ परीक्षार्थी ही क्यों भुगत रहे हैं। अभी तक विवि प्रशासन ने इस मामले के एक भी आरोपी से सवाल-जवाब तक नहीं किया है। पेपर लीक की सूचना आने पर शिक्षकों के निलंबन का दावा भी किया गया था, यह दावा भी अभी हवा में ही है।
आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट के साथ ही लविवि प्रशासन को परीक्षा के कामकाज के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इनमें प्रश्नपत्र सेटिंग में लविवि के साथ ही अन्य विश्वविद्यालयों को शामिल करने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा पेपर की सेटिंग और मॉडरेशन समिति की जानकारी सिर्फ परीक्षा नियंत्रक को ही होने की व्यवस्था की बात कही गई है। आंतरिक जांच समिति के सुझाव के अनुसार उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए भी बाहरी शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए।
परीक्षा समिति ने लगाई मुहर
आंतरिक जांच समिति ने पेपर लीक होने की बात पूरी तरह से नहीं मानी है, लेकिन परीक्षा की शुचिता को ध्यान में रखते हुए नये सिरे से पेपर कराने के लिए कहा है। परीक्षा समिति ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। परीक्षा का नया कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।
-डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक, लविवि