मकर संक्रांति कब है 2025 (Makar Sankranti 2025 Date)
मकर संक्रांति इस साल 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
मकर संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त (Makar Sankranti Punya Kaal Muhurat 2025)
मकर संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त 14 जनवरी की सुबह 09:03 से शाम 05:46 बजे तक रहेगा। महा पुण्य काल समय सुबह 09:03 से सुबह 10:48 बजे तक रहेगा।
मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यूपी और बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी कहते हैं वहीं दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल कहा जाता है। मध्य भारत में इसे माघी/भोगली बिहू आदि के नाम से मनाते हैं। इस दिन कहीं दही-चूड़ा तो कहीं खिचड़ी और तिल के लड्डू बनाए जाते हैं।
मकर संक्रांति का महत्व (Importance Of Makar Sankranti)
जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति बेहद खास इसलिए भी मानी जाती है, क्योंकि इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है और खरमास के समाप्त होने से शादी-विवाह या अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति के त्योहार को भारत में पोंगल, खिचड़ी, संक्रांति, उत्तरायण भी कहा जाता है।
मकर संक्रांति पर भीष्म पितामह ने त्यागा था शरीर
मान्यता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का चयन किया था। इस के अलावा इसी दिन गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था।
पौष पूर्णिमा से हुई महाकुंभ 2025 की शुरुआत
आज पौष पूर्णिमा है और इसी के साथ महाकुंभ 2025 की शुरुआत भी हो गई है। आज सुबह से लाखों की संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पर स्नान और दान करने से महापुण्य की प्राप्ति होती है। कल मकर संक्रांति और यह पहला अमृत स्नान भी जिसमें सभी 13 अखाड़ों के साधु-संत और नागा साधु समेत आमजन संगम में डुबकी लगाएंगे। इस बार महाकुंभ बहुत ही खास है क्योंकि यह 144 साल बाद दोबारा से आयोजन किया जा रहा है। आज पौष पूर्णिमा पर स्नान का मुहूर्त सुबह 5 बजकर से 27 मिनट से शुरू हुआ है जो दिन भर चलेगा।
मकर संक्रांति पर बनेगा दुर्लभ संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन कई तरह के शुभ योगों का निर्माण देखने को मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य गोचर करते हुए धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस बार सूर्य के मकर राशि में गोचर करने पर कई तरह के शुभ योग बन रहे हैं। मकर संक्रांति के दिन पुष्य नक्षत्र जोकि शनि का नक्षत्र माना जाता है उसका योग है। इससे साथ-साथ विष्कुंभ, प्रीति जैसे योगों का भी निर्माण होगा। इन शुभ योग में मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान का महत्व बढ़ जाता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना का महत्व
मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना करने का महत्व वेदों और पुराणों में बताया गया है। सूर्य ऊर्जा, प्रकाश और जीवन के स्रोत हैं। ऋग्वेद में सूर्य को आत्मा का पोषक और समस्त सृष्टि का आधार कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य उपासना से रोग, शोक और दरिद्रता का नाश होता है।
मकर संक्रांति पर करें इन 5 मंत्रों का जाप
- ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्त्पते। अनुकंपय मां भक्त्या, गृहाणार्घ्य नमोस्तुते।।
- आदित्यतेजसोत्पन्नं राजतं विधिनिर्मितम्। श्रेयसे मम विप्र त्वं प्रतिगृहेणदमुत्तमम्।।
- इन्द्रं विष्णुं हरिं हंसमर्क लोकगुरुं विभुम्। त्रिनेत्रं त्र्यक्षरं त्र्यङ्गं त्रिमूर्ति त्रिगतिं शुभम्।।
- ॐ ह्रीं सूर्याय नमः
- सूर्य शक्ति मंत्र: ॐ सूर्याय आदित्याय श्री महादेवाय नमः
मकर संक्रांति को खिचड़ी क्यों कहा जाता है?
