फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारिश के साथ गिरे ओले से 20 फीसदी फसल के नुकसान की आशंका

विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन
बहराइच। तराई में अचानक मौसम बदलने के साथ सोमवार देर शाम झमाझम बरसात शुरू हो गई। चने के आकार के ओले गिरे। इससे लगभग 20 फीसदी फसल के नुकसान की आशंका है। आलू, तिलहन और दलहन की खेती करने वाले किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं।
विज्ञापन


अगर मौसम इसी तरह कुछ दिन रहा तो फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। बारिश से तापमान भी लुढ़क गया है। सिहरन बढ़ गई, जिससे लोग पुन: गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आ रहे हैं। तराई में मौसम निरंतर करवट ले रहा है। बीते तीन दिनों से पछुवा हवा के साथ मौसम में तेजी से तब्दीली हुई।

सोमवार सुबह जब लोगों की नींद खुली तो बादल छाए हुए थे, बूंदाबांदी हो रही थी। ठंडी पछुवा हवा ठिठुरन और गलन का एहसास करा रही थीं। लगा कि दिन भर बादल बरसेंगे।
विज्ञापन


कुछ देर बाद बूंदाबांदी थम गई। लेकिन बदली जस की तस रही। सोमवार देर शाम को गरज-चमक के साथ अचानक झमाझम बरसात शुरू हो गई।

लगभग 10 मिनट तक चने के आकार के ओले गिरे। इससे सबसे अधिक दिक्कत तिलहन, दलहन और आलू की खेती करने वाले किसानों के सामने उत्पन्न हुई है। 60 फीसदी खेतों में अगेती तिलहन की फसल कट चुकी है। किसान खेतों में कटी फसल छोड़कर उसके सूखने का इंतजार कर रहे थे।

लेकिन बरसात से खेत में ही फसल सड़ने की नौबत उत्पन्न हो गई है। 95 फीसदी किसानों के खेतों में आलू की फसल तैयार है। खोदाई चल रही है। झमाझम बरसात से आलू की फसल के भी सड़ने की नौबत बन गई है। गेहूं के किसान खुश जरूर हैं, क्योंकि बूंदाबांदी और बौछारें फसल के लिए संजीवनी हैं।

फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह की मानें तो पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होने के कारण तराई में बरसात की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि आगामी 24 घंटे तक बूंदाबांदी और बौछारों की संभावना है। अभी और ओले गिर सकते हैं। अचानक मौसम बदलने के कारण अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है।

20 प्रतिशत तक फसलें बर्बाद
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि बसंत के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ से मानसून सक्रिय होने पर ओला गिरने की संभावना 90 फीसदी होती है। सोमवार देर शाम को जिस तरह 10 मिनट तक ओले गिरे, उससे खेत में तैयार तिलहनी फसलों को 20 फीसदी से अधिक का नुकसान पहुंचने की आशंका है।

जो फसल खेतों में कटी पड़ी है, वह भी प्रभावित होगी। तिलहन के साथ ही दलहनी फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंच सकता है। जिन किसानों ने अगेती तिलहनी फसलों की कटाई कर ली है, वे फसलों को खेत में जलभराव से निकालकर सुरक्षित कर लें।

बरसात में पड़े रहने पर फलियां सड़ सकती हैं। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र से सटे मिहींपुरवा विकासखंड के इलाके में लगभग साढ़े पांच हजार किसानों की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें