गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बच्चों की मौत ने पूरे देश का हिलाकर रख दिया है। अवध क्षेत्र के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में विगत एक माह में हुई बच्चों की मौत के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। कहीं न कहीं संसाधनों की कमी और लापरवाही को इन मौतों की वजह माना जा सकता है।
सरकारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि अकेले बहराइच जिले में ही अगस्त महीने में 63 बच्चों की मौत हुई है। इनमें 57 मौतें तो जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हुई, जबकि 6 बच्चों की मौत पीएचसी-सीएचसी में हुई। डॉक्टर बताते हैं कि आधी मौतें बर्थ एक्सपीसिया व अन्य संक्रामक रोगों से हुई हैं।
जबकि गंभीर नन्हें रोगियों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में बाल पीआईसीयू स्थापित है। यहां पर छह डॉक्टरों की तैनाती का मानक है, लेकिन एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। उधर, गोंडा जिले में एक माह के भीतर 24 बच्चों की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है, इनमें 24 नवजात थे।
हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मरने वाले ज्यादातर बच्चे कम उम्र के थे और उनका वजन काफी कम था। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों की मौत के मामले में कोई जिम्मेदार डॉक्टर मुंह खोलने को भी तैयार नहीं है।