- मौसम आधारित खेती होने से सूखा तथा बाढ़ बड़ी समस्या।
- मजदूरी, बिजली दरें, डीजल, खाद व कृषि यंत्रों के मूल्य वृद्धि से उत्पादकता लागत का बढ़ना।
- कृषि विकास दर 0.13 प्रतिशत है जो बहुत कम है।
- खाद्यान्न, फल-सब्जी व दूध का उत्पादन बढ़ा, लेकिन भंडारण व प्रसंस्करण में कमी से उत्पादों की बर्बादी।
- चार दशक में अन्न उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन पौष्टिक तत्वों की मात्रा घटती गई।
- राष्ट्रीय स्तर पर किसान परिवारों की औसत आय 8931 रुपये है। यूपी में यह 6668 रुपये है। जबकि पंजाब में 23,133 रुपये, हरियाणा में 18,496 रुपये व केरल में 16,927 रुपये है।
- किसानों की आय बढ़ाने के लिए कम से कम 10 फीसदी वृद्धि दर का लक्ष्य।
- किसानों से जुड़ी नीतियां, नियम व व्यवस्था सहज व सरल बनाई जाएं।
- आबादी को कृषि से गैर कृषि में बदलने की व्यवस्था हो व कृषि भूमि के पट्टे वैध किए जाएं।
- ग्रामीण स्तर पर प्राथमिक कृषि प्रसंस्करण गतिविधि शुरू कर शिक्षित युवा किसानों को जोड़ा जाए।
- किसानों की आय दोगुना करने के लिए कृषि आय में 9.02 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि जरूरी है।
- दोगुनी आय के लिए 2022-23 तक कृषि सेक्टर में वार्षिक निवेश 13.54 फीसदी की दर से हो।
- फसल उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने व कृषि आधारित वस्तुओं का निर्यात बढ़ाया जाए।
- मॉडल कृषि उत्पाद व पशुधन विपणन अधिनियम-2017 को मजबूती से लागू किया जाए।
- गोरक्षा, संविदा खेती, जीरो बजट कृषि को प्रोत्साहित कर एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाएं।