कृष्ण जन्माष्टमी 2026
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर 2026 को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को ही कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मान्य होगा। इस तिथि पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, ग्रहों का खास संयोग और वृषभ राशि में चंद्रमा का योग रहे
जन्माष्टमी 2026 शुभ योग
ज्योतिषियों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन जयंती योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, हंस योग, मालव्य योग, बुधादित्य राजयोग और नवपंचम राजयोग का संयोग बन रहा है। इसके अलावा अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति भी इस दिन को विशेष बना रही है। धार्मिक दृष्टि से इन शुभ संयोगों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है।
मथुरा, उत्तर प्रदेश: जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में मंगला आरती और विशेष पूजा की जा रही है।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर ऐसे करें बाल गोपाल की पूजा
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्त को भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के लिए पहले घर के मंदिर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान के स्वागत के लिए घर और मंदिर को फूलों, रोशनी और रंगोली से सजाया जा सकता है।
- पूजा की तैयारी के लिए आसन, झूला, पाद्य, पंचामृत, आचमन के लिए जल, स्नान सामग्री, फूल, धूप, दीप और भोग आदि सामग्री रख सकते हैं। पूजा की सभी वस्तुएं स्वच्छ होनी चाहिए।
- जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके पूजा और भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान से दिन की शुरुआत करें। रात में पूजा स्थल को सुंदर तरीके से सजाएं और भगवान के जन्म के समय यानी निशीथ काल में दीप प्रज्वलित करके जन्मोत्सव मनाएं।
- सबसे पहले चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और उस पर बाल गोपाल को विराजमान करें। इसके बाद उन्हें पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। स्नान के बाद भगवान को साफ एवं नए वस्त्र पहनाएं। उन्हें तिलक लगाएं और फूल, तुलसी दल आदि अर्पित करें।
- इसके बाद बाल गोपाल को माखन-मिश्री और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें। धूप और दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और श्रद्धापूर्वक उनका ध्यान करें।
Janmashtami 2026: बाल गोपाल को भोग लगाने के नियम
जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को भोग अर्पित करते समय शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। भगवान श्रीकृष्ण को बाल रूप में माखन-मिश्री समेत कई सात्विक चीजें प्रिय मानी जाती हैं।
- बाल गोपाल को हमेशा सात्विक और शुद्ध भोजन का भोग लगाएं।
- भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
- भोग रखने वाले बर्तनों को अच्छी तरह साफ करके ही इस्तेमाल करें।
- भोग में मिठाई या अन्य मीठे पकवान शामिल किए जा सकते हैं।
- भगवान को अर्पित किए जाने वाले जल और भोग में तुलसी दल जरूर रखें।
- बाल गोपाल को जल अर्पित करने के लिए स्वच्छ पात्र का इस्तेमाल करें।
- जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष परंपरा मानी जाती है।
Krishna Janmashtami 2026: 4 सितंबर 2026 का शुभ चौघड़िया
जन्माष्टमी के दिन पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ चौघड़िया का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 4 सितंबर को प्रमुख शुभ समय इस प्रकार बताए गए हैं:
- लाभ चौघड़िया: सुबह 7:35 बजे से 9:10 बजे तक।
- अमृत चौघड़िया: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक।
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:20 बजे से 1:55 बजे तक।
- निशीथ काल: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक।
Krishna Janmashtami 2026: क्या है लड्डू गोपाल के श्रृंगार और पूजा की विधि ?
