चौदह साल सत्ता का वनवास काटकर लौटी भाजपा की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के सौ दिन हो गए। सौ दिन की सरकार ने लोगों से जुड़ी समस्याओं से जुड़े सवालों को हल करने के प्रयास किए, तो सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने की कोशिश की।
चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने का इरादा भी दिखाया। कुछ बदलाव भी किए। पर सियासत में अभ्यस्त हो चुकी नौकरशाही आदत से बाज नहीं आई, जिसके कारण प्रशासनिक बदलाव की रफ्तार पर बीच-बीच में ब्रेक लगता दिखा। टीम अमर उजाला के महेंद्र तिवारी, सचिन मुद्गल व और यासिर रजा का एक आकलन।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए उठाए कड़े कदम
सीएम आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा
- फोटो : amar ujala
सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी सरकार ने न सिर्फ भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए कड़े कदम उठाने का इरादा दिखाया, बल्कि नीतिगत बदलावों की घोषणा कर यह संदेश दिया कि सरकार न सिर्फ व्यवस्था सुधारना चाहती है बल्कि प्रक्रियात्मक सुधार करके भी लोगों की समस्याओं को कम करना चाहती है। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा सहित कई विभागों में ऑनलाइन स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करवाई तो कई विभागों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य करके बदलाव का संदेश भी दिया।
उद्योग, खनन व आबकारी पर नई नीति लाने की घोषणा कर नए तरीके से काम करने के इरादे जताए तो रिवर फ्रंट, उपसा, वक्फ संपत्तियों के घपलों और कर्नाटक के आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी की मौत की सीबीआई जांच का आदेश देकर यह भी संदेश देने की कोशिश की कि सरकार न तो भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने वाली है और न ही अपराध पर।
हालांकि, सरकार द्वारा पुलिस का मुखिया बदलने के बावजूद कानून-व्यवस्था पर वैसा अंकुश नहीं लग पाया, जैसी की उम्मीद की जा रही थी। सरकार के अपनों ने भी इसमें भूमिका निभाई। सरकार ने मुख्य सचिव को बरकरार रखकर यह बदलाव दिखाने की कोशिश की कि भाजपा उनमें से नहीं है तो सत्ता में आने के बाद ही अधिकारियों को बदलने लगे। पर, पुराने मुख्य सचिव को साथ लेकर चलने का प्रयोग सफल नहीं हो पाया। जिस तरह नई सरकार द्वारा कई जिलों में तैनात किए गए नए कलेक्टर और कप्तान की खराब छवि से भी सरकार दो-चार हो रही है, उससे मुख्य सचिव की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।
32 हजार पुलिस भर्ती का फैसला, लेकिन चयन आयोगों पर अब भी चुप्पी
सुप्रीमकोर्ट ने प्रदेश की पुलिस भर्तियों पर रोक लगा रखी थी। नई सरकार ने सुप्रीमकोर्ट को लिखित परीक्षा के जरिए मेरिट से भर्ती का प्रारूप पेश किया तो भर्ती की हरी झंडी मिल गई।
सरकार ने इस साल 30 हजार कांस्टेबिल और दो हजार सब इंस्पेक्टर की भर्ती का एलान भी कर दिया। पर, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और माध्यमिक व उच्च शिक्षा आयोग को लेकर सरकार कोई निर्णय नहीं कर पाई है। भर्तियां ठप हैं और युवाओं में सरकार के निर्णय को लेकर नाराजगी तक बढ़ रही है।
वीआईपी कल्चर पर अंकुश
सपा सरकार में कुछ जिलों को वीवीआईपी का दर्जा देकर वहां 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती थी। योगी सरकार ने आते ही इस व्यवस्था को बदल दिया। अब सभी जिला, तहसील व ग्रामीण स्तर पर एक ही मानक में बिजली आपूर्ति का फैसला हुआ है। बिजली आपूर्ति के लिहाज से कोई जिला वीआईपी नहीं रहा।
