अंबेडकरनगर। माध्यमिक शिक्षक संघ वित्त विहीन गुट के सदस्यों के विरोध के चलते मंगलवार को चौथे दिन भी यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य प्रभावित हुआ। संघ के कड़े विरोध के चलते लगभग दो हजार कॉपियों का ही मूल्यांकन हो सका। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों की सुनवाई नहीं होती, तब तक मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा। न तो वित्तविहीन विद्यालयों के परीक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे और न ही किसी को करने देंगे। उधर, मूल्यांकन का कार्य सुचारु ढंग से करने के लिए मंगलवार को तीनों मूल्यांकन केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसके बाद भी मूल्यांकन कार्य समुचित ढंग से नहीं हो सका।
नियमित मानदेय देने, शिक्षक नियमावली बनाए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर वित्त विहीन विद्यालयों के परीक्षकों ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार कर रखा है। 17 मार्च से प्रारंभ हुए यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए जिले में तीन मूल्यांकन केंद्र बीएन इंटर कॉलेज अकबरपुर, डॉ. गणेश जेतली इंटर कॉलेज शहजादपुर व सरदार पटेल स्मारक इंटर कॉलेज लारपुर बनाए गए हैं। वित्तविहीन शिक्षकों के बहिष्कार के चलते मूल्यांकन का कार्य सुचारु ढंग से नहीं हो पा रहा है। वित्त विहीन परीक्षकों का बहिष्कार मंगलवार को भी जारी रहा। नतीजा यह रहा कि कड़े विरोध के चलते मंगलवार को मूल्यांकन का कार्य लगभग पूरी तरह ठप रहा। संघ अध्यक्ष आनंद हीराराम पटेल ने दावा किया कि मंगलवार को चौथे दिन भी मूल्यांकन का कार्य नहीं होने दिया गया। चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों का निस्तारण नहीं होता, तब तक मूल्यांकन का बहिष्कार जारी रहेगा। न तो वित्तविहीन विद्यालयों के परीक्षक कापियों का मूल्यांकन करेंगे और न ही किसी को करने देंगे। उधर, डीआईओएस विनोद सिंह ने दावा किया कि वित्तविहीन शिक्षकों के बहिष्कार के बावजूद मंगलवार को लगभग दो हजार कॉपियों का मूल्यांकन हुआ।
रहे कड़े सुरक्षा के प्रबंध
वित्त विहीन शिक्षकों के कड़े विरोध को देखते हुए मूल्यांकन कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए तीनों केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। मुख्य गेट सुबह साढ़े 10 बजे बंद कर दिया गया। साथ ही मुख्य गेट पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया, जिससे बहिष्कार कर रहे वित्तविहीन शिक्षक अंदर न प्रवेश कर सकें। किसी को भी केंद्र के अंदर बाहर नहीं आने जाने दिया जा रहा था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग सुचारु ढंग से मूल्यांकन कराने में सफल नहीं हो पाया।