Krishna Janmashtami 2026
- फोटो : अमर उजाला
- मध्यरात्रि की पूजा से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें।
- अब कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
- अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को किसी साफ और मुलायम कपड़े से धीरे से पोंछें।
- लड्डू गोपाल जी को पोशाक पहनाएं और उन्हें मुकुट, मोरपंख, कुंडल, काजल, इत्र, माला और पायल आदि पहनाएं।
- इसके अलावा चंदन या तिलक लगाएं और उन्हें फूलों से सजाएं।
- लड्डू गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान करें और धीरे-धीरे झूला झुलाते हुए जन्मोत्सव के गीत और भजन गा सकते हैं।
- अब आप कान्हा जी को माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं।
- भोग लगाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से आरती करें।
- आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करें।
Krishna Janmashtami 2026: ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी
घर में झांकी बनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल या किसी साफ जगह की अच्छी तरह सफाई करें। एक छोटी चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें। झांकी को सजाने के लिए पालना, झूला, मोरपंख, बांसुरी, फूल और छोटे मिट्टी के दीपक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
अगर घर में पर्याप्त जगह है तो गोकुल या नंद भवन की थीम पर छोटा-सा दृश्य बनाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी की मटकियां, छोटे बर्तन, गाय-बछड़े की प्रतिमाएं और फूलों का इस्तेमाल करें। भगवान के जन्म के समय परिवार के सदस्य मिलकर पालना झुला सकते हैं।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी का व्रत कब से शुरू माना जाता है?
जन्माष्टमी व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को जन्माष्टमी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करना चाहिए और खान-पान में संयम बरतना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत की अवधि में मन को शांत और भगवान की भक्ति में लगाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए व्रत से पहले ही अपनी दिनचर्या को संयमित रखना बेहतर होता है।
जन्माष्टमी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए
- जन्माष्टमी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। आमतौर इस व्रत में अन्न और अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। इस व्रती लोगो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत या फिर फलाहार कर सकते हैं।
- इस व्रत में केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती जैसे फल, दूध-दही, मखाना, साबूदाना, सूखे मेवे, सिंघाड़ा का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
Krishna Janmashtami 2026: क्या जन्माष्टमी के व्रत में निर्जल रहना जरूरी है?
जन्माष्टमी के व्रत को कई धार्मिक परंपराओं में निर्जल और निराहार रखने का उल्लेख मिलता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए ऐसा व्रत रखना संभव नहीं होता। व्रत की कठोरता व्यक्ति की क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। जो लोग निर्जल या निराहार व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। धार्मिक व्रत में श्रद्धा और संकल्प को महत्व दिया जाता है, इसलिए अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखते हुए व्रत रखना चाहिए।
क्या जरूरी है छप्पन भोग लगाना?
जन्माष्टमी पर छप्पन भोग लगाने की परंपरा काफी प्रसिद्ध है। हालांकि हर घर में 56 तरह के पकवान बनाना आवश्यक नहीं माना जाता। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार एक या कुछ सात्विक व्यंजन भी श्रद्धा से भगवान को अर्पित कर सकते हैं। भोग में संख्या से अधिक श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है।
Janmashtami 2026:जन्माष्टमी व्रत कब खोलें?
जन्माष्टमी व्रत में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का विशेष महत्व है। इसलिए कई परंपराओं में आधी रात को भगवान के जन्मोत्सव और पूजा के बाद व्रत से जुड़े नियमों के अनुसार आहार ग्रहण किया जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। 2026 में जन्माष्टमी के अवसर पर निशिता काल 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकेगा।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पूजा सामग्री लिस्ट
- इस दिन लड्डू गोपाल जी को स्नान कराने के लिए अभिषेक की थाली, पंचामृत के लिए दूध, दही, घी आदि रखें।
- गंगाजल, शुद्ध जल भी शामिल करें। साथ ही तुलसी दल, दूर्वा, शंख और घंटी भी रखें।
- आप अगरबत्ती, घी का दीपक, अखंड ज्योति, कपूर, रोली, अक्षत, पीला चंदन भी रख लें।
- अब पोशाक, रुमाल, मुकुट, कुंडल, मोरपंख, फूल माला, बांसुरी, वैजयंती माला, इत्र, आसन और झूला।
- हल्दी, कुमकुम, धूप, माचिस, फूल, धनिया पंजीरी, पंचामृत, सूखे मेवे, मिठाई और नारियल।
- पूजा की थाली, मखाने की खीर, मौसमी फल, मक्खन-मिश्री, कलश, लौंग लगा पान का बीड़ा, मौली, लाल या पीला कपड़ा,
- खड़ा धनिया, श्रीफल और आरती की थाली। इसके अलावा दान के लिए अपनी क्षमता के अनुसार दान की चीजें भी रख सकते हैं।
जन्माष्टमी पर क्या न करें ?
