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Hartalika Teej 2022 Live: जानें हरतालिका तीज व्रत के पारण का समय, विधि, मंत्र और उपाय

Tue, 30 Aug 2022 08:29 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

खास बातें

Hartalika Teej 2022 Vrat Katha, Aarti And Puja Vidhi In Hindi: आज अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त करने के लिए सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज व्रत रख रही हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज के त्योहार का विशेष महत्व है। इस तीज में महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। तीज की शाम के समय महिलाएं श्रृंगार करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा करती हैं। हरतालिका तीज व्रत रखने और पूजा करने से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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Hartalika teej 2022 - फोटो : अमर उजाला
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लाइव अपडेट

07:59 PM, 30-Aug-2022
कैसे करें हरतालिका तीज व्रत का पारण? - फोटो : iStock

कैसे करें हरतालिका तीज व्रत का पारण?
हरतालिका तीज व्रत के अगले दिन सूर्योदय से पूर्व जगे और स्नान के बाद गौरीशंकर की पूजा करें। इसके बाद प्रसाद में चढ़ाए मिष्ठान और जल से व्रत खोलें। इस बात का ध्यान रखें कि व्रत का पारण कभी भी नमकयुक्त या तले हुए भोजन से नहीं किया जाता है। 

07:50 PM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज व्रत के पारण का समय   - फोटो : istock

हरतालिका तीज व्रत के पारण का समय  
हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन ही किया जाता है। ऐसे में इस साल हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन सुबह यानी 31 अगस्त 2022 को किया जाएगा। 

07:28 PM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज पर माता पार्वती को चढ़ाएं ये चीजें - फोटो : self

हरतालिका तीज पर माता पार्वती को चढ़ाएं ये चीजें

आज के दिन सुहागिन महिलाएं को व्रत के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा के समय मां पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। मां पार्वती को सिंदूर, इत्र, लाल चुनरी, बिंदी, काजल, लिपिस्टिक, गले का हार, कंघी, शीशा, तेल, नाखून पेंट, चूड़ियां, मेहंदी, कानों के झुमके, नाक की लौंग, कमरबंद, बिछुए, पायल, महावर जैसी सुहाग की निशानी अर्पित करें। 

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07:02 PM, 30-Aug-2022
विवाह में हो रही है देरी, तो हरतालिका तीज पर करें पार्वती स्तोत्र का पाठ - फोटो : pixabay

विवाह में हो रही है देरी, तो हरतालिका तीज पर करें पार्वती स्तोत्र का पाठ

।।जानकीकृतं पार्वती स्तोत्र।।

जानकी उवाच

शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये।
सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते।।

सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी।
सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते।।

हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे।
पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते।।

सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते।
सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले।।

सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी।
सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये।।

परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि।
साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।

क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा।
एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते।।

लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय:।
एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।

दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे ।
सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते।।

शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि।
हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते।।

फलश्रुति

स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम्।
नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम्।।

इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम्।
दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम्।।

(श्री ब्रह्मवैवर्त पुराणे जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।)

06:23 PM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण के दौरान करें ये भजन   - फोटो : iStock

हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण के दौरान करें ये भजन  

1- भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे

 मैंने ढोलक मंगाई भोले के लिए
वो तो डमरू से प्यार कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे

 मैंने गाड़ी मंगाई भोले के लिए
वो तो नंदी से प्यार कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे

 मैंने माला मंगाई भोले के लिए
वो तो नागो से प्यार कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे

 मैंने भोजन मंगाया भोले के लिए
वो तो भंगिया से प्यार कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे

 मैंने गागर भराई भोले के लिए
वो तो गंगा  से प्यार कर बैठे
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे

2- शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ।
अंत काल को भवसागर में उसका बेडा पार हुआ॥

भोले शंकर की पूजा करो,
ध्यान चरणों में इसके धरो।
हर हर महादेव शिव शम्भू।
हर हर महादेव शिव शम्भू॥

