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Lucknow News: लाक्षागृह जैसे हैं राजधानी के 147 होटल-लॉज...

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राजधानी में संकरी गलियों में चल रहे हैं होटल। 
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लखनऊ। दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को होटल में लगी भीषण आग में 21 लोग जिंदा जल गए। लखनऊ में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। चार वर्ष पहले होटल लेवाना और आठ वर्ष पहले चारबाग के होटल में आग लगने की घटनाओं में नौ लोगों ने जान गंवाई थी। इसके बावजूद शहर में अभी भी 147 होटल-लॉज और रेस्टोरेंट ऐसे हैं, जिन्हें लाक्षागृह कहना गलत नहीं होगा। अग्निशमन विभाग ने ही इन्हें आग के प्रति बेहद असुरक्षित माना है।
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विभाग ने डेढ़ माह पहले अभियान चलाया था। इसमें उसे ऐसे 147 होटल व लॉज मिले थे, जिसमें न तो फायर फाइटिंग सिस्टम न ही आपातकालीन निकास द्वार था। विभाग ने इन्हें नोटिस देकर जरूरी व्यवस्थाएं दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। सूत्रों के अनुसार नोटिस के बावजूद इनमें से ज्यादातर होटल-लॉज संचालकों ने कुछ नहीं किया। आज भी इनमें हजार से 1500 रुपये में अतिथि ठहराए जा रहे हैं।

मानक का फायदा उठा रहे होटल संचालक
अग्निशमन विभाग के मानक के अनुसार होटल की लंबाई 15 मीटर और क्षेत्रफल 500 वर्गफीट से अधिक है तो ही संचालक को एनओसी लेनी होगी। इस मानक का लाभ चारबाग की रेवड़ी मंडी वाली गली में स्थित करीब 300 होटल और गेस्ट हाउस संचालक उठा रहे हैं। इनका क्षेत्रफल 500 वर्गफीट से कम है। यहां आने-जाने का रास्ता इतना संकरा है कि आग लगने पर दमकल की गाड़ियों का पहुंचना भी नामुमकिन है। प्रवेश द्वार भी इतना संकरा है कि आपात स्थिति में लोगों का निकलना मुश्किल होगा।
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लेसा ने सात होटलों की काटी बिजली
दमकल विभाग ने 147 होटल-लॉज के अतिरिक्त सात ऐसे होटलों का भी कनेक्शन काटने के लिए लेसा को पत्र लिखा था, जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक थे। इनकी इमारत की लंबाई-चौड़ाई मानक अनुसार नहीं थी। आने-जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता था। आग बुझाने का एक भी उपकरण नहीं था। पत्र मिलने के बाद होटल इम्पैक्ट- विराजखंड, होटल द रॉयल लेगेसी-विराजखंड, होटल ऑर्चिड-विराजखंड, होटल श्योर स्टे- विराजखंड सेक्टर-सी, होटल नेक्सस- नाका गुरुद्वारा रोड, होटल सेलिब्रेशन-कृष्णानगर और आलमबाग के होटल विनायक की बिजली काटी गई।

नोटिस तक सीमित रह जाती है कार्रवाई
होटल में अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग की है। हालांकि, छोटे होटलों के मामले में विभाग की कार्रवाई नोटिस जारी करने तक सीमित है। सूत्र बताते हैं कि अब तो होटल संचालक जवाब तक नहीं देते है। जब कभी आग लगने की घटना होती है विभाग फिर से सक्रिय होता है और कुछ समय बाद मामला फिर शांत हो जाता है।

इन कोचिंग संस्थानों को भी दिया गया नोटिस
एलन कोचिंग सेंटर हलवासिया कोर्ट-हजरतगंज, भवन कोटा स्टडी फोरम-जानकीपुरम विस्तार, टाइम्स कोचिंग सेंटर/टेक्सेज लाइब्रेरी- घास मंडी ठाकुरगंज, कोचिंग सेंटर चौहान प्लाजा, ठाकुरगंज, बोस्टन एकेडमी ठाकुरगंज, वन-नीट इंस्टीट्यूट ठाकुरगंज, प्रशांत सर क्लासेज-चौक, डायनामाइट एजुकेशन हब- अलीगंज, आकार कोचिंग सेंटर-अलीगंज, ग्रेविटी कोचिंग सेंटर-कपूरथला चौराहा, वन-रेस आईएएस कोचिंग-अलीगंज, वेदांता पीसीएस जे कोचिंग सेंटर-अलीगंज, गैलेक्सी क्लासेज-अलीगंज, शील्ड डिफेंस कोचिंग सेंटर-इंदिरानगर, शारदा आईएएस-अलीगंज, ध्येय आईएएस-अलीगंज, महेंद्रा एजुकेशन-कृष्णानगर। इनमें से कुछ ने अग्निशमन मानक के अनुसार व्यवस्थाएं पूरी कर लीं हैं।


अग्निशमन विभाग के मानक

बिल्डिंग की ऊंचाई 15 मीटर और क्षेत्रफल 500 वर्गफीट से अधिक है तो फायर एनओसी लेना अनिवार्य है।

होटल तक का संपर्क मार्ग न्यूनतम 10 फीट चौड़ा होना चाहिए।

होटल में वैकल्पिक मार्ग और फायर फाइटिंग सिस्टम अनिवार्य है।

स्मोक प्रेशर सिस्टम और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

मुख्य प्रवेश द्वार पर किसी तरह कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।

राजधानी में संकरी गलियों में चल रहे हैं होटल। 

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