जब भारत पर खिलजी ने आक्रमण किया था तो उस युद्ध में भारत के कई योद्धा और योगी भी शामिल हुए थे। हर तरफ लड़ाई का माहौल था। जिसकी वजह से किसी को खाने का समय नहीं मिल पाता था। जिसके कारण लोग कमजोर होने लगे थे। तब गुरु गोरखनाथ जी ने इस समस्या का हल निकालते हुए सभी को दाल, चावल और सब्जियों को अलग-अलग पकाने की जगह एक साथ पकाने के लिए कहा। जो सभी के लिए बेहद आसान था। इस नए व्यंजन को खाकर सभी का पेट भी आसानी से भर जाता था।
कहते हैं खिलजी को हराने के बाद गोरखनाथ जी समेत सभी योगियों ने मिलकर इस नए पकवान को बनाया। फिर इस पकवान को सभी में बांटा और इसे खिचड़ी का नाम दिया गया। कहते हैं जिस दिन ये कार्य किया गया उस दिन मकर संक्रांति थी। कहते हैं तभी से लेकर आज तक मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा चली आ रही है और इस वजह से कई जगह इस पर्व को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है।
मकर संक्रांति के दिन न खाएं ये चीजें
मकर संक्रांति के दिन आपको भूलकर भी मास-मछली, प्याज-लहसुन, शराब, सिगरेट, गुटका या फिर मसालेदार और तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आप ईश्वर का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो इस दिन आपको तिल या फिर खिचड़ी का ही सेवन करना चाहिए। इन चीजों का सेवन काफी शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति काले तिल के उपाय
मकर संक्रांति पर काले तिल का दान करने से शनि दोष से राहत मिलती है। इसके साथ ही पूजा के बाद इन काले तिल को तिजोरी में रख लें। इस उपाय से मान्यता है इससे धन की आवक कभी कम नहीं होती है।
मकर संक्रांति के दिन स्नान दान
मकर संक्रांति के दिन स्नान दान का बहुत महत्व होता है, इस दिन कंबल का दान करना बहुत फलदायी माना जाता है। गरम कपड़े, खिड़ची, अन्न, तिल, गुड़ का दान सर्वश्रेष्ठ है। मकर संक्रांति के दिन दान करने से ग्रहण दोष दूर होते हैं।
Makar Sankranti 2025 Importance: क्या है मकर संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के साथ करीब एक महीने से चले आ रहे खरमास खत्म हो जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्य फिर आरंभ हो जाते हैं। इसके साथ विवाह, गृहप्रवेश, सगाई, मुंडन और अन्य तरह दूसरे धार्मिक आयोजन आरंभ हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान विशेष कर प्रयागराज में संगम में स्नान और दान करना का महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इस दिन विशेष कर तिल, गुड़, दाल, खिचड़ी और कंबल का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर कैसे करें सूर्य उपासना
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना करने का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना करने का महत्व वेदों और पुराणों में बताया गया है। सूर्य ऊर्जा, प्रकाश और जीवन के स्रोत हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत ही शुभ होता है। सूर्य को जल अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे में जल, गुड़, लाल पुष्प, और चावल मिलाकर सूर्य को अर्पित करें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करें।
Makar Sankranti Puja Vidhi: मकर संक्रांति पर इस विधि से करें सूर्य उपासना, मिलेंगे शुभ फल
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर सूर्य स्तुति और मंत्र जाप का महत्व
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की उपासना और मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्यदेव की स्तुति के लिए आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें। सूर्य गायत्री मंत्र "ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्" का जाप करने से सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Makar Sankranti 2025 Daan Importance: मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के दान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन विशेष महत्व होता है। इस स्नान के साथ दान का विशेष महत्व होता है। तिल-गुड़ का दान करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और पापों का नाश होता है। तिल और गुड़ के दान से शनि दोष को शांत करने में भी सहायता मिलती है।
Makar Sankranti 2025 Daan Importance: मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का महत्व
मकर संक्रांति के त्योहार को खिचड़ी के नाम भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाना और खिचड़ी की सामग्री का दान करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खिचड़ी का दान करने से घर में खुशहाली आती है और शारीरिक और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह दान, यश और कीर्ति को भी बढ़ाता है।
कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के दान करने के अलावा कंबल का दान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कंबल दान से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जीवन में शीतकालीन कष्टों से राहत मिलती है। यह दान कुंडली के शनि और राहु दोष को शांत करता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य और तांबे के बर्तन का दान
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तनाव दूर होता है। तांबे के बर्तन का दान करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति ठीक होती है और विशेष रूप से सूर्य दोष शांत होता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति करें सरसों के तेल का दान
