प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को और अधिक रोजगार परक बनाने के लिए कई अतिरिक्त सुविधाएं व सहूलियतें देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2017 में बड़े बदलाव पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार ने संशोधित नीति से अगले पांच वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपये निवेश लाकर 2.5 लाख लोगों के लिए रोजगार का अवसर मुहैया कराने का लक्ष्य तय किया है।
वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2017 में पूंजीगत अनुदान व ब्याज में छूट की सुविधा दी जा रही है। इसकी भी अधिकतम सीमा 5 वर्षों में 2.5 करोड़ रुपये है। नतीजतन लघु व सूक्ष्म श्रेणी के प्रस्ताव ही सरकार को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को और अधिक सुविधाएं देकर बड़े निवेश आकर्षित करने की योजना बनाने का निर्देश दिया था।
शासन के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री से प्राप्त सुझावों को शामिल कर संशोधित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2017 का मसौदा तैयार कर लिया गया है। अब इसे कैबिनेट से मंजूरी लेकर लागू करने की योजना है। प्रस्तावित नीति से कृषक उत्पादक संगठनों व स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा।
एक जिला-एक क्लस्टर मॉडल को बढ़ावा
बुंदेलखंड व पूर्वांचल में स्थापित होने वाली इकाइयों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की योजना है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग होगा। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए ओडीओपी कार्यक्रम की तरह सरकार एक उत्पाद-एक क्लस्टर मॉडल को बढ़ावा देगी। इसे एफपीओ व एसएचजी के जरिए लागू कर किसानों को आगे बढ़ाया जाएगा।
खाद्य प्रसंस्करण क्लस्टर व पार्क का होगा विकास
स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर क्लस्टर के जरिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी तरह खाद्य प्रसंस्करण पार्क बनाने के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव है। ये पार्क पैकेजिंग, निर्यात व अनुसंधान से संबंधित सुविधाएं देंगे।
इस तरह के अनुदान प्रस्तावित
- पूंजीगत अनुदान : नए एमएसएमई एवं बड़े खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को परियोजना लागत का 20 प्रतिशत अधिकतम 10 करोड़ रुपये। मेगा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को अधिकतम 20 करोड़। चिह्नित फूड क्लस्टर में निवेश पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजीगत अनुदान। ग्रामीण क्षेत्र में एमएसएमई इकाइयों की स्थापना पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 3 लाख रुपये प्रति इकाई।
- फूड पार्क व एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर के लिए अनुदान : पीएम किसान संपदा योजना में फल व सब्जियों के प्रसंस्करण उद्योगों के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत अनुदान राशि के 10 प्रतिशत की दर से तथा न्यूनतम 50 करोड़ या इससे अधिक निवेश वाले मेगा व मिनी फूड पार्क में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत राशि के 10 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त अनुदान राज्य देगा।
- ब्याज में सहायता : सूक्ष्म व लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के प्लांट, मशीनरी व तकनीकी सिविल कार्य, स्पेयर पार्ट्स के लिए वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण पर देय ब्याज का शत प्रतिशत अधिकतम 25 लाख प्रति इकाई प्रतिवर्ष किया जाएगा। वृहद व मेगा इकाइयों को लिए गए ऋण पर देय ब्याज की दर का 7 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख प्रति इकाई प्रतिवर्ष दिया जाएगा। दोनों ही श्रेणी में यह सुविधा अधिकतम 5 वर्षों के लिए मिलेगी। एसएचजी, एफपीओ, एफपीसी, फेडरेशन व क्लस्टर्स में स्थापित इकाइयों को 10 प्रतिशत ब्याज उपादान की प्रतिपूर्ति अतिरिक्त की जाएगी।
- ग्रीन फील्ड फूड पार्क : न्यूनतम 15 एकड़ में स्थापित होने वाले पार्क के लिए विकासकर्ता को जमीन खरीदने को लिए गए ऋण पर 7 वर्षों में अधिकतम 50 लाख रुपये, बुनियादी सुविधाओं के लिए 7 वर्षों में अधिकतम 10 करोड़, टेस्टिंग प्रयोगशाला, कोल्ड रूम, पैकेजिंग हाउस आदि के लिए प्राप्त ऋण पर 5 करोड़ ब्याज की प्रतिपूर्ति होगी। स्टांप ड्यूटी पर 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी।
- सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना : केंद्र द्वारा स्वीकृत राशि का 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान मिलेगा। स्वयं सहायता समूहों को केंद्र पूंजी की अनुमोदित राशि का 5 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान प्रति सदस्य दिया जाएगा। रीफर वाहन की खरीद पर लिए गए ऋण पर अधिकतम 50 लाख प्रति इकाई की सीमा तक ब्याज की प्रतिपूर्ति।
-अनुसंधान व विकास : एनएबीएल अनुमोदित प्रयोगशालाओं की स्थापना पर लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 करोड़, टेस्टिंग लैब के लिए अधिकतम 5 लाख का पूंजीगत अनुदान मिलेगा।