नाम ऊँचा है सबसे महादेव का,
वंदना इसकी करते है सब देवता।
इसकी पूजा से वरदान पातें हैं सब,
शक्ति का दान पातें हैं सब।

नाथ असुर प्राणी सब पर ही भोले का उपकार हुआ।
अंत काल को भवसागर में उसका बेडा पार हुआ॥

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06:00 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर करें माता पार्वती की आरती

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता,
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता,
जय पार्वती माता।।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता,
जय पार्वती माता।।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा,
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा,
जय पार्वती माता।।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता,
जय पार्वती माता।।

शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा,
जय पार्वती माता।।

सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता,
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता,
जय पार्वती माता।।

देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता,
जय पार्वती माता।।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता,
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता,
जय पार्वती माता।।

05:40 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर करें ये उपाय

  • हरतालिका तीज की शाम को शिव-पार्वती के मंदिर में जाकर पूजा करें और शुद्ध घी के 11 दीपक जलाने से मनचाहा जीवनसाथी मिल सकता है। 
  • हरतालिका तीज के दिन कुंवारी ब्राह्मण कन्या को वस्त्र दान करें। 
  • हरतालिका तीज के दिन माता पार्वती को हल्दी की 11 गांठें चढ़ाने से लड़की के विवाह के योग बन सकते हैं। 
  • हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव-पार्वती का दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करने से पति-पत्नी के संबंध मधुर बने रहते हैं। 
  • हरतालिका तीज पर पूजा करने के बाद देवी पार्वती को खीर का भोग लगाने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं। 

05:20 PM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज पर मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का मंत्र

हरतालिका तीज पर मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का मंत्र

सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।

05:10 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर बनाएं मिट्टी के शिव-पार्वती

हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पार्थिव प्रतिमा बनाई जाती है। घर पर ही मिट्टी या बालू की भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा की जाती है। इसके साथ ही सोलह शृंगार की सामग्री मां पार्वती को अर्पण कर अखंड सुहाग की कामना करें। 

04:55 PM, 30-Aug-2022

सुख सौभाग्य के लिए हरतालिका तीज पर करें इस मंत्र का जाप

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।

04:40 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर करें माता पार्वती चालीसा का पाठ

दोहा
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि।
गणपति जननी पार्वती अम्बे! शक्ति! भवानि।

चौपाई
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे, पंच बदन नित तुमको ध्यावे।
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो, सहसबदन श्रम करत घनेरो।।
तेऊ पार न पावत माता, स्थित रक्षा लय हिय सजाता।
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे, अति कमनीय नयन कजरारे।।

ललित ललाट विलेपित केशर, कुंकुंम अक्षत् शोभा मनहर।
कनक बसन कंचुकि सजाए, कटी मेखला दिव्य लहराए।।
कंठ मंदार हार की शोभा, जाहि देखि सहजहि मन लोभा।
बालारुण अनंत छबि धारी, आभूषण की शोभा प्यारी।।

नाना रत्न जड़ित सिंहासन, तापर राजति हरि चतुरानन।
इन्द्रादिक परिवार पूजित, जग मृग नाग यक्ष रव कूजित।।
गिर कैलास निवासिनी जय जय, कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय।
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी, अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी।।

हैं महेश प्राणेश तुम्हारे, त्रिभुवन के जो नित रखवारे।
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब, सुकृत पुरातन उदित भए तब।।
बूढ़ा बैल सवारी जिनकी, महिमा का गावे कोउ तिनकी।
सदा श्मशान बिहारी शंकर, आभूषण हैं भुजंग भयंकर।।

कण्ठ हलाहल को छबि छायी, नीलकण्ठ की पदवी पायी।
देव मगन के हत अस किन्हो, विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो।।
ताकी, तुम पत्नी छवि धारिणी, दुरित विदारिणी मंगल कारिणी।
देखि परम सौंदर्य तिहारो, त्रिभुवन चकित बनावन हारो।।

