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Lucknow News: सरकारी अस्पतालों में बंद पड़े 38 वेंटिलेटर, कागजों पर क्रियाशील

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वेंटिलेटर।
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लखनऊ। हाईकोर्ट की फटकार के बाद राजधानी के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की हकीकत सामने लाने की कवायद तेज हो गई है। महानिदेशालय ने सभी अस्पतालों से क्रियाशील और बंद पड़े वेंटिलेटरों का पूरा ब्योरा मांगा है। अस्पतालों ने रिकाॅर्ड जुटाना शुरू कर दिया है। जांच में सामने आया है कि लखनऊ जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 38 वेंटिलेटर शोपीस बने पड़े हैं, या तो आईसीयू बंद हैं या फिर स्टाफ व संसाधन न होने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा। नतीजतन गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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लोकबंधु अस्पताल में 20 वेंटिलेटर अब भी बंद
लोकबंधु राजनारायण अस्पताल की क्षमता 300 बेड की है। यहां 30 वेंटिलेटर हैं, लेकिन पिछले साल आईसीयू में आग लगने के बाद यूनिट बंद कर दी गई थी। इस माह वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 10 वेंटिलेटरों पर भर्ती शुरू हुई है, जबकि 20 वेंटिलेटर अब भी बंद हैं।
बलरामपुर अस्पताल में स्टाफ की कमी से अटका विस्तार
750 बेड की क्षमता वाले बलरामपुर अस्पताल में 40 वेंटिलेटर हैं, जिनमें से 28 पर ही मरीजों का इलाज चल रहा है। अफसरों का कहना है कि मैनपावर बढ़ने के बाद यूनिट की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
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प्रशिक्षण पूरा, फिर भी बंद ठाकुरगंज और रानीलक्ष्मीबाई की यूनिटें
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय के दोनों वेंटिलेटर डॉक्टरों और स्टाफ के अप्रशिक्षित होने के कारण बंद हैं। रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल में चार बेड की वेंटिलेटर यूनिट तो है, पर यहां भी गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। प्रशिक्षित स्टाफ होने के बावजूद डॉक्टर मरीजों को हायर सेंटर भेज रहे हैं।
बीकेटी अस्पताल ही अपवाद
बीकेटी के रामसागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में छह वेंटिलेटर हैं। यहां डॉक्टरों की टीम लोहिया संस्थान से प्रशिक्षण लेकर लौटी है। सीएमएस डॉ. वीके शर्मा के अनुसार, सभी वेंटिलेटर चालू हैं और मरीज भर्ती हो रहे हैं।
प्रमुख सचिव का आदेश ठंडे बस्ते में
हाईकोर्ट में सुनवाई के बीच यह तथ्य भी उजागर हुआ कि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 26 नवंबर, 2024 को शासनादेश जारी कर केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान के वेंटिलेटरों का ब्योरा ऑनलाइन और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करने का आदेश दिया था, पर अब तक इस पर अमल नहीं हुआ है।
केजीएमयू ने ट्रॉमा सेंटर में स्क्रीन पर ब्योरा प्रदर्शित करना शुरू किया है, लेकिन वेबसाइट पर जानकारी अब भी नहीं है। पीजीआई और लोहिया संस्थान में तो आधी-अधूरी व्यवस्था भी नहीं बनी। तीनों संस्थान तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर आदेश को टालते आ रहे हैं।
राजधानी के इन तीन प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में करीब 700 वेंटिलेटर हैं, फिर भी गंभीर मरीजों को अक्सर बेड और वेंटिलेटर के अभाव में निजी अस्पताल भेज दिया जाता है। शासन ने इसी अव्यवस्था पर रोक लगाने के लिए यह आदेश जारी किया था, मगर अफसरों की लापरवाही ने उसे कागजों तक सीमित कर दिया।

वेंटिलेटर।

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