समय 11.40 बजे : सिंचाई खंड 45
एक्सईएन हरेंद्र कुमार सिंह का दफ्तर बाहर से बंद था। इस डिवीजन पर 72 छोटी-बड़ी नहरों के अलावा एक रजबहे की जिम्मेदारी है। ज्यादातर नहरों में धूल उड़ रही है। झाड़ियां और सिल्ट से पटी हैं। इससे टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। साहब नहीं रहते तो मातहत भी काम पर ध्यान नहीं देते। शाम पांच बजने से ही पहले ही मातहत घर पहुंच जाते हैं। उधर, एक्सईएन से जब बात की गई तो उनका कहना था कि वे पारी रजबहे का पुल टूटने के सिलसिले में चीफ इंजीनियर से मिलने के लिए लखनऊ गए हैं।
सीन दो
समय 11.42 बजे : सिंचाई खंड दक्षिणी
एक्सईएन सिद्धार्थ कुमार भी किसी से कम नहीं हैं। उनका चैंबर तो खुला था, लेकिन उनकी कुर्सी खाली थी। कुछ कर्मचारी बाहर गप्पे मार रहे थे। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि साइट पर गए हैं तो कुछ ने बताया कि साहब कई दिनों से अवकाश पर हैं। इनके पास 472 नहरों में पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी है। ज्यादातर नहरों में धूल उड़ रही है। इस डिवीजन में 45 से ज्यादा रजबहे हैं। ज्यादातर नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, लेकिन अभियंता किसानों के प्रति गंभीर नहीं है। ज्यादा समय तक अभियंता नदारद ही रहते हैं। इस बाबत एक्सईएन ने बताया कि वह 15 जून तक अवकाश पर हैं। उनके डिवीजन का चार्ज सिंचाई खंड 45 के पास है।
सीन तीन
समय 11.44 बजे : सिंचाई खंड छह
एक्सईएन एके सिंह भी नदारद रहे। इनके पासकेवल डलमऊ पंप कैनाल ए और डलमऊ पंप कैनाल बी का चार्ज है। पंपों का मेंटीनेंस नहीं होने से पर्याप्त पंप नहीं चल पाते हैं, लेकिन साहब को इसकी कोई फिक्र नहीं है। यही वजह है कि मांग के अनुरूप पंप नहीं चल पाते हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। डलमऊ पंप से एनटीपीसी समेत करीब 50 से ज्यादा छोटी बड़ी नहरों को पानी जाता है। एक्सईएन ने बताया कि वह विभागीय कार्य से सर्किल लखनऊ में हैं। इस समय छह पंप चलाने की मांग है, लेकिन आठ पंप चलाए जा रहे हैं।
सीन चार
समय 11.46 बजे : सिंचाई खंड 28
एक्सईएन त्रियंबक त्रिपाठी दफ्तर में मौजूद थे। कर्मचारियों के साथ विभागीय कार्य निपटा रहे थे। करीब एक घंटे के बाद कहीं निकल गए। इस खंड में शारदा सहायक नहर आती है। पूछने पर एक्सईएन ने बताया कि शारदा सहायक नहर में 3700 क्यूसेक पानी की क्षमता है। इस समय करीब 3600 क्यूसेक पानी मिल रहा है। एनटीपीसी में बैठक है, जिसमें शामिल होने के लिए वह निकल रहे हैं।
रायबरेली। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश सिंचाई विभाग के अफसरों व कर्मचारियों के लिए मायने नहीं रखते। जिले के तीन लाख 85 हजार किसानों को धान की रोपाई करनी है, लेकिन नहरों में धूल उड़ रही है। ऐसे में किसानों की बेबसी को समझा जा सकता है। पर लापरवाह अफसर और मातहत को सिर्फ अपनी चिंता है। दो वक्त की रोजी-रोटी का जुगाड़ करने वाले अन्नदाताओं से उनका कोई सरोकार नहीं है। अमर उजाला ने सोमवार को सिंचाई विभाग के सभी खंडों की पड़ताल की तो दफ्तरों का नजारा बदला दिखा। अफसर नदारद थे। मातहत आपस में गपशप कर रहे थे। यह हाल तब है, जब जिले में 545 नहरों का जाल बिछा है। इन्हीं नहरों से फसलों की सिंचाई की जाती है।
नहीं पहुंच रहा पानी, कैसे तैयार करें धान की नर्सरी
परशदेपुर क्षेत्र के पदुमपुर गांव निवासी रामअचल, डीह ब्लॉक क्षेत्र के बराडीह निवासी रामकुमार कौशल ने बताया कि क्षेत्र की नहरों में पिछले कई महीनों से पानी नहीं आ रहा है। इससे धान की बेड़न डालने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के पूरे बेहरबार निवासी तेजपाल चौहान ने बताया कि साईपुर माइनर में एक महीने से पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे उर्द, मूंग की जहां फसल सूख रही है, वहीं धान की बेड़न किसान नहीं डाल पा रहे हैं। जिन किसानों के पास निजी साधन की व्यवस्था है। वह तो किसी तरह धान की बेड़न डाल रहे हैं। खीरों ब्लॉक क्षेत्र मझिगवां निवासी बालगोविंद ने बताया कि नहर शारदा सहायक पुरवा ब्रांच नहर में पानी नहीं आया है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इनसेट
इस बार फसलों के आच्छादन पर एक नजर
फसल लक्ष्य
धान 91940 हेेक्टेयर
उर्द 15471 हेक्टेयर
मूंग 827 हेक्टेयर
अरहर 5988 हेक्टेयर
तिलहन 4397 हेक्टेयर
लापरवाह अफसरों व कर्मियों पर होगी कार्रवाई
सिंचाई विभाग का जल्द निरीक्षण कराया जाएगा। समय से दफ्तर न पहुंचने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी की भी मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- संजय कुमार खत्री, डीएम