केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर से गुरुवार आधी रात मरीज शिफ्ट कराने के दौरान दबोचे गए दलाल को छोड़ने के मामले में फजीहत के बाद पुलिस ने शनिवार को ट्रॉमा के बाहर से 11 निजी एंबुलेंस को सीज किया। पुलिस का दावा है कि इनसे ही मरीजों को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया जाता था।
पूरे प्रकरण में अहम बात यह है कि पुलिस की पूछताछ में दलाल ने कई राज वीडियो में उगले थे। इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई से पीछे हट गई। इस पर पुलिस का कहना है कि ट्रॉमा से तहरीर न मिलने से दलाल पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उधर, केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि दलाल पकड़े जाने की जानकारी उन्हें पुलिस से बाद में हुई। शनिवार को मामला अफसरों तक पहुंचा तो जवाब तलब किया गया। इस पर एसीपी आईपी सिंह ने कहा कि तहरीर न मिलने से दलाल पर दफा 34 में कार्रवाई की गई। उसकी एंबुलेंस सीज कर दी गई है।
केजीएमयू का नाम खराब कर रहे निजी अस्पताल
दलाल ने पूछताछ में जिस अस्पताल संचालक का नाम कुबूला था, उसने फेसबुक में केजीएमयू से एमबीबीएस करने का दावा किया है। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संचालक पर कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र भेजा जाएगा। अस्पताल संचालक ने आईडी में खुद को एमबीबीएस का छात्र लिखा है। इससे वह गरीब मरीजों को फंसाकर अपने अस्पताल में भर्ती कर रहा है। केजीएमयू प्रशासन का कहना है जांच कराई जा रही है। प्रथमदृष्टया सोशल मीडिया पर संचालक के जरिये अपलोड जानकारी गलत है। ट्रॉमा प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मरीजों की दलाली कराने वाले संचालक के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।