भय भीता सो माता गंगा, लज्जा मय है सलिल तरंगा।
सौत समान शम्भू पहआयी, विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी।।
तेहि कों कमल बदन मुरझायो, लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो।
नित्यानंद करी बरदायिनी, अभय भक्त कर नित अनपायिनी।

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी, माहेश्वरी, हिमालय नन्दिनी।
काशी पुरी सदा मन भायी, सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी।।
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री, कृपा प्रमोद सनेह विधात्री।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे, वाचा सिद्ध करि अवलम्बे।।

गौरी उमा शंकरी काली, अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली।
सब जन की ईश्वरी भगवती, पतिप्राणा परमेश्वरी सती।।
तुमने कठिन तपस्या कीनी, नारद सों जब शिक्षा लीनी।
अन्न न नीर न वायु अहारा, अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा।।

पत्र घास को खाद्य न भायउ, उमा नाम तब तुमने पायउ।
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे, लगे डिगावन डिगी न हारे।।
तब तव जय जय जय उच्चारेउ, सप्तऋषि, निज गेह सिद्धारेउ।
सुर विधि विष्णु पास तब आए, वर देने के वचन सुनाए।।

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों, चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों।
एवमस्तु कही ते दोऊ गए, सुफल मनोरथ तुमने लए।।
करि विवाह शिव सों भामा, पुनः कहाई हर की बामा।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा, धन जन सुख देइहै तेहि ईसा।।

दोहा
कूटि चंद्रिका सुभग शिर, जयति जयति सुख खानि,
पार्वती निज भक्त हित, रहहु सदा वरदानि। 

04:20 PM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज पर फुलेरा का महत्व - फोटो : अमर उजाला

हरतालिका तीज पर फुलेरा का महत्व 

हरतालिका तीज के पूजन में भगवान शंकर के ऊपर फुलेरा बांधा जाता है। फुलेरा जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है फूलों से बनाया जाता है।  इसमें 5 ताजे फूलों की माला का होना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि फुलेरे में बांधी जाने वाली 5 फूलों की मालाएं भगवान भोलेनाथ की पांच पुत्रियों (जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली) का प्रतीक है।

03:59 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका व्रत की पूजा सामग्री

हरतालिका तीज की पूजा के लिए सबसे पहले भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी या बालू की मूर्ति, पीला वस्त्र, रोली, केले का पत्ता, सुपारी, बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, दूर्वा, कलश, अक्षत, घी, कपूर, गंगाजल, दही, शहद, जनेऊ, सोलह श्रृंगार का सामान, सिंदूर, बिंदिया, मेहंदी, कुमकुम आदि की आवश्यकता है।

03:50 PM, 30-Aug-2022

घर में सूतक हो तो कैसे करें हरतालिका व्रत 

हरतालिका तीज का व्रत ऐसा है कि इसे बीच में छोड़ा नहीं जा सकता। ऐसे में यदि घर में कभी सूतक लग जाता है तो भी व्रत करना अनिवार्य है। लेकिन इस दौरान पूजा घर में नहीं बल्कि मंदिर में करनी चाहिए। 

03:40 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर पूजन के दौरान करें इन मंत्रों का जाप

हरतालिका तीज के दिन श्री गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए। 
गणपति पूजन मंत्र: श्री गणेशाय नम:
पार्वती पूजन मंत्र: ऊँ गौर्ये नम: 
शिव पूजन मंत्र: ऊँ नम: शिवाय
 

03:25 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पूजा का प्रदोष काल मुहूर्त 

हरतालिका तीज में 2 पूजा मुहूर्त निकल रहे हैं। पहला सुबह का दूसरा शाम का। प्रातः काल हरतालिका पूजा मुहूर्त, सुबह 05:58 से सुबह 08:31 तक का था। यदि आप प्रातः काल के मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाएं हैं तो सायंकाल में सायं 06:33 से रात्रि 08:51 तक पूजा करते सकते हैं। यह प्रदोष काल है।