- जन्माष्टमी के दिन न केवल अपने सात्विक भोजन का ध्यान रखें बल्कि अपने आचरण की शुद्धता का भी ध्यान रखने की परंपरा होती है। जन्माष्टमी पर किसी को अपशब्द, वाद-विवाद, अपमान करने से बचें। इस दिन पूरे घर में शांति और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।
क्यों खास है जन्माष्टमी का यह संयोग?
जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का मिलना भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जुड़ी ]मान्यता के कारण विशेष महत्व रखता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 2026 में ऐसा संयोग बनने से इस जन्माष्टमी को विशेष बताया जा रहा है। इसी संदर्भ में इसे जयंती योग से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग पंचांगों और ज्योतिषीय गणनाओं में इस योग की व्याख्या अलग हो सकती है। इसलिए धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Krishna Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण को क्यों कहा जाता है माखन चोर?
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को उनकी चंचल और मनमोहक लीलाओं के लिए जाना जाता है। ब्रज में बाल गोपाल अक्सर गोपियों के घर पहुंच जाते थे और वहां रखे माखन-दही को अपने सखाओं के साथ मिलकर निकाल लेते थे। इसी कारण उन्हें प्रेम से ‘माखन चोर’ कहा जाने लगा। धार्मिक कथाओं में बताया जाता है कि श्रीकृष्ण के घर में भी माखन-दही की कोई कमी नहीं थी। ऐसे में उनके लिए दूसरे घरों से माखन चुराने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यही बात उनकी इस लीला को साधारण चोरी से अलग करती है। भक्त परंपरा में इसे भगवान और उनके भक्तों के बीच प्रेमपूर्ण संबंध का प्रतीक माना गया है।
गोपियों के घर ही क्यों जाते थे कान्हा?
ब्रज की गोपियां कृष्ण की बाल लीलाओं से अत्यंत प्रभावित थीं। वे प्रतिदिन दूध-दही से माखन तैयार करती थीं और कृष्ण के प्रति प्रेम भाव रखती थीं। मान्यता है कि गोपियों का मन हमेशा कृष्ण के स्मरण में लगा रहता था। जब कृष्ण उनके घर माखन चुराने पहुंचते, तो उनकी शिकायतें भी कहीं न कहीं कान्हा के प्रति प्रेम को व्यक्त करती थीं। वे यशोदा मैया से कृष्ण की शिकायत करतीं, लेकिन मन ही मन उनके दोबारा आने की प्रतीक्षा भी करती थीं। इस तरह माखन चोरी की लीला ने कृष्ण और ब्रजवासियों के बीच आत्मीयता को और गहरा किया।
Shri Krishna Number 8 Significance: श्रीकृष्ण के जीवन में अंक 8 का महत्व
दिव्य जन्म संयोग: भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के 8वें अवतार हैं। उन्होंने 8वें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के 28वें द्वापर युग में, वसुदेव जी के 8वें पुत्र के रूप में जन्म लिया।
शुभ मुहूर्त व तिथि: उनका जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ। रात्रि के 7 मुहूर्त बीत जाने के बाद जैसे ही 8वां मुहूर्त (शून्य काल) उपस्थित हुआ, रोहिणी नक्षत्र के संयोग से अत्यंत शुभ 'जयंती योग' में मध्यरात्रि 12 बजे उनका अवतरण हुआ।
पारिवारिक संबंध: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि को जन्मे श्रीकृष्ण की 8 प्रमुख पटरानियां (अष्टभार्या) थीं।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय 8 व्यंजन
साग, कढ़ी और पूरी के अतिरिक्त बाल गोपाल को मुख्य रूप से ये 8 व्यंजन अत्यंत प्रिय हैं:
खीर
सूजी का हलवा या लड्डू
सेवइयां
पूरनपोली
मालपुआ
केसर भात
केले सहित सभी मीठे फल
कलाकंद
क्या जन्माष्टमी के व्रत में निर्जल रहना जरूरी है?
