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Shardiya Navratri 2022: नवरात्रि में करें ये उपाय, मां आदिशक्ति की कृपा से जीवन में आएंगे चमत्कारी बदलाव

Mon, 26 Sep 2022 05:59 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

खास बातें

Navratri 2022 Kalash Sthapana Muhurat, Puja Vidhi, Samagri In Hindi: आज से शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। अगले 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की विशेष पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा करने का विधान है। 
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शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
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लाइव अपडेट

05:05 PM, 26-Sep-2022
नवरात्रि में करें ये उपाय - फोटो : iStock

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल पताका अर्पित करें। मान्यता है कि इससे आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। साथ ही शारदीय नवरात्रि के दौरान शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करें उन्हें खीर पूड़ी खिलाएं तथा लाल कपड़ा भेंट कर उन्हें ससम्मान विदा करें। इससे आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। इसके अलावा यदि आप अपने शत्रुओं से परेशान हैं, तो मां दुर्गा के मंदिर में जाकर उन्हें पीले फल और मिठाई का भोग लगाएं और पूजा स्थल पर पांच लौंग अर्पित करें।
 

04:11 PM, 26-Sep-2022
नवरात्रि में मां दुर्गा को नहीं चढ़ानी चाहिए ये चीजें  - फोटो : istock

नवरात्रि में मां दुर्गा को नहीं चढ़ानी चाहिए ये चीजें 


न चढ़ाएं ये फूल
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग के पुष्प का उपयोग किया जाता है। दुर्गा पूजा में कमल, गुड़हल, गुलाब, गेंदा के फूल चढ़ाए जाते हैं। इस दौरान ध्यान रखें कि कनेर, धतूरा और मदार के पुष्प भूल से भी न चढ़ाएं। 

अक्षत  
नवरात्रि के दौरान पूजन सामग्री में अक्षत यानी चावल का स्थान प्रमुख होता है। लेकिन नवरात्र पूजन में अक्षत के प्रयोग में ये सावधानी बरतनी चाहिए कि चावल के दाने टूटे न हों।

लहसुन-प्याज से बना भोग 
नवरात्रि के दौरान के आप जिस भोजन में देवी दुर्गा को भोग लगा रहे हैं, उसमें लहसुन और प्याज का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि लहसुन-प्याज को तामसिक प्रवृत्ति का भोज्य पदार्थ माना जाता है।

टूटा हुआ नारियल
नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए नारियल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि कलश स्थापना के लिए टूटा हुआ नारियल इस्तेमाल न करें। पूजा के लिए जटा वाले नारियल ही इस्तेमाल करें।

03:50 PM, 26-Sep-2022
शारदीय नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा स्तुति का पाठ - फोटो : iStock

शारदीय नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा स्तुति का पाठ

दुर्गा स्तुति 

दुर्गे विश्वमपि प्रसीद परमे सृष्ट्यादिकार्यत्रये
ब्रम्हाद्याः पुरुषास्त्रयो निजगुणैस्त्वत्स्वेच्छया कल्पिताः ।
नो ते कोऽपि च कल्पकोऽत्र भुवने विद्येत मातर्यतः
कः शक्तः परिवर्णितुं तव गुणॉंल्लोके भवेद्दुर्गमान् ॥ १ ॥

त्वामाराध्य हरिर्निहत्य समरे दैत्यान् रणे दुर्जयान्
त्रैलोक्यं परिपाति शम्भुरपि ते धृत्वा पदं वक्षसि ।
त्रैलोक्यक्षयकारकं समपिबद्यत्कालकूटं विषं
किं ते वा चरितं वयं त्रिजगतां ब्रूमः परित्र्यम्बिके ॥ २ ॥

या पुंसः परमस्य देहिन इह स्वीयैर्गुणैर्मायया
देहाख्यापि चिदात्मिकापि च परिस्पन्दादिशक्तिः परा ।
त्वन्मायापरिमोहितास्तनुभृतो यामेव देहास्थिता
भेदज्ञानवशाद्वदन्ति पुरुषं तस्यै नमस्तेऽम्बिके ॥ ३ ॥

