श्रावस्ती। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के जल्द ही पटरी पर आने की उम्मीद जगी है। शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि श्रावस्ती के जिला चिकित्सालय में डायलिसिस व एमआरआई की सुविधा मिलेगी।
श्रावस्ती जैसे छोटे जनपद में विशेषज्ञ चिकित्सक काम करने को तैयार नहीं हैं। इसलिए यहां तैनात होने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को ढाई लाख रुपये प्रतिमाह वेतन देने पर विचार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शुक्रवार को श्रावस्ती में मंडलीय समीक्षा बैठक की। इसमें नीति आयोग की ओर से चयनित जिले के बारे में चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में आठ जिले नीति आयोग की ओर से चयनित किए गए हैं। इसमें तीन जिले देवीपाटन मंडल के हैं। इसमें श्रावस्ती सबसे पिछड़ा है।
इसलिए समीक्षा बैठक का काम श्रावस्ती से ही शुरू किया है। उन्होंने कहा कि श्रावस्ती में सिटी स्कैन की व्यवस्था हो चुकी है। एमआरआई व डायलिसिस की व्यवस्था नहीं है।
जल्द ही श्रावस्ती में दस बेड का डायलिसिस वार्ड स्थापित होगा। एमआरआई मशीन भी लगाई जाएगी। समीक्षा के दौरान श्रावस्ती में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पर बोले, जिले को दस विशेषज्ञ दिए गए थे लेकिन कोई भी यहां रहना नहीं चाहता।
श्रावस्ती के चिकित्सकों को बहराइच में रहने की अनुमति व आने-जाने का भत्ता देने पर विचार हो रहा है। चिकित्सालय में ही फ्लैट बनवाने का सरकार विचार कर रही है।
शव को घर भेजने की जिम्मेदारी सीएमएस व सीएमओ की है। अगर किसी के घर तक शव एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है तो प्राइवेट वाहन को किराए पर लेकर शव भेजा जाना चाहिए।
सरकार अति पिछड़े जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को ढाई लाख रुपये देने का विचार कर रही है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
मातृ वंदन योजना : गोंडा व बहराइच में लक्ष्य के सापेक्ष नहीं पंजीकरण
जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव के बाद प्रसूताओं को मिलने वाला भुगतान बहराइच, बलरामपुर व गोंडा जिले में लंबित होने पर मंत्री भड़क गए।
तीनों जिलों के सीएमएस व सीएमओ को फटकार लगाकर सात जुलाई के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया है। मातृ वंदन योजना के तहत गोंडा व बहराइच में लक्ष्य के सापेक्ष पंजीकरण न होने पर सीएमओ व सीएमएस को दस दिन में पंजीकरण करवाने का निर्देश दिया है।
अब समीक्षा नहीं, होगा औचक निरीक्षण
बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा व बलरामपुर के सीएमओ को निर्देश दिया कि बाढ़ से पहले सभी चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती की जाए। दवाएं व अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं।
आयुष्मान भारत, बॉयोमीट्रिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथालॉजी सेंटर, मिशन इंद्र धनुष, एंबुलेंस की उपलब्धता, सीसीटीवी आदि की व्यवस्था सभी चिकित्सालयों में रहे। अब जिलों की समीक्षा नहीं, औचक निरीक्षण होगा। कमी मिलने पर सीएमएस व सीएमओ कार्रवाई के लिए तैयार रहें।