जन्माष्टमी के व्रत को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग इस दिन निर्जल और निराहार व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक आहार लेते हैं। जो लोग निर्जल व्रत रखने में असमर्थ हैं, वे फल, दूध या अन्य फलाहार लेकर भी भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर सकते हैं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026: छप्पन भोग में शामिल करें ये खास चीजें
56 Bhog Thali For Krishna Janmashtami 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
छप्पन भोग में गाय का घी, मक्खन, मलाई, रबड़ी, लस्सी, पापड़, सीरा, मोहन भोग, मौसमी फल, पान-सुपारी, इलायची, चावल-दाल, कढ़ी, दही, बाटी, पूरी, खीर, लड्डू, मालपुआ, घेवर, जलेबी, रसगुल्ला, मठरी, फेनी, अचार, रायता, साग और तरह-तरह के मीठे-तीखे, खट्टे, कड़वे व कसैले व्यंजन शामिल किए जाते हैं।
जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा
कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी की पूजा में खीरा काटने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके लिए ताजा और बिना कटा हुआ खीरा लेकर उसे अच्छी तरह धोकर पूजा स्थल पर रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, खीरे के ऊपरी हिस्से में छोटा-सा कट लगाकर उसमें बाल कृष्ण की छोटी प्रतिमा या लड्डू गोपाल के प्रतीक को रखा जाता है।
निशीथ काल में कृष्ण जन्म के समय मंत्र, भजन और आरती के साथ खीरा काटने की रस्म निभाई जाती है। कई जगह इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कारागार से उनके प्राकट्य के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। इसके बाद कान्हा को माखन-मिश्री, फल आदि का भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
Janmashtami 2026: क्या है लड्डू गोपाल के श्रृंगार और पूजा की विधि ?
- मध्यरात्रि की पूजा से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें।
- अब कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
- अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को किसी साफ और मुलायम कपड़े से धीरे से पोंछें।
- लड्डू गोपाल जी को पोशाक पहनाएं और उन्हें मुकुट, मोरपंख, कुंडल, काजल, इत्र, माला और पायल आदि पहनाएं।
- इसके अलावा चंदन या तिलक लगाएं और उन्हें फूलों से सजाएं।
- लड्डू गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान करें और धीरे-धीरे झूला झुलाते हुए जन्मोत्सव के गीत और भजन गा सकते हैं।
- अब आप कान्हा जी को माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं।
- भोग लगाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से आरती करें।
- आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करें।
सपने में भगवान श्रीकृष्ण का दिखना क्या मतलब
जन्माष्टमी के आसपास सपने में भगवान श्रीकृष्ण का दिखना विशेष घटना होती है, जिसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाता सकता है। इससे जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव, इच्छापूर्ति, मनमुताबिक कार्य और ईश्वर की विशेष कृपा से जोड़ कर देखा जाता है।
सपने में भगवान कृष्ण और राधा के दिखने का अर्थ
जब कभी सपने में भगवान कृष्ण के साथ-साथ राधारानी दिखाई दे तो इसे प्रेम, अपनापन, रिश्तों में मजबूती का संकेत माना जाता है। इससे व्यक्ति के जीवन में प्रेम, भावनात्मक संतुलन और सुखद बदलाव की तरफ इशारा तरफ कर सकता है। इससे सपने में दांपत्य जीवन में सुखद बदलाव आता है।
Janmashtami 2026: सपने में लड्डू गोपाल का दिखना
अगर सपने में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की छवि दिखाई दे इसे बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। इससे घर-परिवार में सुख, शांति, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि के संकेत माना जाता है। इसके अलावा सपने में बाल कृष्ण का दिखना आपकी इज्छाओं की पूर्ति का संकेत माना जाता है।
दही हांडी 2026 कब मनाई जाएगी?
दही हांडी जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है। वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है, इसलिए दही हांडी उत्सव 5 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात और देश के कई अन्य हिस्सों में इस दिन बड़े स्तर पर दही हांडी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गोविंदा की टीमें ऊंचाई पर लटकी मटकी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाती हैं और मटकी फोड़कर उत्सव मनाती हैं।
Dahi Handi 2026: भगवान कृष्ण से दही हांडी का क्या संबंध है?
