पाकिस्तान ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी वार्ता अगले सप्ताह की शुरुआत में फिर से शुरू होगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से कहा, 'मुझे लगता है कि बातचीत अगले सप्ताह मंगलवार को फिर से शुरू होगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सोमवार या बुधवार भी संभावित तारीखें हो सकती हैं, हालांकि उन्होंने चर्चा के स्थान के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान की यात्रा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने कहा है कि हालांकि ईरान में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, फिर भी भारतीय नागरिक अभी वहां की गैर-जरूरी यात्रा से बचें। जो भारतीय नागरिक इस समय ईरान में हैं या जिन्हें बहुत जरूरी काम से वहां जाना है, उन्हें बेहद सावधान रहने की सलाह दी गई है। दूतावास ने नागरिकों से स्थानीय खबरों पर नजर रखने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है। साथ ही, सभी भारतीयों को दूतावास में अपना पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर मदद दी जा सके। किसी भी आपात स्थिति के लिए दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर (+989128109115, +989128109109, +989128109102, +989932179359) भी जारी किए हैं।
यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद उठाया गया है। 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत बातचीत के लिए 60 दिनों का संघर्ष विराम तय हुआ है। भारत ने इस समझौते का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि शांति के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। भारत ने हमेशा तनाव कम करने और कूटनीति का समर्थन किया है। इससे क्षेत्र में व्यापार और शांति बहाल होने की उम्मीद है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने खाड़ी दौरे की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से की है, जहां वह अमेरिका-ईरान शांति समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अबू धाबी पहुंचने पर उन्होंने कहा कि हाल की बातचीत से प्रगति की नींव रखी गई है, लेकिन अभी भी कुछ अहम मुद्दों पर और चर्चा की जरूरत है।
ओमान ने घोषणा की कि उसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के साथ समन्वय कर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी समुद्री गलियारा उपलब्ध कराया है। देश की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस बारे में जानकारी दी।
ओमान के अनुसार, इस अस्थायी मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को आईएमओ के साथ समन्वय करना होगा। यह प्रक्रिया ओमान और आईएमओ की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी।
यह कदम रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानूनों के अनुरूप बताया गया है, जिनमें बिना किसी पारगमन शुल्क के नौवहन की स्वतंत्रता का प्रावधान है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षक उचित समय पर ईरान जाएंगे। उन्होंने यह बात व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसमें 'कोई जल्दबाजी नहीं' है।
एक पत्रकार ने जब पूछा कि ईरान का कहना है कि आईएईए की कोई यात्रा तय नहीं है, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि यह गलत बात है। ट्रंप ने कहा, वे गलत हैं, वे जानते हैं कि वे गलत हैं। उन्होंने हमें अंदर बताया है और हमारे पास इसका 100 फीसदी प्रमाण है। अगर वे सही होते, तो मैं अभी बैठकों को रद्द कर देता।
अमेरिकी सीनेट ने एक प्रतीकात्मक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के साथ युद्ध को समाप्त करने की मांग की गई है। यह कदम व्हाइट हाउस के लिए एक नए सियासी झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि व्टाइट हाउस तेहरान के साथ स्थायी समझौते की कोशिश कर रहा है।
यह प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा से पहले ही पारित हो चुका था। अब सीनेट में 50-48 के अंतर से स्वीकार किया गया। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेना को तब तक हटाना होगा, जब तक कांग्रेस स्पष्ट रूप से सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं देती।
यह एक समवर्ती प्रस्ताव है। इसलिए इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपतिके हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है। इसक कानूनी शक्ति को लेकर अभी भी विवाद बना हुआ है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है। दोनों पक्ष बातचीत के दौर में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस प्रस्ताव को पूरी तरह नजरअंदाज कर सकते हैं।