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सूबे में 167 शिक्षण संस्थान और होंगे ब्लैक लिस्टेड

Thu, 09 Jul 2015 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केस एक : राहुल सिंह ने इलाहाबाद के प्रयाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में वर्ष 2013-14 में बीटेक में दाखिला लिया और छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ लिया। वर्ष 2014-15 में इसी छात्र राहुल सिंह ने सैम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नॉलोजी एंड साइंस डीम्ड यूनिवर्सिटी के एमबीए में प्रवेश दिखाते हुए छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया। बीटेक पहली साल में दाखिला लेने वाला अगले साल ही किसी मास्टर डिग्री में कैसे दाखिला ले सकता है। जाहिर है कि छात्रवृत्ति की रकम हड़पने के लिए यह घपला किया गया।
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केस दो : अम्बरीश कुमार ने वर्ष 2013-14 में कौशाम्बी के एसपी मैमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भीथी माहेगांव में बीटेक पहली साल के लिए छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि ली। वर्ष 2014-15 में उसने कौशाम्बी डिग्री कॉलेज, तिलहापुर से बीए तीसरी साल के लिए भी इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया। इस मामले में भी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम हड़पने के लिए ही घपले को अंजाम दिया गया।

केस तीन : सुधीर कुमार विश्वकर्मा ने वर्ष 2013-14 में जीडी बिनानी पीजी कॉलेज, मिर्जापुर और प्रयाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट दोनों से दो अलग-अलग कोर्सों के लिए इस योजना का लाभ लिया। मिर्जापुर में उसे बीए पहली साल का विद्यार्थी दिखाया गया, जबकि प्रयाग इंस्टीट्यूट में बीटेक पहली साल का। एक ही वर्ष में दो अलग-अलग संस्थानों से दो पाठ्यक्रमों में दाखिला नहीं लिया जा सकता है।
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एक ही विद्यार्थी को कई-कई जगह पंजीकरण दिखाकर हड़पी शुल्क

सूबे के 167 शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में बड़ा घपला मिला है। इनमें एक ही विद्यार्थी को कई संस्थानों में दिखाकर योजना के तहत मिलने वाली रकम ठिकाने लगाने के सुबूत मिले हैं। नेशनल इंर्फामेटिक्स सेंटर (एनआईसी) की ट्रैकिंग में मामले पकड़ में आने पर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने ऐसे 176 संस्थानों को काली सूची में डालने की सिफारिश करने का फैसला किया है।

इलाहाबाद, कौशाम्बी और मिर्जापुर के ये तीन मामले तो नमूने भर हैं। हाल ही में इस तरह के हजारों मामले सामने आए हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मुताबिक, प्रयाग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, करछना, इलाहाबाद में वर्ष 2013-14 में दाखिला लेने वाले 355 विद्यार्थियों की ट्रैकिंग की गई तो पता चला कि इनमें से 242 विद्यार्थी अन्य संस्थानों में भी दूसरे पाठ्यक्रमों में पंजीकृत थे।

इसी तरह से वर्ष 2014-15 के 164 विद्यार्थी दूसरे संस्थानों में पंजीकृत मिले। प्रयाग इंस्टीट्यूट की तरह ही 167 संस्थानों में अब तक गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। जिस विद्यार्थी ने वर्ष 2009-10 में एमबीए कर लिया है, उसी का दाखिला वर्ष 2013-14 में बीटेक फर्स्ट ईयर में दिखाकर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के तहत मिलने वाली रकम हड़प ली गई।

ऐसे हजारों मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही विद्यार्थी को एक ही वर्ष में 4-5 संस्थानों में अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दिखाकर योजना का लाभ लिया गया। इनका ब्यौरा इकट्ठा कर लिया गया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक रामकेवल ने बताया इन सभी संस्थानों को काली सूची में शामिल करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी।
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