स्त्रीपुंस्त्वप्रमुखैरुपाधिनिचयैर्हीनं परं ब्रह्म यत्
त्वत्तो या प्रथमं बभूव जगतां सृष्टौ सिसृक्षा स्वयम् ।
सा शक्तिः परमाऽपि यच्च समभून्मूर्तिद्वयं शक्तित-
स्त्वन्मायामयमेव तेन हि परं ब्रह्मापि शक्त्यात्मकम् ॥ ४ ॥

तोयोत्थं करकादिकं जलमयं दृष्ट्वा यथा निश्चय-
स्तोयत्वेन भवेद्ग्रहोऽप्यभिमतां तथ्यं तथैव ध्रुवम् ।
ब्रह्मोत्थं सकलं विलोक्य मनसा शक्त्यात्मकं ब्रह्म त-
च्छक्तित्वेन विनिश्चितः पुरुषधीः पारं परा ब्रह्मणि ॥ ५ ॥

षट्चक्रेषु लसन्ति ये तनुमतां ब्रह्मादयः षट्शिवा-
स्ते प्रेता भवदाश्रयाच्च परमेशत्वं समायान्ति हि ।
तस्मादीश्वरता शिवे नहि शिवे त्वय्येव विश्वाम्बिके
त्वं देवि त्रिदशैकवन्दितपदे दुर्गे प्रसीदस्व नः ॥ ६ ॥
॥ इति श्रीमहाभागवते महापुराणे वेदैः कृता दुर्गास्तुतिः सम्पूर्णा ॥

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02:53 PM, 26-Sep-2022
नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप - फोटो : iStock

नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप  

1- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।


2- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।


3- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

4- नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अधिक से अधिक अवश्य करें। 

5- पिण्डज प्रवरा चण्डकोपास्त्रुता।
प्रसीदम तनुते महिं चंद्रघण्टातिरुता।।
पिंडज प्रवररुधा चन्दकपास्कर्युत । 
प्रसिदं तनुते महयम चंद्रघंतेति विश्रुत।

02:32 PM, 26-Sep-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना संदेश - फोटो : amar ujala

अखंड ज्योति के नियम

  • - ज्योति प्रज्वलित करने से पहले संकल्प लें और मां के सामने दीप प्रज्वलित करें। 
  • - नवरात्रि में जलाई जाने वाली ज्योति को अनवरत नौ दिनों तक जलाया जाता है। इसलिए विशेष ध्यान रखें कि लौ बुझनी नहीं चाहिए।
  • - अखंड ज्योति जलाने के लिए गाय के शुद्ध घी का प्रयोग करें। 
  • - अखंड ज्योति को हमेशा किसी पटरे या चौकी पर ही रखकर जलाना चाहिए। कभी भी भूमि पर रखकर अखंड दीपक न जलाएं। 
  • - अखंड ज्योति की बाती हमेशा कलावा से बनाई जाती है। 
  • - अगर आपने अपने घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित की है तो ध्यान रहे की घर को कभी भी अकेला न छोड़े। 
  • - नवरात्रि के समापन या फिर संकल्प पूरा होने के बाद दीपक को खुद ना बुझाएं। उसे ऐसे ही रहने दें। धीरे-धीरे उसे स्वतः ही बुझने दें।

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02:27 PM, 26-Sep-2022
नवरात्रि

नवरात्रि में अखंड ज्योति का महत्व 

नवरात्रि में देवी आराधना,कलश स्थापना और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में हर पूजा-पाठ और शुभ कार्य का आरंभ दीप प्रज्वलित करके किया जाता है। दीप को प्रकाश का द्योतक माना गया है तो वही प्रकाश को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। दीप जलाने का मतलब होता है मन के अंधकार को दूर करके परमात्मा रूपी प्रकाश को अपने अंदर समाहित करना। इसलिए सबसे पहले दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
 

01:35 PM, 26-Sep-2022
दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम - फोटो : amar ujala

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा-आराधना में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भक्तों के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण में दुर्गा सप्तशती उल्लेख किया गया है। मां शक्ति की उपासना के लिए दुर्गा सप्तशती श्रेष्ठ ग्रंथ माना है। इसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय है। जिसे तीन चरित्रों में बांटा गया है। पहले चरित्र में महाकाली,दूसरे चरित्र में महालक्ष्मी और तीसरे चरित्र में महा सरस्वती है। 

दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय 

1. प्रथम अध्याय : इस अध्याय में मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु कैटभ का प्रसंग

2. द्वितीय अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय में देवताओं के तेज से देवी मॉं का प्रादुर्भाव और महिषासुर की सेना का वध

3. तृतीय अध्याय : इस अध्याय में मां दुर्गा द्वारा सेनापतियों सहित महिषासुर का वध

4. चतुर्थ अध्याय : इंद्र समेत सभी देवी- देवताओं द्वारा देवी मां की स्तुति

5. पंचम अध्याय : देवी की स्तुति और चण्ड-मुण्ड के मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना और फिर दूत का निराश लौटना

6. षष्ठम अध्याय : धूम्रलोचन- वध

7. सप्तम अध्याय : चण्ड-मुण्ड का वध

8. अष्टम अध्याय : रक्तबीज का वध का वर्णन

9. नवम अध्याय : विशुम्भ का वध

10. दशम अध्याय : शुम्भ का वध

11. एकादश अध्याय : सभी का वध करने के बाद देवताओं के द्वारा देवी की स्तुति,  देवी द्वारा देवताओं को वरदान देना

12. द्वादश अध्याय : देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्य

13. त्रयोदश अध्याय : सुरथ और वैश्य को देवी का वरदान

01:11 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से कौन से फल की होती है प्राप्ति ?

मां शैलपुत्री - पूजाफल
मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो मां शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता हैं।

मां शैलपुत्री का स्तवन मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

12:33 PM, 26-Sep-2022
मां दुर्गा के नौ स्वरूप और उनके मनपसंद नौ भोग - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि पर नौ दिन माता को कौन- कौन सा भोग लगाएं

मां शैलपुत्री- मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।

मां ब्रह्मचारिणी- नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाएं। 

मां चंद्रघंटा- मां को दूध से बनी मिठाइयां,खीर आदि का भोग लगाएं।

मां कूष्मांडा- नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है। 

मां स्कंदमाता- पांचवें दिन स्कंदमाता को केले का भोग चढ़ाया जाता है। 

मां कात्यायनी- नवरात्रि के छठें दिन देवी कात्यायनी को हलवा,मीठा पान और शहद का भोग लगाएं।

मां कालरात्रि-  सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड़ से निर्मित चीजों का भोग लगाना चाहिए। 

मां महागौरी- माता महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है, इसीलिए नवरात्रि के आठवें दिन भोग के रूप में नारियल चढ़ाएं।  

मां सिद्धिदात्री-  माता सिद्धिदात्री को हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगाएं।

12:14 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि में क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति?

नवरात्रि का त्योहार मां शक्ति की आराधना का होता है। नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। दुर्गा पूजा के बड़े-बड़े पांडाल सजाए जाते हैं। नवरात्रि पर नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है और सबसे खास बात नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने की परंपरा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाते हैं... यह पढ़ें पूरी खबर
 

11:59 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि के पहले दिन क्यों करते हैं कलश स्थापना?

हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए पृथ्वी पर वास करती हैं। नौ दिनों तक हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। क्या आप जानते हैं नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों की जाती हैं.... यहां पढ़ें 
 

11:41 AM, 26-Sep-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि का पहला दिन- मां शैलपुत्री की होती है आराधना

आज मां दुर्गा के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा-आराधना की जा रही है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की जन्म कथा...

मां दुर्गा अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से पूजी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं तब इनका नाम सती था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,सती ने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं,तब वहां जाने के लिए उनका मन व्याकुल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने भगवान शिव को बताई। भगवान शिव ने कहा-''प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं,अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है।ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।''

शंकर जी के इस उपदेश से देवी सती का मन बहुत दुखी हुआ। पिता का यज्ञ देखने वहां जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर शिवजी ने उन्हें वहां जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम से बातचीत नहीं कर रहा है। केवल उनकी माता ने ही स्नेह से उन्हें गले लगाया। परिजनों के इस व्यवहार से देवी सती को बहुत क्लेश पहुंचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहां भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है,दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे।