लाल, नीली बत्ती के प्रयोग पर रोक का श्रेय केंद्र सरकार को जाएगा लेकिन योगी सरकार ने इस पर फौरन अमल किया, लेकिन राजधानी सहित जिलों से जैसी खबरें आ रही हैं, उनसे लगता है कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं के दिलो-दिमाग से वीआईवी कल्चर अभी गया नहीं है।
इन मामलों में भ्रष्टाचार की जांच के दिए आदेश
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नई सरकार ने अनाप-शनाप खर्च के लिए चर्चा में छाई रहने वाली परियोजनाओं की जांच कराकर भ्रष्टाचार पर अंकुश का ठोस संकेत किया। गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में सरकारी खजाने की बर्बादी से जुड़ी शिकायतों की पहले न्यायिक जांच, फिर सीबीआई जांच की सिफारिश की।
- पिछली सरकार में पालना गृह के निर्माण में घपले के मामले सामने आए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर ही सही, लेकिन सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। पहले न्यायालय के निर्देश पर भी सिफारिश करने में काफी वक्त लगा दिया जाता था।
- वक्फ संपत्तियों के घोटालों की भी सरकार ने सीबीआई जांच का फैसला किया। दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री मार्ग के निर्माण में घपले की शिकायतों की भी सीबीआई जांच का आदेश किया।
- हालांकि पंजीरी के घोटालेबाजों के टेंडर खासी मशक्कत के बाद ही निरस्त हो पाए। पार्टी के एक ही नेता घोटालेबाजों के पक्ष में खड़े दिखे। अब पुष्टाहार आपूर्ति के सिंडिकेट का एकाधिकार खत्म करने की पहल शुरू हो पाई है।
पॉवर फॉर आल: आगे बढ़े, पर मुश्किलें बहुत
केंद्र की पावर फॉर ऑल स्कीम पर सपा सरकार ने हस्ताक्षर नहीं किए थे। नई सरकार ने नई सरकार ने आते ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। साथ ही जिला मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 20 व ग्रामीण क्षेत्रों को 17-18 घंटे बिजली देने का एलान किया।
हालांकि सरकार दावे के हिसाब से बिजली आपूर्ति नहीं कर पा रही है। पर, जिलों में बिद्युतीकरण के काम में तेजी आई है। पिछली सरकार में 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने की व्यवस्था थी। इस सरकार ने शहरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का फैसला किया। गड़बड़ी न हो इसके लिए भी प्रक्रिया बदली।
ई-ऑफिस,ई-टेंडर, ई-अटेंडेंस की ओर बढ़े कदम
गवर्नेंस में पारदर्शिता की ओर नई सरकार ने तीन अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने सचिवालयों में ई-ऑफिस की व्यवस्था शुरू करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में पूरी तैयारी कर नई व्यवस्था एक अक्टूबर से लागू करने को कहा गया है। इससे फाइलों को दबाने का रोग खत्म हो जाएगा।
सरकारी काम में तेजी आएगी। सभी तरह की सरकारी खरीद, ठेका, टेंडर में ई-टेंडर व्यवस्था लागू की। इससे ठेके में एकाधिकार व जोर-जबर्दस्ती पर अंकुश लगेगा। खनन से लेकर सड़कों के निर्माण का काम भी ई-टेंडर के जरिए शुरू कर दिया गया है। सरकार ने सरकारी दफ्तरों में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था पर भी गौर किया है।
वे केंद्र से मिला पैसा ठुकरा रहे थे, इन्होंने मांग-मांग कर किया खर्च
अखिलेश यादव और सीएम योगी