03:14 PM, 30-Aug-2022

अन्न-जल ग्रहण करना वर्जित

हरतालिका तीज का व्रत बेहद ही कठिन माना जाता है और इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं। इस व्रत में भोजन ही नहीं, बल्कि फल व पानी का भी सेवन नहीं किया जाता। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद होता है और तभी कुछ ग्रहण किया जाता है। 

02:58 PM, 30-Aug-2022

महिलाएं रखें इन बातों का विशेष ध्यान

यदि महिलाएं  हरतालिका तीज का व्रत कर रही हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इस व्रत में दिन व रात में सोना निषेध होता है। हरतालिका तीज के दिन रात भर जागकर भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन व भजन किया जाता है। 

02:39 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये काम

इन रंगों का प्रयोग न करें- हरतालिका तीज के व्रत में हरे और लाल रंग का विशेष महत्व है क्योंकि यह अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी काले और सफेद रंग के वस्त्र और आभूषण नहीं पहनें। 

02:20 PM, 30-Aug-2022

सुखी दांपत्य के लिए हरतालिका तीज पर करें दान

हरतालिका तीज के दिन दान-दक्षिणा करना शुभ माना जाता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा आप किसी भी सुहागन महिला, जो उम्र में आपसे बड़ी हों, उन्हें सुहाग का सामान दान करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें । ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और रिश्ते में मधुरता आती है।

01:45 PM, 30-Aug-2022

अखंड सौभाग्य पाने के लिए आज हरतालिका तीज के दिन क्या करें ?

आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है और इसी तिथि पर हर वर्ष हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुंदर वस्त्र-आभूषण पहन कर मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में सुहाग की सभी सामिग्री को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ाना चाहिए ।नैवेध में भगवान को घेवर, खीर पूरी,हलुआ और मालपुए से भोग लगाकर प्रसन्न करें।तत्पश्चात तीज माता की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए।

01:22 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर श्रृंगार- नथ, अंगूठी और मेहंदी का महत्व

नथ सोलह श्रृंगार में शामिल जरूरी चीजों में से एक है, इसके अलावा हाथों की उंगलियों में पहने जाने वाली अंगूठी का भी विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज के पर्व पर हाथों में बिना मेंहदी की अधूरी समझी जाती है।
 

01:02 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर श्रृंगार- चूड़ियों और मंगलसूत्र का महत्व

सोलह श्रृंगार और माता पार्वती की पूजा में चूड़ियों को अर्पित करने के विशेष महत्व होता है। वहीं सुहागिन महिलाओं के लिए गले में मंगलसूत्र उनके सुहाग की निशानी मानी जाती है। ऐसे में इन दोनों का होना बहुत ही जरूरी है। किसी भी पूजा में मंगलसूत्र को जरूर धारण करना चाहिए।
 

12:49 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर श्रृंगार-बिंदी का महत्व

सुहागिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार में बिंदी का भी विशेष महत्व होता है। धर्मशास्त्रों में बताया गया है महिलाओं को अपने मस्तक के बीच में बिंदी जरूर लगना चाहिए। माना जाता है बिंदू लगाने से व्यक्ति की तीसरी आंख खुली रहती है।

12:20 PM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार के लिए इन सभी चीजों का करें इस्तेमाल- सिंदूर

सिंदूर : सिंदूर विवाहित महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं श्रंगार करते हुए अपनी मांग में सिंदूर जरूर भरें और पूजा में मां पार्वती को सिंदूर जरूर अर्पित करें क्योंकि सिंदूर माता पार्वती और सती का प्रतीक होती है।

11:30 AM, 30-Aug-2022

जानें क्यों पड़ा हरतालिका तीज का नाम?