यह सब देखकर सती का ह्रदय ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा कि भगवान शंकर जी की बात न मानकर यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। वह अपने पति भगवान शिव के इस अपमान को सहन न कर सकीं,उन्होंने अपने उस रूप को तत्काल वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुणं-दुखद घटना को सुनकर शंकर जी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया। सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वह शैलपुत्री नाम से विख्यात हुईं। पार्वती,हेमवती भी उन्हीं के नाम हैं। इस जन्म में भी शैलपुत्री देवी का विवाह भी शंकर जी से ही हुआ।

11:17 AM, 26-Sep-2022

अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना 

अगर आपने अभी तक कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा किसी कारण से नहीं कर सके हैं तो अभिजीत और चौघड़ियां मुहूर्त में कलश स्थापना करके माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

आज का अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक 

चर, लाभ, अमृत चौघड़िया मुहूर्त - दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजे तक
 

10:23 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि पर मां दु्र्गा की पूजा के दौरान करें इन नियमों का पालन

- नवरात्रि के पूरे दिन व्रत रखना चाहिए। अगर आप किसी कारण से पूरे 9 दिनों तक व्रत नहीं रख सकते तो पहले, चौथे और आठवें दिन व्रत जरूर रखें।
- घर पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति जरूर रखें।
- नवरात्रि पर देवी दुर्गा की प्रतिमा के साथ, मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित कर 9 दिनों तक पूजन करें।
- मां दु्र्गा को 9 दिनों तक अलग-अलग दिन के हिसाब से भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा मां को प्रतिदिन लौंग और बताशे का भोग अर्पित करें।
- दु्र्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।
- पूजा में मां को लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।

09:53 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि पर बिना मां की आरती "जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी" के पूजा नहीं होती पूरी

मां दुर्गाजी की आरती / Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।


 

09:34 AM, 26-Sep-2022

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन- कटरा के माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की भीड़

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कटरा माता वैष्णो देवी के मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी... देखें तस्वीरें...
 

09:01 AM, 26-Sep-2022
मां दुर्गा

देश-दुनिया में इन जगहों पर हैं शक्तिपीठ

आज से नौ दिनों दिन तक चलने वाली शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। लगातार नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना की जाएगी। घरों में मां दुर्गा विराजेंगी और देवी मां के भक्त श्रद्धापूर्वक मां की पूजा,साधना, जप-तप और ध्यान लगाएंगे। नवरात्रि पर देश के सभी प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और शक्तिपीठों पर भक्तों की भीड़ एकत्रित होगी। मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं।  

- बंगाल में सबसे ज्यादा 10 शक्तिपीठ
- उत्तर भारत में 08 शक्तिपीठ
- पश्चिम भारत में 5 शक्तिपीठ
- दक्षिण भारत में 5 शक्तिपीठ
- पूर्वोत्तर भारत में 5 शक्तिपीठ
- मध्य भारत में 2 शक्तिपीठ
- भारत के बाहर 8 शक्तिपीठ

Navratri 2022: जानें देवी मां के 52 शक्तिपीठों के नाम और स्थान, दर्शन के लिए इन शहरों की ओर करें रुख

08:42 AM, 26-Sep-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना - फोटो : amar ujala

शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में 9 देवियों के 9 बीज मंत्र

 
शारदीय नवरात्रि के दिन देवी बीज मंत्र
पहला दिन     शैलपुत्री    ह्रीं शिवायै नम:।
दूसरा दिन   ब्रह्मचारिणी    ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन   चन्द्रघण्टा    ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन कूष्मांडा   ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवा दिन  स्कंदमाता ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन कात्यायनी  क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।
सातवाँ दिन  कालरात्रि  क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन  महागौरी   श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौवां दिन  सिद्धिदात्री  ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

08:36 AM, 26-Sep-2022
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

सुख-समृद्धि और मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवरात्रि पर जरूर आजमाएं ये उपाय

- नवरात्रि पर घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- प्रतिदिन घर के हर एक हिस्से में गंगाजल का छिड़काव करें, इससे घर की नकारात्मक शक्तियां खत्म होती हैं।
- नवरात्रि पर नौ दिनों तक देवी आराधना के साथ सबसे पहले भगवान गणेश की स्तुति और वंदना करें।
- घर के मुख्य दरवाजे के बाहर स्वास्तिक और ऊं का निशान बनाएं।
- रोजाना देवी दुर्गा से संबंधित मंत्रों का जाप करें।
- आर्थिक संपन्नता के लिए आप नवरात्रि के दौरान आटा गूंथ कर उसकी एक लोई बनाकर बहते जल में भी प्रभावित करें।

शारदीय नवरात्रि की सभी खबरें विस्तार से यहां पढ़ें...


