डॉक्टरों को सरकारी सेवा में लाने के सभी प्रयास असफल साबित हो रहे हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा के प्रति डॉक्टर रुचि नहीं दिखा रहे। वे ज्वाइन तो करते हैं, लेकिन फिर ड्यूटी से लापता हो जाते हैं। शासन ने ऐसे डॉक्टरों की सूची तैयार कर ली है। ऐसे 1250 से अधिक ‘लापता’ डॉक्टरों को चिह्नित करके सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
18 हजार के प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग में लगभग सात हजार डॉक्टरों की कमी है। जो 11 हजार डॉक्टर सेवा में हैं, उनमें से भी लगभग 1264 डॉक्टर ‘लापता’ हैं। इनमें 1163 लापता डॉक्टर लेवल वन के हैं। लेवल टू के 51, लेवल थ्री के 32 और लेवल फोर के 18 डॉक्टर लापता हैं। वहीं, लगभग 350 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। यह आंकड़ा हाल ही शासन ने प्रदेश भर के सीएमओ-सीएमएस से इकट्ठा कराया है।
प्रांतीय चिकित्सा में लेवल वन में नए नियुक्त डॉक्टरों को रखा जाता है। ये डॉक्टर सरकारी सेवा में आए तो सही, लेकिन जैसे ही इन्हें ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति मिली, अलग-अलग कारण बताकर ड्यूटी से लापता हो गए। शासन की ओर से इन डॉक्टरों को उनके स्थायी पते और अस्थायी पते पर नोटिस भेजा गया, लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया है।
आंकड़ों के अनुसार, 450 से अधिक डॉक्टर लगभग तीन साल से ड्यूटी से लापता हैं। 230 से अधिक डॉक्टर करीब पांच साल से लापता हैं। वहीं 550 डॉक्टर पांच साल से अधिक समय से लापता हैं। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य देवेश चतुर्वेदी का कहना है कि अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची बनाई गई है। इन्हें अंतिम नोटिस भेजा जा रहा है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।