हिंदू धर्म में तीज के पर्व का विशेष महत्व होता है। तीज में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना की जाती है। उत्तर भारत में तीज के त्योहार को विशेष और भव्य रूप से मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। आज हरतालिका तीज पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर इस तीज को हरतालिका तीज नाम क्यों पड़ा।

हरतालिका तीज दो शब्दों से मिलकर बना है। हरित और तालिका। हरित का अर्थ होता है हरण करना और तालिका का मतलब सखी सहेली से है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर ही माता पार्वती की सखी सहेलियों ने उनके पिता के घर से हरण करके जंगल में भगवान शिव की उपासना करने के लिए लेकर गईं थीं। जहां पर माता पार्वती ने कठोर तप करते हुए भगवान शिव को पति के रूप में पाया था।

10:52 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज की पूजा के लिए उत्तम मुहूर्त

हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती और जीवन में सुख-सुविधा और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हरतालिका तीज पर प्रदोष काल में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसे में आज शाम को  06 बजकर 33 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 51 मिनट तक प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए।

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10:38 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर अवश्य ही करें पार्वती चालीसा

दोहा
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि।
गणपति जननी पार्वती अम्बे! शक्ति! भवानि।

चौपाई
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे, पंच बदन नित तुमको ध्यावे।
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो, सहसबदन श्रम करत घनेरो।।

तेऊ पार न पावत माता, स्थित रक्षा लय हिय सजाता।
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे, अति कमनीय नयन कजरारे।।

ललित ललाट विलेपित केशर, कुंकुंम अक्षत् शोभा मनहर।
कनक बसन कंचुकि सजाए, कटी मेखला दिव्य लहराए।।

कंठ मंदार हार की शोभा, जाहि देखि सहजहि मन लोभा।
बालारुण अनंत छबि धारी, आभूषण की शोभा प्यारी।।

नाना रत्न जड़ित सिंहासन, तापर राजति हरि चतुरानन।
इन्द्रादिक परिवार पूजित, जग मृग नाग यक्ष रव कूजित।।

गिर कैलास निवासिनी जय जय, कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय।
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी, अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी।।

हैं महेश प्राणेश तुम्हारे, त्रिभुवन के जो नित रखवारे।
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब, सुकृत पुरातन उदित भए तब।।

बूढ़ा बैल सवारी जिनकी, महिमा का गावे कोउ तिनकी।
सदा श्मशान बिहारी शंकर, आभूषण हैं भुजंग भयंकर।।

कण्ठ हलाहल को छबि छायी, नीलकण्ठ की पदवी पायी।
देव मगन के हत अस किन्हो, विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो।।

ताकी, तुम पत्नी छवि धारिणी, दुरित विदारिणी मंगल कारिणी।
देखि परम सौंदर्य तिहारो, त्रिभुवन चकित बनावन हारो।।

भय भीता सो माता गंगा, लज्जा मय है सलिल तरंगा।
सौत समान शम्भू पहआयी, विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी।।

तेहि कों कमल बदन मुरझायो, लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो।
नित्यानंद करी बरदायिनी, अभय भक्त कर नित अनपायिनी।

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी, माहेश्वरी, हिमालय नन्दिनी।
काशी पुरी सदा मन भायी, सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी।।

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री, कृपा प्रमोद सनेह विधात्री।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे, वाचा सिद्ध करि अवलम्बे।।

गौरी उमा शंकरी काली, अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली।
सब जन की ईश्वरी भगवती, पतिप्राणा परमेश्वरी सती।।

तुमने कठिन तपस्या कीनी, नारद सों जब शिक्षा लीनी।
अन्न न नीर न वायु अहारा, अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा।।

पत्र घास को खाद्य न भायउ, उमा नाम तब तुमने पायउ।
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे, लगे डिगावन डिगी न हारे।।

