बाराबंकी। भले ही आम लोगों की शिकायतों का फर्जी तरीके से निस्तारण दिखाकर जन सुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर अपलोड कर दिया जाता हो, लेकिन क्या ऐेसे निस्तारणों से शिकायतकर्ता संतुष्ट हैं। इस पर शासन व प्रशासन को कोई फोकस नहीं है। पिछले नवंबर की हुई आईजीआरएस की समीक्षा में इस जनपद को बड़ी सफलता मिली है। शासन में शिकायती पत्रों के निर्धारित समय में हुई निस्तारण की समीक्षा में प्रदेश में यह जिला दसवें स्थान पर आया है। इस सफलता से प्रशासन के अधिकारी गदगद नजर आ रहे हैं।
शासन जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर काफी गंभीर है। इसके लिए अलग-अलग कई ऑनलाइन पोर्टल बनाए गए हैं। आने वाली शिकायतों को निर्धारित दिवसों में निस्तारण कर उसकी रिपोर्ट भी ऑनलाइन विभागीय अधिकारियों को करनी होती है। शिकायतों के निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री समेत शासन में बैठे अधिकारी आए दिन इसकी समीक्षा करते रहते हैं। जिलों द्वारा शिकायतों को समय से निस्तारित करने पर हर माह शासन इसका मूल्यांकन कर ग्रेड निर्धारित करता है। पिछले नवंबर के हुए मूल्यांकन में यह जिला 95 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश में दसवें स्थान पर आया है। जबकि अक्टूबर में यह जिला प्रदेश में 57 नंबर पर काबिज था। ई-डिस्ट्रिक मैनेजर धर्मेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शासन में पिछले नवंबर के हुए आईजीआरएस के मूल्यांकन में यह जिला प्रदेश भर के जिलों में दसवें स्थान पर आया। जिलाधिकारी द्वारा बराबर जन शिकायतों को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक व समीक्षा की जाती है।
ऐसे होता है मूल्यांकन
शासन ने आईजीआरएस को लेकर अलग-अलग अंक देने का सूत्र निर्धारित कर रखा है। उसी के आधार पर इसका मूल्यांकन किया जाता है। किसी भी पोर्टल पर आए हुए संदर्भ (शिकायत) को दो दिनों में निस्तारित करने पर 10 अंक, दो से ढाई दिनों के अंदर निस्तारित करने पर 8 अंक, ढाई से तीन दिनों के अंदर निस्तारित करने पर 6 अंक, तीन से साढ़े तीन दिनों में निस्तारित करने पर 4 तथा साढ़े तीन से चार दिनों के अंदर संदर्भों के निस्तारण पर 2 अंक शासन द्वारा जिलों को दिए जाते हैं। फिर इन अंकों को मिलाकर प्रतिशत के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।