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08:23 AM, 26-Sep-2022

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कलश

नवरात्रि पर अखंड ज्योति के नियम

- मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रि पर 9 दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्जवलित करने का विधान है। ऐसे में अखंड ज्योति को कभी सीधे जमीन पर न रखें। अखंड ज्योतिष को हमेशा लकड़ी की चौकी पर ही रखें। 
- अखंड ज्योति के नीचे अष्टदर बनाकर रखें।
- अखंड ज्योति की स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गंदे या झूठे हाथ से कभी भी नहीं छूना चाहिए।
- अखंड ज्योति को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। घर पर कोई न कोई सदस्य जरूर मौजूद होना चाहिए।
- अखंड ज्योति को हमेशा शुद्ध देसी घी से प्रज्जवलित करना चाहिए। 
- अखंड ज्योति कभी भी बुझनी चाहिए।
- अखंड ज्योति को शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रो के जाप के साथ जलना चाहिए।

07:22 AM, 26-Sep-2022
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें

नवरात्रि पर क्या करें
1-नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
2-नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
3-नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
4-देवी मां को प्रतिदिन करें जल अर्पित
5-नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
6- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
7- ब्रह्राचर्य का पालन करें

नवरात्रि पर क्या न करें
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। घर के सदस्य अगर नौ दिनों तक व्रत नहीं रखे हुए हैं तो भी नौ दिनों तक भोजन में छौंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
 

  • शारदीय नवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें

शारदीय नवरात्रि 2022 क्या करें     क्या न करें 
नवरात्रि सात्विक भोजन, साफ़ सफाई, देवी आराधना,भजन-कीर्तन, जगराता, मंत्र,देवी आरती प्याज,लहसुन,शराब,मांस-मछली का सेवन, लड़ाई, झगड़ा, कलह, कलेश, काले कपड़े और चमड़े की चीजें न पहने, दाढ़ी,बाल और नाखून न काटें
     

07:10 AM, 26-Sep-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना - फोटो : amar ujala

नवरात्रि पर मां दुर्गा के इन 9 स्वरूपों की होती है विशेष पूजा-आराधना

आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। पहले दिन कलश स्थापना के साथ माता दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। फिर इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां शक्ति की उपासना की जाती है। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने का विधान होता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। इसमें देवी के नौ स्वरूपों पूजा की जाती है जिससे भक्तों को अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

  • शारदीय नवरात्रि 2022

दिन नवरात्रि दिन तिथि  पूजा-अनुष्ठान 
26 सितंबर 2022 नवरात्रि दिन 1 प्रतिपदा   मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना
27 सितंबर 2022   नवरात्रि दिन 2     द्वितीया   मां ब्रह्मचारिणी पूजा
28 सितंबर 2022   नवरात्रि दिन 3     तृतीया   मां चंद्रघंटा पूजा
29 सितंबर 2022   नवरात्रि दिन 4  चतुर्थी   मां कुष्मांडा पूजा
30 सितंबर 2022   नवरात्रि दिन 5 पंचमी   मां स्कंदमाता पूजा
01 अक्तूबर 2022  नवरात्रि दिन 6 षष्ठी   मां कात्यायनी पूजा
02 अक्तूबर 2022  नवरात्रि दिन 7   सप्तमी   मां कालरात्रि पूजा
03 अक्तूबर 2022   नवरात्रि दिन 8 अष्टमी   मां महागौरी दुर्गा महा अष्टमी पूजा
04 अक्तूबर 2022 नवरात्रि दिन 9 नवमी     मां सिद्धिदात्री दुर्गा महा नवमी पूजा
05 अक्तूबर 2022 नवरात्रि दिन 10 दशमी     नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी
 

06:53 AM, 26-Sep-2022
नवरात्रि की पूजन - फोटो : अमर उजाला

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी....