मकर संक्रांति के दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन सरसों के तेल का दान करने से शनि राहु ग्रह से जुड़े दोषों से मुक्ति मिलती है। इस उपाय से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का वास होता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर बनेगा शुभ योग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति का दिन बहुत ही खास रहने वाला है। इस दिन कई शुभ संयोग का निर्माण होगा। मकर संक्रांति के दिन नवपंचम, भौम पुष्य योग और अर्धकेंद्र योग का निर्माण होगा। इसके अलावा इस दिन मंगल और गुरु एक दूसरे से 45 डिग्री पर होंगे। गुरु बृहस्पति वृषभ राशि में और मंगल कर्क राशि में विराजमान होंगे।
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होते हैं उत्तरायण
कल, 14 जनवरी को पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में गोचर करते हैं। मकर संक्रांति को देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नामों से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण में होते हैं इसलिए इसे उत्तरायण पर्व के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रान्ति से सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं का सूर्योदय होता है और दैत्यों का सूर्यास्त होने पर उनकी रात्रि प्रारंभ हो जाती है। उत्तरायण के शुरू होने पर दिन बडे़ और रातें छोटी होती हैं।
मकर संक्रांति पर तीर्थराज प्रयागराज में स्नान का महत्व
मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। विशेषकर माघ माह में तीर्थराज प्रयाग के संगम पर स्नान, तप-साधना और दान का विशेष महत्व होता है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है कि '' माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आते हैं तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगम तट पर आते हैं। देवता, दैत्य, किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं ''।
14 जनवरी को माघी संक्रांति
देशभर के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति को कई नामों से मनाया जाता है। पंजाब में इस पर्व को माघी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तड़के पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है। माघी पर श्री मुक्तसर साहिब में एक प्रमुख मेला आयोजित किया जाता है। भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है और खिचड़ी, गुड़ और खीर खाते हैं।
तमिलनाडु में मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व
दक्षिण भारत में मकर संक्रांति के पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल कहते हैं, जिसमें चार दिवसीय आयोजन होते हैं। पहला दिन भोगी - पोंगल, दूसरा दिन सूर्य- पोंगल, तीसरा दिन मट्टू- पोंगल और चौथा दिन कन्या- पोंगल के रूप में मनाते हैं। इसमें चावल के पकवान, रंगोली और भगवान कृष्ण की पूजा होती है।
Makar Sankranti 2025 Importance: पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति पर गंगासागर में स्नान का महत्व
पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति पर गंगासागर में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए व्रत रखा था। साथ ही इसी दिन मां गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जाकर मिली थीं। इस कारण से हर वर्ष मकर संक्रांति पर गंगासागर में स्नान किया जाता है।
गुजरात में मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व
गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण कहा जाता है। मकर संक्रांति पर इस दिन जोश और उमंग के साथ काइट फेस्टिवल मनाया जाता है और उंधियू और चिक्की इस दिन विशेष त्योहार व्यंजन हैं।
मकर संक्रांति पर दान का महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। इस दिन प्रयागराज में संगम समेत देश के सभी पवित्र नदियों में स्नान करने का खास महत्व होता है। इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और कंबल का दान करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर दान करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
राजस्थान में मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व
राजस्थान में मकर संक्रांति का त्योहार बहुत ही प्रमुख माना जाता है। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही इस दिन महिलाओं द्वारा किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन व संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देने की भी प्रथा है।
मकर संक्रांति पर करें राशि अनुसार दें सूर्य को अर्घ्य (Arghya According To Zodiac Sign)
- मेष राशि: मेष राशि वाले जल में कुमकुम, लाल पुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- वृषभ राशि: वृषभ राशि वाले जल में सफेद चंदन, दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- मिथुन राशि: मिथुन राशि वाले जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- कर्क राशि: कर्क राशि वाले जल में दूध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- सिंह राशि: सिंह राशि वाले जल में कुमकुम तथा लाल पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- कन्या राशि: कन्या राशि वाले जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- तुला राशि: तुला राशि वाले जल में सफेद चंदन, दूध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें.।
- वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि वाले जल में लाल पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दें।
- धनु राशि: धनु राशि वाले हल्दी, केसर, पीले पुष्प, तिल जल में मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- मकर राशि: मकर राशि वाले जल में नीले पुष्प, काले उड़द, सरसों का तेल-तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- कुंभ राशि: कुंभ राशि वाले जल में काले-नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- मीन राशि: मीन राशि वाले जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
