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घाघरा ने लीले 16 मकान व 250 बीघा खेत

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राजीचौराहा/घाघराघाट। घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। लेकिन कटान में कोई कमी नहीं हो रही है। कटान के चलते महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी के किनारे बसे 16 ग्रामीणों के मकान नदी की धारा में रविवार को विलीन हो गए हैं। 250 बीघा खेत भी नदी में समाहित हुए है। वहीं घाघरा नदी खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। सूचना के बावजूद राहत व बचाव कार्य शून्य है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे ग्रामीणों में दहशत की स्थिति है। हड़कंप मचा हुआ है।
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तराई और नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा का क्रम थम नहीं रहा है। 24 घंटे में दो से तीन घंटे मूसलाधार वर्षा हो रही है। इसका नतीजा नदियों के उफान के रूप में सामने आ रहा है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक हरिओम ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर रविवार को 106.236 मीटर रिकॉर्ड हुआ। यह जलस्तर खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर अधिक है। वहीं कटान भी तेज हो गई है। नदी की लहरें इस समय महसी के चुरईपुरवा, गोलागंज, नईबस्ती, कहारनपुरवा में कटान कर रही है। चुरईपुरवा में राकेश, मूसुद्दीन, लायकराम, नन्हूं, तीरथ समेत नौ ग्रामीणों के मकान नदी में समा गए हैं। जबकि कैसरगंज के गोड़हिया नंबर दो में सात ग्रामीणों के मकान को घाघरा नदी ने लीला है। इस समय घाघरा नदी की लहरें महसी के उमरी और मुरौवा गांव के बीच धान और गन्ने के खेतों में कटान कर रही है। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन अब तक कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। वहीं एसडीएम नागेंद्र कुमार का कहना है कि राजस्वकर्मी क्षेत्र में निरंतर गश्त कर रहे हैं। कटान प्रभावित इलाकों में मकान और खेत नदी में समाहित होने की सूची तैयार की जा रही है। सूची उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाएगी। इसके बाद उसी के तहत मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
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