मां दुर्गा जी की आरती/ Maa Durga Aarti In Hindi

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

 

06:47 AM, 26-Sep-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

कलश स्थापना पूजा विधि

- सबसे पहले सुबह जल्दी स्नान करें और पूजा का संकल्प लें।
-  जहां पर कलश स्थापित करें उस जगह को प्रणाम करते हुए भगवान गणेश की स्तुति करते हुए चौकी रखें।
- फिर इसके बाद गंगाजल छिड़ककर चौकी पर लाल वस्त्र बिछा दें और कलश रखें।
- कलश में गंगाजल के साथ ताजा जल, अक्षत,सुपारी, दूर्वा, फूल हल्दी की गांठ,चंदन और सिक्का डाल दें।
- अब कलश के ऊपर आम के पत्ते और सात तरह के अनाज को रखते हुए जटा नारियल रख दें। 

06:37 AM, 26-Sep-2022
नवदुर्गा के प्रिय रंग - फोटो : amar ujala

आज घटस्थापना के लिए इन पूजा सामग्री को कर लें एकत्रित

  • 7 तरह के अनाज
  • मिट्टी का बर्तन
  • मिट्टी
  • कलश
  • गंगाजल या सादा जल
  • आम,अशोक या पान के पत्ते
  • सुपारी
  • सूत
  • मौली
  • एक जटा वाला नारियल
  • माता की चुनरी
  • अक्षत
  • केसर 
  • कुमकुम 
  • लाल रंग का साफ कपड़ा
  • फूल- माला

06:25 AM, 26-Sep-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि के पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की आराधना

अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ माता भगवती की पूजा-आराधना के साथ 9 दिनों का शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ कलश स्थापना होती है और मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। मां शैलपुत्री मां दुर्गा के नौ रूपों में पहला स्वरूप हैं। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री को भोग में गाय के घी से बनी चीजें को अर्पित करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करने पर सुख-समृद्धि और सभी तरह की मनोकानाएं जरूर पूरी होती हैं।

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Shardiya Navratri 2022: जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्यों करते हैं कलश स्थापना

06:10 AM, 26-Sep-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

जानें आज किस शुभ मुहूर्त में होगी कलश स्थापना

शारदीय नवरात्रि 2022- कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

पहला शुभ मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक

दूसरा शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त)- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक 

तीसरा शुभ मुहूर्त (शुभ चौघड़िया मुहूर्त)- सुबह 09 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक

चर, लाभ, अमृत चौघड़िया मुहूर्त-दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजे तक

शारदीय नवरात्रि 2022 की तिथि
प्रतिपदा तिथि की शुरूआत- 26 सितंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 22 मिनट पर
प्रतिपदा तिथि का समापन-  27 सितंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 09 मिनट पर
 

05:41 AM, 26-Sep-2022

Shardiya Navratri 2022: नवरात्रि में करें ये उपाय, मां आदिशक्ति की कृपा से जीवन में आएंगे चमत्कारी बदलाव

Shardiya Navratri: आज (26 सितंबर 2022) से देवी आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहा है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 9 दिनों की रहेगी, दरअसल इस बार किसी भी तिथि के लोप न होने से नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक मनाई जाएगी। नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष रूप से पूजा-पाठ की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। इसकी तैयारियां कई दिनों पहले से होने लगती है। नवरात्रि शुभ कार्य करने, नई खरीदारी और जमीन-मकान में निवेश के लिए बेहद ही शुभ समय होता है। नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के मां की आराधना प्रारंभ हो जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से 05 अक्तूबर रहेगी। इसके अलावा मां दुर्गा भक्तों के घर हाथी की सवारी पर आ रही हैं जिसे बहुत शुभ माना गया है। नवरात्रि में मां दुर्गा के हाथी पर सवार होकर आने पर सुख-समृद्धि साथ लेकर आती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा मां धरती पर अवतरित होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखते हुए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इस बार नवरात्रि का शुभारंभ 26 सितंबर को बहुत ही शुभ योग में हो रहा है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन शुक्ल, ब्रह्रा, केदार,भद्र,हंस, गजकेसरी,शंख और पर्वत नाम के कई शुभ योग बन रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का क्या है महत्व,पूजा विधि,मंत्र और कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का समय...  

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