मकर संक्रांति और बिहू
मकर संक्रांति के त्योहार को असम में बिहू के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और इस दिन किसान फसल की कटाई करते हैं। इस दिन कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं और अलाव जलाकर तिल और नारियल से बने व्यंजनों से अग्नि देवता को भोग लगाया जाता है।
मकर संक्रांति पर महाकुंभ का होगा पहला अमृत स्नान
पूरे देशभर में कल यानी 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार प्रयागराज में महाकुंभ पौष पूर्णिमा के साथ शुरू हो गया है। मकर संक्रांति पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान किया जाएगा। इस बार प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर दान-पुण्य और सूर्य को अर्घ्य देने पर पुण्य लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर पढ़ें आदित्य ह्रदय स्तोत्र
मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते हैं। इस दिन ग्रहों के राजा सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन से खरमास खत्म हो जाता है और सभी तरह के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश और सगाई जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की विशेष आराधना और पूजा का महत्व होता है। इस दिन सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए और कुंडली में मौजूद सभी तरह दोषों के निवारण के लिए आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी होता है।
Makar Sankranti 2025 Puja Vidhi: मकर संक्रांति पूजा विधि
मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होकर धनु से मकर राशि में गोचर करते हैं। इस दिन गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना करने पर सूर्यदेव की विशेष कृपा मिलती है। मकर सक्रांति पर विधि-विधान के साथ सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्योदय से पहले उठकर साफ-सफाई करके किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर किसी कारण से नदी में स्नान न कर पाएं तो घर में ही नहाने की बाल्टी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर स्नान करें। फिर इसके बाद पीले कपड़े पहनकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दें। इसके बाद सूर्य चालीसा और आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करें।
मकर संक्रांति पर इन तीन देवताओं को लगाएं खिचड़ी का भोग
मकर संक्रांति का त्योहार हिंदू आस्था का एक बहुत ही बड़ा केंद्र है। मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की विशेष प्रथा है। इसके अलावा खिचड़ी का भोग देवी-देवताओं को अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव, शनिदेव और भगवान विष्णु को खिचड़ी का भोग अवश्य लगाना चाहिए।
मकर संक्रांति का महत्व
सूर्य के मकर संक्रांति के साथ खरमास खत्म होगा और शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। मकर संक्रांति पर दान और स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान के साथ सूर्यदेव की आराधना और तिल, गुड़, खिचड़ी और गर्म कपड़ों का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
सूर्य के उत्तरायण होने का दिन है मकर संक्रांति
14 जनवरी को पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं। मकर का अर्थ है मकर राशि और संक्रांति का अर्थ है संक्रमण। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना ''संक्रांति '' कहलाता है और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना 'उत्तरायण ' और कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाना दक्षिणायण कहलाता है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायण में ठीक इसका विपरीत होता है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायण देवताओं की रात होती है।
आज पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। मकर संक्राति पर खिचड़ी, गुड़, तिल का भोग लगता है। भारत में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर विभिन्न प्रांतों में प्रसाद के रूप में खिचड़ी तैयार की जाती है। कहीं इसे ताई पोंगल, कहीं खेचड़ा, कहीं माथल तो कहीं बीसी बेले भात कहा जाता है। मकर संक्रांति पर पहला अमृत स्नान शुरू हो गया है। महाकुंभ मेला प्रशासन की तरफ से पूर्व की मान्यताओं का पूरी तरह ध्यान रखते हुए सनातन धर्म के 13 अखाड़ों के लिए अमृत स्नान का भी स्नान क्रम जारी किया गया है। आज मकर संक्रांति पर्व पर अखाड़ों का अमृत स्नान करीब साढ़े नौ घंटे तक चलेगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति के पावन पर्व की दी शुभकामनाएं
इन खूबसूरत संदेशों के माध्यम से दें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
Makar Sankranti Wishes
- फोटो : अमर उजाला
गंगा-यमुना के तट पर उमड़ा जन सैलाब,
और भगवान सूर्य का आशीर्वाद,
यही है मकर संक्रांति के पर्व का उल्लास।
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
मीठे गुड़ में मिल गया तिल,
उड़ीं पतंग और खिल गया दिल,
आपके जीवन में आए हर दिन सुख और शांति,
मुबाराक हो आप सभी को मकर संक्रांति
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
इस वर्ष की मकर संक्रांति,
आपके लिए हो तिल लड्डू जैसी मीठी,
मिले कामयाबी पतंग जैसी उंची,
इसी कामना के साथ हैप्पी मकर संक्रांति।
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के संतों ने लगाई पवित्र डुबकी
मकर संक्रांति के अवसर पर त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ 2025 के पहले अमृत स्नान की शुरुआत करते हुए महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के साधुओं ने पवित्र डुबकी लगाई।
मकर संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त (Makar Sankranti Punya Kaal Muhurat 2025)