दही हांडी को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं में कृष्ण को माखन और दही बेहद प्रिय बताया गया है। मान्यता है कि बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर घरों में रखे माखन को पाने की कोशिश करते थे। ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंचने के लिए बच्चों की टोली एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती थी। इसी बाल लीला की याद में दही हांडी उत्सव की परंपरा विकसित हुई मानी जाती है।
Laddu Gopal Bhog: लड्डू गोपाल को भोग में क्या चढ़ाएं?
- जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को धनिया पंजीरी का भोग लगाना विशेष माना जाता है।
- मान्यता है कि, श्रीकृष्ण को माखन बेहद प्रिय माना जाता है। इसलिए जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं।
- लड्डू गोपाल को दूध से बने पकवान भी अर्पित किए जा सकते हैं।
- पूजा में मौसमी फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई भी भगवान को अर्पित कर सकते हैं।
जन्माष्टमी पर चांद कब निकलेगा 2026 ?
- नई दिल्ली: रात 11:29 बजे
- मथुरा-वृंदावन: रात 11:30 बजे
- नोएडा: रात 11:28 बजे
- जयपुर: रात 11:40 बजे
- गुरुग्राम: रात 11:30 बजे
- चंडीगढ़: रात 11:24 बजे
- मुंबई: रात 12:12 बजे, 5 सितंबर
- अहमदाबाद: रात 12:04 बजे, 5 सितंबर
Janmashtami Muhurat 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर क्या है आज रात पूजा का शुभ मुहूर्त
आज रात निशिता काल पूजा का समय- रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 5 सितंबर 12 बजकर 43 मिनट तक।
मध्यरात्रि- 5 सितंबर की रात 12 बजकर 20 मिनट
चंद्रोदय का समय- रात 11 बजकर 29 मिनट पर
जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का समय
रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत- 4 सितंबर को 12 बजकर 29 मिनट तक।
रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति- 4 सितंबर को रात 11 बजकर 04 मिनट तक।
Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव
आज देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का यह पर्व पंचांग के अनुसार, 5253वां जन्मोत्सव है। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर द्वापर युग के समय बनने वाला योग फिर से बना है।
Janmashtami Puja Muhurat 2026: आज रात जन्माष्टमी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की तिथि आधी रात को 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है। जो 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर खत्म हो जाएगी। आज रात कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा के पूजन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कुल 45 मिनट रहेगा। ऐसे में इस अवधि के दौरान लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाएं।
Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण के उपदेश
इस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के दिए उपदेशों को अपनाएं, जिससे जीवन सुखी, सुंदर, शांत और सफल बन सके।
- कर्म को पूजा समझें, फल की चिंता छोड़ें
- रिश्तों में प्रेम, मर्यादा और संतुलन रखें
- संकट में धैर्य और विवेक बनाए रखें
- धर्म के लिए डटकर खड़े रहें
- भक्ति का सार है समर्पण और विश्वास
Krishna janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर कान्हा को अर्पित करें ये भोग
- - लड्डू गोपाल को माखन और मिश्री सबसे प्रिय होती है। ऐसे में आज के दिन कान्हा को ताजा माखन और मिश्री अप्रित करें।
- - कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को धनिया पंचीरी का भोग जरूर लगाएं।
- -दूध और मखाने की खीर
- - पंचामृत
- - फल और मेवे का भोग
Krishna janmashtami Wishes 2026: जन्माष्टमी के मौके पर अपनों को भेजें ये संदेश
हर कदम पर साथ हो मुरलीघर
हर पल में साथ हो गिविंद हर
आपके जीवन में बरसें खुशियां
रहे सदा कान्हा का सहारा
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना संदेश
Krishna janmashtami 2026: जन्माष्टमी पूजा विधि
- - आज रात 12 बजे के ठीक पहले एक खीरे के बीच से काटकर कान्हा का प्रतीक रूप रखें।
- - फिर ठीक 12 बजे घंटी और शंख बजाकर नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की,... बोलकर कान्हा का स्वागत करें।
- - इसके बाद कान्हा को एक तांबे या पीतल के परात में उन्हें विराजित करें और भोग, पूजा और आरती करें।
Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पूजा विधि
- - कान्हा को पंचामृत से स्नान कराएं फिर बाद में गंगाजल, शुद्ध जल से स्नान करवाएं।
- - कान्हा का अभिषेक करते समय लगातार ऊं नमो भगवते वासुदेवाय या फिर हरे कृष्णा मंत्र का जाप करें।
- - कान्हा का अभिषेक पूरा होने के बाद प्रतिमा को साफ और मुलायम कपड़े से पोंछे।
- - इसके बाद कान्हा को नया वस्त्र पहनाएं और माथे पर चंदन का तिलक लगाएं।
Krishna janmashtami 2026: वृंदावन के इस्कान मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम
वृंदावन के इस्कान मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। हजारो लोग कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर भक्ति और उत्साह में डूबे हैं।
Krishna janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर इन मंत्रों का करें जाप
- ऊं गोविंदाय नम:
- ऊं अनंताय नम:
- ऊं अच्युताय नम:
- ऊं माधवाय नम:
- ऊं आदित्याय नम:
- ऊं बलभद्रप्रियनुजाय नम:
- ऊं सच्चिदानंदविग्रहाय नम:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी
Janmashtami Puja Muhurat 2026: जन्माष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त
अब से कुछ घंटों बाद देश-विदेश में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। आइए जानते हैं क्या रहेगा पूजा शुभ मुहूर्त
आज रात निशिता काल पूजा का समय- रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 5 सितंबर 12 बजकर 43 मिनट तक।
मध्यरात्रि- 5 सितंबर की रात 12 बजकर 20 मिनट
चंद्रोदय का समय- रात 11 बजकर 29 मिनट पर
Janmashtami 202 Aarti Kunj Bihari : आरती कुंजबिहारी की..
श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Janmashtami Muhurat 2026: आज जन्माष्टमी पर बना द्वापर युग जैसा संयोग
आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार इस जन्माष्टमी पर वैसा ही दुर्लभ और सुंदर संयोग बन रहा है, जैसा द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के समय बना था। आज के दिन भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि में चंद्रमा के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का दुर्लभ संयोग है। इस संयोग में कान्हा की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होंगी और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होगी।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी शुभ संयोग में कैसे करें कान्हा की पूजा
रात 12 बजे जोकि निशिता काल का समय होता है उसमें बाल गोपाल को सबसे पहले पंचामृत से स्नान कराएं, फिर कान्हा जी को सुदंर वस्त्र पहनाएं, सिर पर मुकट, गले में वैजयंती माला, बांसुरी और मोरपंख से सजाएं, इसके बाद भोग में तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया की पंचीरी और पंचमेवा का भोग लगाएं, फिर मंत्रों का जाप, धूप-दीप दिखाकर बांके बिहारी की आरती करें।
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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर जरूर करें इन चीजों का दान
आज बड़े ही धूम-धाम और उत्साह के साथ देशभर में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर कुछ चीजों क दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी होता है।
- पीले कपड़े
- अन्न
- माखन-मिश्री
- फल
- पुस्तक और पेन
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर आज सैंड कलाकार सुदर्शन पटनायक ने रेत पर उकेरी बाल गोपाल की आकृति
Janmashtami 2026: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रौनक
मथुरा के मंदिरों में कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तों की भारी भीड़
Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण पूजा के 5 मंत्र
1- श्रीकृष्णाय नम:
2- ऊं उच्चुताय नम:
3- ऊं अनंताय नम:
4- ऊं माधवाय नम:
5- ऊं गोविंदाय नम:
Janmashtami 2026: देवकी नंदन कान्हा का कृष्ण नाम किसने दिया ?
कंस से देवकीनंदन के पुत्र कान्हा की पहचान छिपाने के लिए कान्हा का नाम आचार्य गर्गाचार्य ने दिया था।
Janmashtami 2026: कान्हा को भोग अर्पित करने में तुलसी दल जरूर रखें
भगवान कृष्ण को तुलसी बहुत ही प्रिय होती है। ऐसे में आज कान्हा के 5253वें जन्मोत्सव पर भोग में तुलसी के पत्तों को जरूर शामिल करें
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़
Janmashtami 2026: कृष्ण को बांसुरी किसने दी थी?
आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है, लेकिन क्या आपको पता है कृष्ण को बांसुरी किसने दी, श्री मद्भागवत के वेणुगीत के अनुसार नंद बाबा ने यमुना नदी किनारे बांस के पेड़ से बनी बांसुरी कृष्ण को दी थी।
Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण की सबसे प्रिय गाय के बारे में जानिए
भगवान कृष्ण की गायें बहुत ही प्रिय हैं। शास्त्रों में भगवान कृष्ण को कई गायों के प्रिय होने का वर्णन मिलता है।
- मंगला
-पिंगला
- गंगा
- पिशंगी
- मणिकस्तनी
- हंसी
- वंशीप्रिया
Janmashtami Puja Muhurat 2026: जन्माष्टमी पूजा का क्या रहेगा मुहू्र्त
आज देशभर में जन्माष्टमी मनाई जा रही है और अब से थोड़ी देर बाद कान्हा जन्म लेंगे। जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त निशीथ काल रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
पूजा की अवधि- 45 मिनट
Janmashtami 2026: आज जरूर जाप करें भगवान श्रीकृष्ण के बीज मंत्र
कान्हा के जन्मोत्सव पर मंदिरों में भारी भीड़ होती है। इस दिन भगवान कृष्ण के बीज मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। इसे भगवान प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्दि की आशीर्वाद देते हैं।
ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:
इसके अलावा इन मंत्रों का जाप जरूर करें।
1- श्रीकृष्णाय नम:
2-ऊं उच्चुताय नम:
3-ऊं अनंताय नम:
4-ऊं माधवाय नम:
5-ऊं गोविंदाय नम:
Janmashtami 2026: दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में जन्माष्टमी की पूजा
Janmashtami 2026: जानें कब शुरू होगी जन्माष्टमी रात की पूजा ?
आज रात जन्माष्टमी की पूजा रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू हो जाएगी जो देर रात 12 बजकर 43 मिनट तक चलेगी।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर उपाय
जन्माष्टमी के अवसर पर बाल गोपाल की विधि-विधान के साथ पूजा करने के बाद उनको दूध, माखन, मेवे और मिठाई जरूर अर्पित करें।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी के अवसर पर नोएडा के इस्कॉन मंदिर में कान्हा के जन्म की पूजा की तैयारियां
Janmashtami 2026: इंदौर के इस्कॉन मंदिर में कान्हा के जन्म की तैयारी
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर खीरे का नाल छेदन
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर खीरा के डंठल काटने की विधि को नाल छेदन कहा जाता है। कान्हा के जन्म समय डंठल को सिक्के से काटा जाता है। ऐसे में मान्यता है कि मां देवकी और बाल गोपाल की नाल काटते हैं। जैसे रात 12 बजता है नाल छेदन होता है।
Janmashtami 2026: कान्हा के जन्म का समय नजदीक, धार्मिक अनुष्ठान शुरू
Janmashtami 2026: कोलकाता के इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी का धार्मिक अनुष्ठान
Janmashtami 2026: मथुरा के मंदिर में कान्हा के जन्म का उत्सव
Janmashtami 2026: कान्हा का जन्म अभिषेक जारी
जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी...भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे जन्म हो चुका है। भगवान श्रीकृष्ण का यह 5253वां जन्मोत्सव है। देशभर के मंदिरों में भारी संख्या में लोग जन्माष्टमी पर भजन-कीर्तन करते हुए झूम रहे हैं। कृष्ण भक्त खुशी से झूम रहे हैं और लगातार आरती और भजन-कीर्तन कर रहे हैं।
Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा का प्राक्ट्य पर्व जारी
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर कान्हा जी के विग्रह का अभिषेक जारी है। भगवान श्रीकृष्ण का यह 5253वां जन्मोत्सव है। देशभर के मंदिरों में भारी संख्या में लोग जन्माष्टमी पर भजन-कीर्तन करते हुए झूम रहे हैं। कृष्ण भक्त खुशी से झूम रहे हैं और लगातार आरती और भजन-कीर्तन कर रहे हैं।
Janmashtami 2026: जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी...