पूर्वांचल विकास निधि से मिर्जापुर में बनाई गई सड़कों में गड़बड़ी पाए जाने पर पीडब्ल्यूडी के बारह इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इसके तहत एक अधिशाषी अभियंता और तीन सहायक अभियंताओं को शासन स्तर से निलंबित कर दिया गया है।
छह अवर अभियंताओं को निलंबित करने के निर्देश पीडब्ल्यूडी मुख्यालय को जारी किए गए हैं। इसके अलावा दो अधीक्षण अभियंताओं को भी आरोप पत्र दिए जाने का आदेश दिया गया है।
वर्ष 2012-13 में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से मिर्जापुर जिले की सड़कों के लिए नब्बे करोड़ रुपये दिए गए थे।
इसमें से 60 करोड़ रुपये पूर्वांचल विकास निधि और 30 करोड़ रुपये विशेष मरम्मत मद से स्वीकृत हुए थे। इस रकम से 270 किलोमीटर लंबी करीब सौ सड़कों को ठीक किया जाना था।
पिछले महीने इन सड़कों की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत शासन से की गई थी। इस पर लखनऊ जोन के चीफ इंजीनियर वीके सिंह को मिर्जापुर भेजकर जांच कराई गई।
जांच के दौरान 21 सड़कों में से 17 सड़कों में खामियां मिलीं। इनमें डीबीएम (पत्थर की पहली परत) और बीसी (तारकोल व बजरी की दूसरी परत) लगाने में गुणवत्ता का जरा भी ख्याल नहीं रखा गया।
इतना ही नहीं दो सड़कों का निर्माण कागजों में पूरा दिखा दिया गया जबकि मौके पर यह अधूरी मिलीं।
इनके खिलाफ की गई कार्रवाई
जांच रिपोर्ट मिलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अधिशाषी अभियंता राकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया।
सहायक अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव अधिकृत हैं। उन्होंने तीन सहायक अभियंता वीके श्रीवास्तव, जेपीएन पांडे और आरके साहू को सस्पेंड कर दिया।
इसके अलावा छह अवर अभियंताओं को निलंबित करने के निर्देश प्रमुख अभियंता (विकास एवं विभागाध्यक्ष) को दिए गए हैं।
इनमें केएस श्रीवास्तव, एसी पांडे, कासिफ चौधरी, विक्रम सिंह यादव, राम मुरार राम और एसएन त्रिपाठी शामिल हैं। इसके अलावा दो अधीक्षण अभियंता (एसई) अनिल कुमार जैन और रमेश चंद्र के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं।