बाराबंकी। शहर की सड़कों पर दुकान के आगे दुकान लगाकर कारोबार करने वाले व्यापारियों ने आम आदमियों का चलना दूभर कर दिया है। मुख्य सड़कों पर दुकानें लगाने से दिनभर लोग जाम से जूझते रहते हैं। वहीं, अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर पालिका और जिला प्रशासन सिर्फ कागजी खानापूरी कर कोरम पूरा करता है। हालात यह हैं कि सुबह से लेकर देर शाम तक बड़े शोरूम वाले हों या फिर सड़क के किनारे कार बाजार से लेकर गाड़ियों की मरम्मत करने वाले, सबके वाहन सड़कों की फुटपाथ पर जमा रहने के कारण जाम लगा रहता है। डीएम बंगले से लेकर पल्हरी चौराहे तक शहर के भीतर की मुख्य सड़क पर जाम लगने का यह नजारा प्रतिदिन देखा जा सकता है। डीएम, एसपी भी आते-जाते इस समस्या से रूबरू होते हैं, पर कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं। कुछ दिन पहले जोरशोर से एसडीएम की अगुवाई में नगर पालिका के कर्मचारियों ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया, पर उनका पूरा फोकस पान, चाय की दुकान से लेकर ककड़ी, खीरा व लइया बेचने वालों तक सीमित रहा। मंगलवार को अमर उजाला ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क की हालत की एक तस्वीर आपके सामने पेश की है, शायद इसे देखकर जिले के जिम्मेदार अफसरों की आंखें खुलें और नासूर बन चुकी इस जाम की समस्या से मरीजों से लेकर बच्चों तक को राहत मिल सके। एसडीएम सदर सुशील प्रताप सिंह ने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ कई बार अभियान चलाया गया है। व्यापारियों को एक सीमित दायरे में दुकानें लगाने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद भी यदि सड़क पर दुकानें लगाई जा रही हैं तो यह गलत है, इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
केडी सिंह बाबू स्टेडियम रोड का नजारा
केडी सिंह बाबू स्टेडियम के दोनों ओर अतिक्रमण ही अतिक्रमण है। एक तरफ भूसा मंडी से लेकर गाड़ियों को ठीक करने वालों की दुकानें सज जाती है तो दूसरी तरफ सड़क किनारे माल, रेस्टोरेंट से लेकर पुरानी बाइक बेचने का धंधा सड़क के फुटपाथ ही फलफूल रहा है। कई बार प्रशासन दिखावे के नाम पर यहां की पान की गुमटियों को हटवा कर कुछ घंटे तक अतिक्रमण नहीं होने दिया। पर अधिकारियों के जाते ही फिर कब्जा हो गया।
सतरिख नाका चौराहे पर अतिक्रमण
शहर के सबसे मशहूर सतरिख नाका चौराहा की पहचान अतिक्रमण वाले चौराहे के रूप में हो गई। पुलिस बूथ पर तैनात कर्मचारी भी यहां पर सड़क पर लगी दुकानों को हटवाने का साहस नहीं कर पाते हैं। ऊपर से डग्मार वाहन यहां पर बीच सड़क पर खड़ा कर सवारियां भरते रहते हैं। इससे पूरे दिन लोगों का निकलना दूभर हो जाताहै। हालात यह हैं कि यहां से सौ मीटर आगे और पीछे सड़क के किनारे दुकानदारों ने अपना सामान फैला रखा है।
अंबेडकरनगर छात्रावास के पास का हाल
अंबेडकर छात्रावास के निकट विशाल मेगा मार्ट से लेकर जैदपुर मोड़ तक वाहनों का कब्जा रहता है। सड़क किनारे पार्किंग हो या कार बाजार, सबका ठिकाना फुटपाथ ही है। यही नहीं ट्रक व ट्रैक्टर से लेकर बड़ी बड़ी गाड़ियों की मरम्मत के लिए गैराज सड़क का किनारा ही होता है। यही कारण है कि सुबह से लेकर शाम तक लोगों के वाहन रेंग कर चलते हैं। कभी-कभी तो कार बाजार में सजी गाड़ियां ट्रायल के लिए सड़क पर ही खड़ी कर दी जाती हैं।।
सड़क पर ही जाती वाहनों की मरम्मत
फैजाबाद-लखनऊ मार्ग पर पल्हरी चौराहे के निकट सड़क पर बड़े वाहन (ट्रक आदि) खड़े कर उनकी रिपेयरिंग की जा रही है। यहां पर चल रहे व्यवसाय ने फुटपाथ ही नहीं मुख्य सड़क को भी गिरफ्त में ले लिया है। यहां पर बनी नई सड़क मरम्मत के लिए खड़े वाहनों के कारण जाम ही नहीं लगता है, बल्कि लोग हादसे का शिकार भी हो रहे हैं। आसपास में मिल और पेट्रोल पंप के कारण दर्जनों वाहन सड़क के किनारे पार्किंग की तरह खड़े रहते हैं। जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।