लखनऊ। केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी करीब 10 साल पहले शुरू हुई थी। कॉर्डियोवैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग में करीब 98 लाख रुपये की मशीनें खरीदी गईं। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय से अनुमति लेने के साथ दो बार लाइसेंस भी मिला, लेकिन अब तक एक भी मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो सका है।
लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी इस योजना के चलते दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए दूसरे राज्यों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह विकल्प चुनना आसान नहीं है।
पिछले साल केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट की उम्मीद फिर जगी थी। एक मरीज के प्रत्यारोपण की तैयारी की गई और ब्रेन डेड मरीज के परिजनों को अंगदान के लिए राजी भी किया गया। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही प्रत्यारोपण के इंतजार में भर्ती मरीज की मौत हो गई। इसके बाद एक बार फिर योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। डोनर मिलते ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।