हरतालिका तीज पर माता पार्वती को चढ़ाएं ये चीजें
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हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण के दौरान करें ये भजन
इन रंगों का प्रयोग न करें- हरतालिका तीज के व्रत में हरे और लाल रंग का विशेष महत्व है क्योंकि यह अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी काले और सफेद रंग के वस्त्र और आभूषण नहीं पहनें।
हरतालिका तीज के दिन दान-दक्षिणा करना शुभ माना जाता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा आप किसी भी सुहागन महिला, जो उम्र में आपसे बड़ी हों, उन्हें सुहाग का सामान दान करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें । ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और रिश्ते में मधुरता आती है।
आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है और इसी तिथि पर हर वर्ष हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुंदर वस्त्र-आभूषण पहन कर मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में सुहाग की सभी सामिग्री को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ाना चाहिए ।नैवेध में भगवान को घेवर, खीर पूरी,हलुआ और मालपुए से भोग लगाकर प्रसन्न करें।तत्पश्चात तीज माता की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए।
नथ सोलह श्रृंगार में शामिल जरूरी चीजों में से एक है, इसके अलावा हाथों की उंगलियों में पहने जाने वाली अंगूठी का भी विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज के पर्व पर हाथों में बिना मेंहदी की अधूरी समझी जाती है।
सोलह श्रृंगार और माता पार्वती की पूजा में चूड़ियों को अर्पित करने के विशेष महत्व होता है। वहीं सुहागिन महिलाओं के लिए गले में मंगलसूत्र उनके सुहाग की निशानी मानी जाती है। ऐसे में इन दोनों का होना बहुत ही जरूरी है। किसी भी पूजा में मंगलसूत्र को जरूर धारण करना चाहिए।
सुहागिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार में बिंदी का भी विशेष महत्व होता है। धर्मशास्त्रों में बताया गया है महिलाओं को अपने मस्तक के बीच में बिंदी जरूर लगना चाहिए। माना जाता है बिंदू लगाने से व्यक्ति की तीसरी आंख खुली रहती है।
सिंदूर : सिंदूर विवाहित महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं श्रंगार करते हुए अपनी मांग में सिंदूर जरूर भरें और पूजा में मां पार्वती को सिंदूर जरूर अर्पित करें क्योंकि सिंदूर माता पार्वती और सती का प्रतीक होती है।
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती और जीवन में सुख-सुविधा और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हरतालिका तीज पर प्रदोष काल में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसे में आज शाम को 06 बजकर 33 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 51 मिनट तक प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
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भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना और अखंड सौभाग्यवाती होने का वरदान पाने के लिए भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को निर्जला व्रत रखा जाता है। इसे हरतालिका तीज या फिर तीजा कहा जाता है। आज यानी 30 अगस्त 2022 को हरतालिका तीज पर शुभ योग हस्त नक्षत्र का शुभ संयोग बन हुआ है। शुभ योग 30 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 03 मिनट तक रहेगा और पूरे दिन हस्त नक्षत्र रहेगा। ऐसे में शुभ योग और नक्षत्र में हरतालिका पर्व और पूजा-पाठ मनाना बहुत ही फलदायी रहेगा।
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हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
हरतालिका तीज व्रत है प्यार का,
दिल में श्रद्धा और सच्चे विश्वास का,
बिछिया पैरों में हो माथे पर बिंदिया,
हर जन्म में मिले आपको शिव जी सा पिया
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
हरतालिका तीज का त्योहार है,
गुझियों की बहार है,
पेड़ों पर पड़े हैं झूले,
दिलो में सबके प्यार है…
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
हरतालिका तीज पर सुहाग की चीजों को विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज में मां पार्वती संग भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इसमें माता पार्वती को सुहाग की सभी चीजों का चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज में सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए शाम के समय शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए पूजा प्रारंभ करती हैं। इसमें मां पार्वती को सुहाग की सभी चीजें जैसे बिंदी, सिंदूर,बिछिया, चूड़ी, कंघी, कुमकुम, ओढ़नी,महावर और मेहंदी अर्पित करती हैं।
हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में से एक है। इसमें सुबह से बिना कुछ खाए व पिए दिनभर निर्जला व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि मां पार्वती ने कठोर तपस्या करते हुए भगवान शिव को पति रूप में पाया था। तभी से हर वर्ष यह हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महीलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए रखती हैं। इसमें व्रती सुहागिन महिलाएं सुहाग की सभी चीजों को मां पार्वती को अर्पित करती हैं।