बलरामपुर चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ. देवाशीष शुक्ल का कहना है कि अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि खुदकुशी करने वाले ने कुछ दिनों पहले बातचीत के दौरान किसी न किसी से ऐसा करने की बात अवश्य कही होती है। आपका कोई अपना, दोस्त या सहकर्मी यदि ऐसा बोले तो उससे खुलकर बात करें। उसकी परेशानी पूछें। निश्चित तौर पर वह अपनी परेशानी साझा करेगा। इस तरह आपकी सहानुभूति और अपनापन उसकी जान बचा सकता है। हालांकि अचानक किसी बात पर गुस्सा आने पर भी खुदकुशी के कुछ मामले सामने आते हैं मगर अधिकतर के पीछे किसी बात को लेकर हताशा या तनाव ही होता है।
ये तथ्य भी जानें
- ठंड में अवसाद की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में सर्दी के मौसम में खुदकुशी की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
- पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष करीब आठ लाख लोग खुदकुशी करते हैं।
- राजधानी में दो माह के भीतर 172 लोगों ने किया सुसाइड।
- गंभीर बीमारी, पारिवारिक कलह, आर्थिक स्थिति व जीवन में असफलता बनती है वजह।
- ऐसा करने वाले कुछ दिनों पहले अपनी बातों में संकेत अवश्य दे देते हैं।
इन बातों का ध्यान रखें
- जो बात बुरी लगे, वो घरवालों को जरूर बताएं
- जिंदगी के प्रति रखें संतुलित नजरिया
- दिनचर्या में सुधार लाएं
- संतुलित खानपान और व्यायाम करें
- अपनी पसंद के काम करें
- हंसे, घूमें और म्यूजिक सुनें
- तनावग्रस्त लोगों को अकेला न छोड़ें, उनसे सकारात्मक बातें करें
- तनावग्रस्त लोगों के आसपास ऐसा कुछ न हो, जिससे वे खुद को नुकसान पहुंचा सकें।
- नशे से दूर रहें। ये तनाव की ओर ले जाएगा।
- अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए हर सरकारी अस्पताल में मन कक्ष है। जहां मदद के लिए काउंसलर होते हैं।
- प्रत्येक चार पुरुषों में से एक डिप्रेशन का शिकार है।
- प्रत्येक तीन महिलाओं में से एक डिप्रेशन का शिकार है।
- हर इंसान जीवन में कभी न कभी चिंता या डिप्रेशन से अवश्य गुजरता है।
- इसका लक्षण दिखना जरूरी नहीं है, काउंसिलिंग से होती है पुष्टि
हाल की चर्चित घटनाएं
- 12 फरवरी की रात विभूतिखंड में बहराइच के रहने वाले संतोष व उसकी प्रेमिका नंदिनी ने ट्रेन से कटकर जान दे दी।
- 25 फरवरी को गोमतीनगर रिटायर्ड आईएफएस अतिबल सिंह ने बीमारी से परेशान होकर लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर खुदकुशी की।
- 26 फरवरी को इंदिरानगर निवासी डॉ. सुधीर वर्मा की पत्नी अंजू (49) ने बीमारी से परेशान होकर पति के लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर जान दी।