- केंद्र की मोदी सरकार ने अखिलेश यादव सरकार में 150 लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस देने का एलान किया था। पिछली सरकार ने नहीं लिया। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही यह वैन ली। हर जिले को दो वैन मिलीं। इस वैन का महत्व इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि इसमें कार्डियक सपोर्ट मॉनीटर व वेंटीलेटर लगे हुए हैं।
- केंद्र से प्रदेश को केंद्रीय सड़क निधि से 250 से 350 करोड़ रुपये दे रही थी। पिछली सरकार ने लगातार दो साल इस निधि की एक पाई भी खर्च नहीं की। योगी सरकार ने पहुंचते ही इस ओर कदम बढ़ाया और इस निधि से 10 हजार करोड़ रुपये की सहायता हासिल की।
- केंद्र सरकार अखिलेश यादव सरकार से प्रदेश के कई राज्यमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में बदलने की अनापत्ति मांग रही थी। अखिलेश सरकार ने रुचि नहीं दिखाई। लिहाजा प्रदेश की बड़ी रकम सड़कों पर खर्च होती रही। योगी ने सत्ता संभालने के बाद 5000 किमी. राज्य राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में बदलने पर सहमति दी। इससे सड़कों के निर्माण की रफ्तार भी बढ़ी और राज्य का पैसा बचाने का भी रास्ता खुला।
किसानों पर फोकस दिखाने की कोशिश
सबसे अहम निर्णय किसानों की कर्जमाफी का लिया। इसके अलावा एक लाख टन मीट्रिक टन गेंहू खरीदने का निर्णय किया। पिछली सरकार से कई गुना अधिक गेंहू खरीद करने में सरकार सफल हुई है।
सरकार ने आलू खरीदने का काम भी शुरू हुआ। लेकिन देरी से हुए फैसले और नौकरशाही के रवैये से इसका पूरा फायदा किसानों को नहीं मिल पाया। वहीं गन्ना किसानों का लगभग 2984 करोड़ रुपये अब भी चीनी मिलों पर बकाया है।
बेसिक स्कूलों में बड़े बदलाव पर काम
सरकार ने बेसिक स्कूलों में बच्चों के फर्जी नामांकन को खत्म करने की अहम पहल की है। बच्चों को आधार से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ाया है। इससे बड़े पैमाने पर बच्चों के बोगस नामांकन रद हुए हैं। इससे सरकार के संसाधनों की बचत होगी।
इसके अलावा बच्चों की ड्रेस भी बदलने का फैसला किया। हर बच्चे नए आकर्षण कलर में स्कूली ड्रेस तो मिलेंगे ही, जूते, मोजे, स्वेटर भी देने की योजना है। लेकिन, महकमे में दागी आला अफसर की मौजूदगी से सवाल भी उठते रहें।
ये फैसले भी हुए अब नतीजों का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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- पहले पुरानी सरकार के फैसलों को बदलने का चलन था। पर, इस सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का काम जारी रखने की घोषणा की। इससे अयोध्या-काशी को भी जोड़ेंगे।
- राशन कार्डों को लेकर फर्जीवाड़े में नए सिरे से सर्वे कराकर फर्जी कार्ड रद्द करने और पात्र व्यक्तियों को शामिल कर उनके कार्ड बनवाने का फैसला किया।
- समाजवादी पेंशन में अपात्र लाभार्थियों की शिकायतें थीं। एक-एक परिवार के कई-कई लाभार्थी थे। इस पेंशन की भी जांच का फैसला हुआ।
- तिर्वा से उरई होते हुए झांसी व झांसी से चित्रकूट-इलाहाबाद को एक्सप्रेस-वे से जोड़ने का फैसला कर सांस्कृतिक सरोकारों पर प्रतिबद्घता जताई।
- अयोध्या व मथुरा नगर निगम बनाने का फैसला और इनके विकास पर काम भी सांस्कृतिक सरोकारों पर प्रतिबद्घता का संदेश देने वाला रहा।
- सरकारी व निजी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स बनी।
लेकिन, इसका क्या?
चीनी मिलों की बिक्री की जांच का ऐलान हुआ, पर कार्रवाई अभी तक नजर नहीं आई।