राजधानी में सात मई से जनगणना की शुरुआत हो रही है।
लखनऊ। राजधानी में सात मई से जनगणना की शुरुआत हो रही है। इस कार्य के लिए राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत तीन हजार से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से करीब 1500 सरकारी विद्यालय शिक्षक विहीन होंगे। इसका सीधा असर करीब 7500 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा, जिनकी नियमित कक्षाएं अब बाधित होंगी।
स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं रहेगा। जोन चार के एक परिषदीय विद्यालय में केवल एक शिक्षिका तैनात हैं, लेकिन उनकी भी ड्यूटी जनगणना में लगा दी गई है। ऐसे में स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं बचेगा। इसी तरह फरीदीपुर के एक विद्यालय में चार शिक्षक और दो अनुदेशक कार्यरत हैं, लेकिन सभी को जनगणना कार्य में लगा दिए जाने से यहां भी पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी।
नरही, उतरठिया, इंदिरा नगर समेत 150 से अधिक विद्यालयों में यही हाल है, जहां सभी शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगा दिया गया है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब या तो खाली बैठने को मजबूर होंगे या फिर स्कूल आने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
उत्तर प्रदेश विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिला संयोजक वीनित कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता में कैसे सुधार होगी, जब तक सभी शिक्षक जनगणना और अन्य कार्यों में लगे रहेंगे। जनगणना में ड्यूटी तो लगा दी गई, लेकिन विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। इसके बारे में भी अधिकारियों को सोचना चाहिए।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। विषम परिस्थितियों में ही शिक्षकों को ड्यूटी से छूट दी जाएगी।