बहराइच/राजीचौराहा। इंतजार के बाद तराई में रात से शुक्रवार भोर तक झमाझम बरसात हुई। जिसके चलते महसी और नानपारा तहसील क्षेत्र में पांच मकान ढह गए। मलबे की चपेट में आकर दो महिलाओं समेत पांच लोग चोटहिल हुए हैं। स्थानीय चिकित्सकों के यहां सभी का इलाज कराया गया। मलबे में दबकर पूरी गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया। पीड़ित परिवार खुले आसमान तले गुजर बसर करने को मजबूर हो गए हैं।
तराई में दो दिन से बादल उमड़ घुमड़ रहे हैं। लेकिन झमाझम बरसात गुरुवार रात को हुई। रात नौ बजे शुरू हुई वर्षा शुक्रवार भोर तक जारी रही। 22 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। वर्षा के चलते सुबह जगह-जगह जलभराव की स्थिति दिखी। महसी तहसील के ऐरिया में राजेश कुमार श्रीवास्तव का कच्चा मकान अचानक ढह गया। चपेट में आकर उनकी बहन रामजानकी चोटहिल हो गईं। घर का सारा सामान मलबे में दब गया। वहीं खैरीघाट थाना क्षेत्र के पंडितपुरवा में लल्लू, बदलूराम और जनकदुलारी के कच्चे मकान ढह गए। भोर में तीन बजे के आसपास मकान की दीवारें ढहीं। उस समय परिवार के लोग सो रहे थे। बाल-बाल बचे, लेकिन चपेट में आकर चोटहिल हो गए। वहीं मोतीपुर तहसील क्षेत्र में कारीकोट में सुंदरलाल के कच्चे मकान की दीवार ढह गई। यहां भी पूरी गृहस्थी मलबे में दब गई। मकान ढहने से चपेट में आए लोगों को मामूली चोटें आने के चलते स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया गया।
किसानों के खिले चेहरे
वर्षा के चलते किसानों के चेहरे खिल उठे। धान के खेतों में पानी मनमाफिक भर गया। किसानों का मानना है कि यह वर्षा उत्पादन को बढ़ाएगी। अब सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कैसरगंज और फखरपुर क्षेत्र में शाम से गुल है बिजली
तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा के चलते कैसरगंज और फखरपुर क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। गुरुवार शाम से बिजली गुल है। इससे नवरात्र में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। उद्योग धंधे तो ठप हैं ही, नवरात्र पूजा में लोगों को पेयजल की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है। एक्सईएन टीआर श्रीवास्तव का कहना है कि तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा के चलते तकनीकी फाल्ट हुआ है। लाइनमैन फाल्ट को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं।
दो दिन तक मौसम में रहेगा उतार-चढ़ाव
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि तराई के मौसम में दो दिनों से उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। बूंदाबांदी के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्षा के बाद किसान रवी की फसल की बोवाई के लिए खेतों की तैयारी में भी जुट सकते हैं।