शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल पताका अर्पित करें। मान्यता है कि इससे आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। साथ ही शारदीय नवरात्रि के दौरान शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करें उन्हें खीर पूड़ी खिलाएं तथा लाल कपड़ा भेंट कर उन्हें ससम्मान विदा करें। इससे आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। इसके अलावा यदि आप अपने शत्रुओं से परेशान हैं, तो मां दुर्गा के मंदिर में जाकर उन्हें पीले फल और मिठाई का भोग लगाएं और पूजा स्थल पर पांच लौंग अर्पित करें।
नवरात्रि में मां दुर्गा को नहीं चढ़ानी चाहिए ये चीजें
शारदीय नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा स्तुति का पाठ
नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप
1- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
2- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
3- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
4- नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अधिक से अधिक अवश्य करें।
5- पिण्डज प्रवरा चण्डकोपास्त्रुता।
प्रसीदम तनुते महिं चंद्रघण्टातिरुता।।
पिंडज प्रवररुधा चन्दकपास्कर्युत ।
प्रसिदं तनुते महयम चंद्रघंतेति विश्रुत।
नवरात्रि में देवी आराधना,कलश स्थापना और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में हर पूजा-पाठ और शुभ कार्य का आरंभ दीप प्रज्वलित करके किया जाता है। दीप को प्रकाश का द्योतक माना गया है तो वही प्रकाश को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। दीप जलाने का मतलब होता है मन के अंधकार को दूर करके परमात्मा रूपी प्रकाश को अपने अंदर समाहित करना। इसलिए सबसे पहले दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
मां शैलपुत्री - पूजाफल
मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो मां शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता हैं।
मां शैलपुत्री का स्तवन मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मां शैलपुत्री- मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।
मां ब्रह्मचारिणी- नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाएं।
मां चंद्रघंटा- मां को दूध से बनी मिठाइयां,खीर आदि का भोग लगाएं।
मां कूष्मांडा- नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है।
मां स्कंदमाता- पांचवें दिन स्कंदमाता को केले का भोग चढ़ाया जाता है।
मां कात्यायनी- नवरात्रि के छठें दिन देवी कात्यायनी को हलवा,मीठा पान और शहद का भोग लगाएं।
मां कालरात्रि- सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड़ से निर्मित चीजों का भोग लगाना चाहिए।
मां महागौरी- माता महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है, इसीलिए नवरात्रि के आठवें दिन भोग के रूप में नारियल चढ़ाएं।
मां सिद्धिदात्री- माता सिद्धिदात्री को हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगाएं।
नवरात्रि का त्योहार मां शक्ति की आराधना का होता है। नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। दुर्गा पूजा के बड़े-बड़े पांडाल सजाए जाते हैं। नवरात्रि पर नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है और सबसे खास बात नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने की परंपरा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाते हैं... यह पढ़ें पूरी खबर
हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए पृथ्वी पर वास करती हैं। नौ दिनों तक हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। क्या आप जानते हैं नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों की जाती हैं.... यहां पढ़ें
अगर आपने अभी तक कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा किसी कारण से नहीं कर सके हैं तो अभिजीत और चौघड़ियां मुहूर्त में कलश स्थापना करके माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
आज का अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक
चर, लाभ, अमृत चौघड़िया मुहूर्त - दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजे तक
- नवरात्रि के पूरे दिन व्रत रखना चाहिए। अगर आप किसी कारण से पूरे 9 दिनों तक व्रत नहीं रख सकते तो पहले, चौथे और आठवें दिन व्रत जरूर रखें।
- घर पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति जरूर रखें।
- नवरात्रि पर देवी दुर्गा की प्रतिमा के साथ, मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित कर 9 दिनों तक पूजन करें।
- मां दु्र्गा को 9 दिनों तक अलग-अलग दिन के हिसाब से भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा मां को प्रतिदिन लौंग और बताशे का भोग अर्पित करें।
- दु्र्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।
- पूजा में मां को लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।
मां दुर्गाजी की आरती / Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कटरा माता वैष्णो देवी के मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी... देखें तस्वीरें...
