लखनऊ के आलमबाग में 22 नवंबर को पांच साल की इशिका की जान महज 20 रुपये के इंसुलेटर से बच सकती थी। सपोर्ट वायर में अगर इंसुलेटर लगा होता तो करंट नीचे तक नहीं आता, लेकिन बिजली विभाग के ठेकेदार और तत्कालीन अभियंताओं के भ्रष्टाचार ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं।
बता दें लखनऊ में कृष्णानगर थानाक्षेत्र के स्नेह नगर में बिजली के खंभे में दौड़ रहे करंट की चपेट में आकर पांच साल की मासूम इशिका की मौत हो गई थी। प्रभारी निरीक्षक कृष्णानगर धीरेंद्र कुमार उपाध्याय के मुताबिक स्नेह नगर निवासी पूजा के पति मंगल सोनी की मौत हो चुकी है।
पूजा के मुताबिक रविवार दोपहर करीब तीन बजे पांच साल की बेटी इशिका पास की दुकान पर टॉफी लेने निकली थी। घर काफी तंग गलियों में है। रास्ते में लगे बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा था, जिसकी चपेट में आने से इशिका की मौत हो गई थी।
तत्कालीन अभियंता भौतिक सत्यापन के दौरान पोल के सपोर्ट वायर में इंसुलेटर लगाने का आदेश दिए होते तो हादसा नहीं होता। मौत के लिए लाइन बनाने वाले ठेकेदार, तत्कालीन उपखंड अधिकारी व जूनियर इंजीनियर दोषी हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या विभाग के अधिकारी इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।
...तो इसलिए नहीं लगाते इंसुलेटर
लेसा के कई ठेकेदारों ने बताया कि विभाग एक सपोर्ट वायर लगाने का 1280 रुपये भुगतान करता है। बिना इंसुलेटर के वायर लगाने में कर्मचारियों को दो घंटे का वक्त लगता है, लेकिन इंसुलेटर लगाना पड़े तो चार घंटे लगते हैं। वायर लगाने में कम समय लगे, इसलिए इंसुलेटर नहीं लगाते हैं।
10 फीसदी कमीशन के लिए जान से खिलवाड़
लेसा के बड़े ठेकेदार ने बताया कि उनकी बनाई बिजली लाइन पोल का सत्यापन करने वाले अभियंताओं को 10 फीसदी कमीशन मिलता है, जिसमें दो अभियंता शामिल होते हैं। इनमें अवर अभियंता सत्यापन करके उपखंड अधिकारी को रिपोर्ट पेश करता है।
इस पर वह मंजूरी का ठप्पा लगाकर फाइल को बढ़ाता है, जिसके आधार पर उसको भुगतान मिलता है। सपोर्ट वायर में इंसुलेटर न लगने से हर साल स्थानीय लोगों के साथ कई मवेशियों की जान चली जाती है।
जान चली गई तब जागे अफसर
मुख्य अभियंता मधुकर वर्मा ने 23 नवंबर को सभी अधिशासी अभियंताओं को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि नई लाइन को वायर में बिना इंसुलेटर लगे टेकओवर कर लिया जाता है। इंसुलेटर नहीं लगाने से सपोर्ट वायर में करंट उतरता है, जिसकी चपेट में आने से जान चली जाती है। पत्र में यह भी कहा कि ऐसी कई घटनाएं होने के बाद भी अभियंता इंसुलेटर का ध्यान नहीं रखते हैं। यही नहीं अभियंता ठेकेदार की बनाई ऐसी बिजली लाइन और पोल का भौतिक सत्यापन करने के बाद भुगतान भी कर देते हैं।
प्रकरण की चल रही छानबीन
करंट से बच्ची की मौत के मामले को लेकर प्रबंधन गंभीर है। पूरे मामले के लापरवाहों की खोजबीन चल रही है। सपोर्ट वायर में इंसुलेटर न लगाए जाने की भी जांच होगी। - सुधीर कुमार सिंह, निदेशक, तकनीकी, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम