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मायावती सरकार में हुए चीनी मिल घोटाले में बड़ी कार्रवाई : ईडी ने बसपा नेता की 1097 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की

Wed, 10 Mar 2021 02:11 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश में मायावती की सरकार के दौरान 2010-11 में हुए चीनी मिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बसपा के पूर्व एमएलसी मो. इकबाल द्वारा खरीदी गई सभी सात चीनी मिलों को अटैच कर लिया है। ईडी ने इनकी कीमत 1097.18 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि इकबाल ने अपनी शेल कंपनियों के नाम पर इन्हें महज 60.28 करोड़ रुपये में खरीदा था।
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यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई है।

ईडी ने दो साल पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। केंद्रीय एजेंसी सीरियस फ्रॉड इंवेस्टीगेशन ऑफिस की जांच में भी मामले में अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि शेल कंपनियों नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और ग्रिआशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये ये चीनी मिलें खरीदी गई थीं।

सूत्रों के मुताबिक इकबाल ने ग्रिआशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और नम्रता प्राइवेट लिमिटेड ने सात ऐसी कंपनियों को खरीदा जो 2011 में ही रजिस्टर हुईं थीं। ये कंपनियां एब्लेज चीनी मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, आदर्श शुगर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एजिल शुगर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईकोन शुगर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, मैजेस्टी शुगर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मास्टिफ शुगर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और ओकरा शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड हैं।
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इन मिलों की हुई खरीद 
कुशीनगर की लक्ष्मीगंज शुगर यूनिट, रामकोला यूनिट व छितौनी युनिट के अलावा बरेली यूनिट, देवरिया यूनिट, हरदोई यूनिट और बाराबंकी यूनिट 

नियम व शर्तों की हुई अनदेखी 
मामले की जांच में लगी ईडी की टीम ने दो साल पहले मो. इकबाल के सहारनपुर व दिल्ली आवास पर छापे मारे थे। इस कार्रवाई में काफी दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच के दौरान पता चला था कि इकबाल ने नियमों को दरकिनार कर चीनी मिलों की बिड में हिस्सा लिया। इसके अलावा शर्तों को पूरा किए बिना अपने सहयोगियों व परिवार के लोगों की मदद से इन मिलों को कौड़ियों भाव में हथिया लिया। 

सीबीआई भी कर रही है जांच
इस बहुचर्चित घोटाले की जांच सीबीआई भी कर रही है। जो चीनी मिलें इकबाल ने खरीदी थीं उसके बारे में लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में भी प्रशासनिक और वित्तीय विसंगतियों के बारे में टिप्पणी की गई थी।  
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इन मामलों में भी फंसे इकबाल 

- 27 जुलाई, 2019 को किरन मनचंदा निवासी गुरुग्राम ने मिर्जापुर थाने में मोहम्मद इकबाल व अन्य के खिलाफ बंधक बनाने, लूट और अन्य अपराधों में रिपोर्ट दर्ज कराई। 
- बेहट तहसील के गांव शफीपुर निवासी सविता ने इकबाल के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी
- अगस्त 2019 में इकबाल, दो पूर्व खान अधिकारी व खनिज विभाग कार्यालय के लिपिक के खिलाफ सदर बाजार कोतवाली में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
- 12 जुलाई 2019 में अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) ने इकबाल व उसके बेटे मोहम्मद वाजिद द्वारा बेहट तहसील क्षेत्र में भूमि खरीदने में अनियमितता पर करीब 35 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। 
- 28 जुलाई 2019 में इकबाल के भाई बसपा एमएलसी महमूद के घर पर 50 करोड़ रिकवरी का नोटिस चस्पा हुआ। यह रकम एनजीटी द्वारा 2016 में लगाए जुर्माने के रूप में वसूली जानी है। 

इनके खिलाफ दर्ज हुए था केस 
2010-11 में प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलों को मुखौटा कंपनियों के जरिये खरीदा गया। इस बाबत 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। मुखौटा कंपनियों में डायरेक्टर राकेश शर्मा निवासी रोहिणी दिल्ली, धर्मेंद्र गुप्ता निवासी इंदिरापुरम गाजियाबाद, सौरभ मुकुंद निवासी साउथ सिटी सहारनपुर, मोहम्मद जावेद निवासी मिर्जापुर, सुमन शर्मा निवासी रोहिणी दिल्ली, मोहम्मद नसीम अहमद निवासी मिर्जापुर, मोहम्मद वाजिद पुत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मिर्जापुर को नामजद किया गया था। 
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