मकर संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त 14 जनवरी की सुबह 09:03 से शाम 05:46 बजे तक रहेगा। महा पुण्य काल समय सुबह 09:03 से सुबह 10:48 बजे तक रहेगा।
मकर संक्रांति की पूजा विधि (Makar Sankranti Puja Vidhi)
- सुबह उठकर सबसे पहले घर की सफाई करें।
- आसपास किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि पास में नदी नहीं है तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- यदि व्रत रखना चाहते हैं तो इस दिन सुबह व्रत का संकल्प लें।
- पीले वस्त्र पहनें और फिर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- मकर संक्रांति पर सूर्य चालीसा पढ़ना शुभ होता है और साथ ही आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी जरूर करें।
- अंत में सूर्य भगवान की आरती करें और गरीबों को दान जरूर दें।
Makar Sankranti: मकर संक्रांति शुभ योग
आज देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। आज सूर्यदेव अपने पुत्र शनि का राशि मकर में प्रवेश कर रहे हैं। आज मकर संक्रांति के मौके पर बहुत ही अच्छा शुभ योग बन रहा है। मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते हैं और आज पुष्य नक्षत्र के साथ अर्धकेंद्र और नवपंचम जैसा राजयोग का निर्माण होता है।
मकर संक्रांति पर आज क्या-क्या करें।
आज देशभर में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है और इसी के साथ महाकुंभ का पहला अमृत स्नान भी संगम में जारी है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। आज के दिन सबसे पहले पवित्र नदी में स्नान और इसके बाद तांबे के लोटे में गंगाजल, लाल चंदन, तिल, गुड़ और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा करने से सूर्य और शनि दोनों के दोष शांत होते हैं, मान-सम्मान में वृद्धि,करियर में तरक्की और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
आप यहां देख सकते हैं प्रयागराज महाकुंभ में मकर संक्रांति के मौके पर पहले अमृत स्नान की सभी जानकारी
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर आज तिल और गुड़ का दान करें
आज मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान करने का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर काले तिल और गुड़ का दान करना मकर संक्रांति के दिन विशेष फलदायी माना गया है। इस उपाय शनि और राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करता है और पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान का महत्व
आज से सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण हो गए हैं और मकर संक्रांति का त्योहार देशभर में मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करना बहुत ही लाभकारी और पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाना और इसकी सामग्री का भी दान किया जाता है। इस दिन खिचड़ी का दान करते हैं उनके घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती है।
भगवान को खिचड़ी का भोग लगाएं
मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और उसका भोग लगाने का विशेष महत्व है। भगवान को खिचड़ी अर्पित करने के बाद गरीबों को इसका दान करें। यह उपाय ग्रह दोषों को दूर कर सुख और शांति लाता है।
तिल दान करने से होते हैं ग्रह शांत
Makar Sankranti
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मकर संक्रांति पर मंदिरों एवं पवित्र नदियों के घाट, तीर्थ आदि पर तिल का दान ग्रहों की शांति के लिए भी किया जाता है। काले तिल का दान मकर संक्रांति पर शनि, राहु, केतु की अनिष्ट पीड़ा को शांत करता है, वहीं सफेद तिल का दान चंद्र, शुक्र की अनुकूलता दिलाता है। इस प्रकार घी, गुड़, तिलकुट आदि पदार्थों का दान उनसे संबंधित ग्रहों की पीड़ा को शांत कर जीवन में सुख का मार्ग प्रशस्त करता है।
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Makar Sankranti 2025: आज से सूर्यदेव हुए उत्तरायण
आज उत्तरायण का पर्व है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। हिंदू धर्म में सूर्य के उत्तरायण होने का विशेष महत्व होता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपने प्राण को त्यागा था। उत्तरायण से देवताओं का दिन आरंभ हो जाता है। इस दिन से खरमास भी खत्म हो जाता है और सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य एक बार फिर से आरंभ हो जाते हैं।
महाकुंभ में संगम में स्नान जारी
प्रयागराज में महाकुंभ में मकर संक्रांति के मौके पर संगम में सुबह करीब 10 बजे तक करीब 1 करोड़ 38 लाख लोगों ने पवित्र संगम में डुबकी लगाई है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर तीर्थराज प्रयाग में स्नान करने का विशेष महत्व होता है।
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Significance on Sankranti: मकर संक्रांति ऋतु परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
उत्तरायण के समय पृथ्वी पर दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। सूर्य की किरणें अधिक समय तक धरती पर रहती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह समय नई शुरुआत और प्रगति का प्रतीक है। इसलिए इस दौरान शुभ कार्य, नई योजनाएं और दान-पुण्य करना श्रेष्ठ माना गया है।
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मकर संक्रांति पर गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ऐसे करें स्नान
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान और दान करते पुण्य लाभ प्राप्त किया जाता है। मकर संक्रांति के मौके पर अगर आप पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर में स्नान करने से पहले नहाने वाले पाने में गंगाजल की कुछ बूंदें और तिल डालकर स्नान करें। इससे गंगा स्नान के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।