परंपराओं को जीवंत रखने वाली उत्सवधर्मी काशी में सोमवार दोपहर बाद ही दीपोत्सव के लिए लाखों की भीड़ गंगा तट की ओर चल पड़ी। शाम होने से पहले ही घाटों की सीढ़ियां आस्थावानों से खचाखच भर गईं। पूरे उत्साह के साथ महिलाएं, बच्चे और युवा घाटों पर दीप सजाने के लिए उतरे। सुरसरि के घाटों पर कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊं नम: शिवाय तो कहीं हर-हर महादेव के स्लोगन दीपों की अल्पनाओं में प्रज्ज्वलित हुए।
सोमवार की शाम को पंचगंगा घाट पर जैसे ही हजारा दीप प्रज्ज्वलित हुआ, गंगा के किनारे साढ़े सात किलोमीटर का तट भी एक-एक करके जगमग हो उठा। अर्द्धचंद्राकार घाटों पर चंद्रहार की तरह दीपक झिलमिलाने लगे। पर्यटकों ने इस अलौकिक नजारे को देखा तो बस देखते ही रह गए। गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। शहर से लेकर गांव और पंचक्रोशी का परिक्रमा पथ पर दीपों के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठे। कुंड, सरोवर, तालाब और मंदिरों में भी दीप जलाए गए।
पीएम मोदी ने ट्वीट किया- भारत की प्राचीन संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा के प्रतीक पर्व कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। पवित्र स्नान और दीपदान से जुड़ा यह अवसर हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करे।
काशी के प्रमुख घाटों में से एक दशाश्वमेध घाट पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। देव दीपावली का मुख्य कार्यक्रम राजघाट पर हो रहा है। चेत सिंह घाट पर लेजर शो शुरू हो गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सामने गंगा पार रेती पर आतिशबाजी शुरू होने वाली है।
काशी के गंगा घाटों पर सोमवार शाम मानो पूरा देवलोक उतर आया। देवदीपावली महोत्सव दीपों के प्रकाश से प्रदीप्त गंगा के अप्रतिम सौंदर्य को निहारने के लिए देश-दुनिया से लाखों लोग जुटे। घाटों को एकाकार करते 10 लाख से ज्यादा दीपों का अलौकिक एवं नयनाभिराम दृश्य कैमरों में कैद करने के लिए पर्यटकों में होड़ रही। शाम चार बजते ही ऐसा लगा मानों, पूरा शहर गंगा घाटों की ओर उमड़ पड़ा हो।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ा है। धाम परिसर के बाहर तक बाबा के भक्तों की कतार लगी है। पूरा धाम परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के उद्घोष से गूंज रहा है।