आज से नौ दिनों दिन तक चलने वाली शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। लगातार नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना की जाएगी। घरों में मां दुर्गा विराजेंगी और देवी मां के भक्त श्रद्धापूर्वक मां की पूजा,साधना, जप-तप और ध्यान लगाएंगे। नवरात्रि पर देश के सभी प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और शक्तिपीठों पर भक्तों की भीड़ एकत्रित होगी। मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं।
- बंगाल में सबसे ज्यादा 10 शक्तिपीठ
- उत्तर भारत में 08 शक्तिपीठ
- पश्चिम भारत में 5 शक्तिपीठ
- दक्षिण भारत में 5 शक्तिपीठ
- पूर्वोत्तर भारत में 5 शक्तिपीठ
- मध्य भारत में 2 शक्तिपीठ
- भारत के बाहर 8 शक्तिपीठ
Navratri 2022: जानें देवी मां के 52 शक्तिपीठों के नाम और स्थान, दर्शन के लिए इन शहरों की ओर करें रुख
| शारदीय नवरात्रि के दिन | देवी | बीज मंत्र |
| पहला दिन | शैलपुत्री | ह्रीं शिवायै नम:। |
| दूसरा दिन | ब्रह्मचारिणी | ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:। |
| तीसरा दिन | चन्द्रघण्टा | ऐं श्रीं शक्तयै नम:। |
| चौथा दिन | कूष्मांडा | ऐं ह्री देव्यै नम:। |
| पांचवा दिन | स्कंदमाता | ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:। |
| छठा दिन | कात्यायनी | क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:। |
| सातवाँ दिन | कालरात्रि | क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:। |
| आठवां दिन | महागौरी | श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:। |
| नौवां दिन | सिद्धिदात्री | ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। |
- नवरात्रि पर घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- प्रतिदिन घर के हर एक हिस्से में गंगाजल का छिड़काव करें, इससे घर की नकारात्मक शक्तियां खत्म होती हैं।
- नवरात्रि पर नौ दिनों तक देवी आराधना के साथ सबसे पहले भगवान गणेश की स्तुति और वंदना करें।
- घर के मुख्य दरवाजे के बाहर स्वास्तिक और ऊं का निशान बनाएं।
- रोजाना देवी दुर्गा से संबंधित मंत्रों का जाप करें।
- आर्थिक संपन्नता के लिए आप नवरात्रि के दौरान आटा गूंथ कर उसकी एक लोई बनाकर बहते जल में भी प्रभावित करें।
- मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रि पर 9 दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्जवलित करने का विधान है। ऐसे में अखंड ज्योति को कभी सीधे जमीन पर न रखें। अखंड ज्योतिष को हमेशा लकड़ी की चौकी पर ही रखें।
- अखंड ज्योति के नीचे अष्टदर बनाकर रखें।
- अखंड ज्योति की स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गंदे या झूठे हाथ से कभी भी नहीं छूना चाहिए।
- अखंड ज्योति को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। घर पर कोई न कोई सदस्य जरूर मौजूद होना चाहिए।
- अखंड ज्योति को हमेशा शुद्ध देसी घी से प्रज्जवलित करना चाहिए।
- अखंड ज्योति कभी भी बुझनी चाहिए।
- अखंड ज्योति को शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रो के जाप के साथ जलना चाहिए।
नवरात्रि पर क्या करें
1-नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
2-नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
3-नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
4-देवी मां को प्रतिदिन करें जल अर्पित
5-नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
6- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
7- ब्रह्राचर्य का पालन करें
नवरात्रि पर क्या न करें
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। घर के सदस्य अगर नौ दिनों तक व्रत नहीं रखे हुए हैं तो भी नौ दिनों तक भोजन में छौंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
| शारदीय नवरात्रि 2022 | क्या करें | क्या न करें |
| नवरात्रि | सात्विक भोजन, साफ़ सफाई, देवी आराधना,भजन-कीर्तन, जगराता, मंत्र,देवी आरती | प्याज,लहसुन,शराब,मांस-मछली का सेवन, लड़ाई, झगड़ा, कलह, कलेश, काले कपड़े और चमड़े की चीजें न पहने, दाढ़ी,बाल और नाखून न काटें |
आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। पहले दिन कलश स्थापना के साथ माता दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। फिर इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां शक्ति की उपासना की जाती है। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने का विधान होता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। इसमें देवी के नौ स्वरूपों पूजा की जाती है जिससे भक्तों को अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
| दिन | नवरात्रि दिन | तिथि | पूजा-अनुष्ठान |
| 26 सितंबर 2022 | नवरात्रि दिन 1 | प्रतिपदा | मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना |
| 27 सितंबर 2022 | नवरात्रि दिन 2 | द्वितीया | मां ब्रह्मचारिणी पूजा |
| 28 सितंबर 2022 | नवरात्रि दिन 3 | तृतीया | मां चंद्रघंटा पूजा |
| 29 सितंबर 2022 | नवरात्रि दिन 4 | चतुर्थी | मां कुष्मांडा पूजा |
| 30 सितंबर 2022 | नवरात्रि दिन 5 | पंचमी | मां स्कंदमाता पूजा |
| 01 अक्तूबर 2022 | नवरात्रि दिन 6 | षष्ठी | मां कात्यायनी पूजा |
| 02 अक्तूबर 2022 | नवरात्रि दिन 7 | सप्तमी | मां कालरात्रि पूजा |
| 03 अक्तूबर 2022 | नवरात्रि दिन 8 | अष्टमी | मां महागौरी दुर्गा महा अष्टमी पूजा |
| 04 अक्तूबर 2022 | नवरात्रि दिन 9 | नवमी | मां सिद्धिदात्री दुर्गा महा नवमी पूजा |
| 05 अक्तूबर 2022 | नवरात्रि दिन 10 | दशमी | नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी |
- सबसे पहले सुबह जल्दी स्नान करें और पूजा का संकल्प लें।
- जहां पर कलश स्थापित करें उस जगह को प्रणाम करते हुए भगवान गणेश की स्तुति करते हुए चौकी रखें।
- फिर इसके बाद गंगाजल छिड़ककर चौकी पर लाल वस्त्र बिछा दें और कलश रखें।
- कलश में गंगाजल के साथ ताजा जल, अक्षत,सुपारी, दूर्वा, फूल हल्दी की गांठ,चंदन और सिक्का डाल दें।
- अब कलश के ऊपर आम के पत्ते और सात तरह के अनाज को रखते हुए जटा नारियल रख दें।
शारदीय नवरात्रि 2022- कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
पहला शुभ मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक
दूसरा शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त)- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक
तीसरा शुभ मुहूर्त (शुभ चौघड़िया मुहूर्त)- सुबह 09 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक
चर, लाभ, अमृत चौघड़िया मुहूर्त-दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजे तक
शारदीय नवरात्रि 2022 की तिथि
प्रतिपदा तिथि की शुरूआत- 26 सितंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 22 मिनट पर
प्रतिपदा तिथि का समापन- 27 सितंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 09 मिनट पर