तब तव जय जय जय उच्चारेउ, सप्तऋषि, निज गेह सिद्धारेउ।
सुर विधि विष्णु पास तब आए, वर देने के वचन सुनाए।।

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों, चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों।
एवमस्तु कही ते दोऊ गए, सुफल मनोरथ तुमने लए।।

करि विवाह शिव सों भामा, पुनः कहाई हर की बामा।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा, धन जन सुख देइहै तेहि ईसा।।

दोहा
कूटि चंद्रिका सुभग शिर, जयति जयति सुख खानि,
पार्वती निज भक्त हित, रहहु सदा वरदानि।

10:15 AM, 30-Aug-2022

आज हरतालिका तीज पर बना शुभ योग

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना और अखंड सौभाग्यवाती होने का वरदान पाने के लिए भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को निर्जला व्रत रखा जाता है। इसे हरतालिका तीज या फिर तीजा कहा जाता है। आज यानी 30 अगस्त 2022 को हरतालिका तीज पर शुभ योग हस्त नक्षत्र का शुभ संयोग बन हुआ है। शुभ योग 30 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 03 मिनट तक रहेगा और पूरे दिन हस्त नक्षत्र रहेगा। ऐसे में शुभ योग और नक्षत्र में हरतालिका पर्व और पूजा-पाठ मनाना बहुत ही फलदायी रहेगा।

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09:35 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका पूजा शुभ मुहूर्त 2022

हरतालिका तीज जिसे उत्तर भारत में तीजा के नाम से जाना जाता है आज मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत बीते 29 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी है। जोकि 30 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। अगर हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो 30 अगस्त को सुबह 06 बजकर 05 मिनट से लेकर 08 बजकर 38 मिनट तक थी। शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज की पूजा प्रदोष काल में शुभ मानी जाती है। सूर्यास्त के बाद तीन मुहूर्त को प्रदोष काल कहा जाता है। 30 अगस्त को प्रदोष काल शाम के 06 बजकर 33 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
 

09:22 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती अपने कई जन्मों से भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर बाल अवस्था में अधोमुखी होकर तपस्या की थी। माता पार्वती ने इस तप में अन्न और जल का भी सेवन नही किया था। वह सिर्फ सूखे पत्ते चबाकर ही तप किया करती थी।माता पार्वती को इस अवस्था में देखकर उनके माता पिता बहुत दुखी रहते थे। एक दिन देवऋषि नारद भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह के लिए प्रस्ताव लेकर उनके पिता के पास गए। पार्वती जी के पिता ने तुरंत ही इस प्रस्ताव के लिए हां कर दी। जब माता पार्वती को उनके पिता ने उनके विवाह के बारे में बताया तो वह काफी दुखी हो गई।उनकी एक सखी से माता पार्वती का यह दुख देखा नहीं गया और उन्होंने उनकी माता से इस विषय में पूछा। जिस पर उनकी माता ने उस सखी को बताया कि पार्वती जी शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही हैं। लेकिन उनके पिता चाहते की पार्वती का विवाह विष्णु जी से हो जाए। इस पर उनकी उस सहेली ने माता पार्वती को वन में जाने कि सलाह दी।जिसके बाद माता पार्वती ने ऐसा ही किया और वो एक गुफा में जाकर भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गई थी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का बनाया और शिव जी की स्तुति करने लगी। इतनी कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।

08:54 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज पर आज जरूर करें इन मंत्रों का जाप

देवी मंत्र- ऊँ गौर्ये नम: और गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला। सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।
शिव मंत्र- ऊँ नम: शिवाय
गणेश जी के मंत्र- श्री गणेशाय नम:
 

08:42 AM, 30-Aug-2022
हरतालिका तीज - फोटो : amar ujala

क्यों लगाई जाती है हरतालिका तीज पर मेहंदी?

तीज का त्योहार प्यार,समर्पण, भक्ति और उल्लास का पर्व होता है। तीज के त्योहार में विशेष रूप से श्रृंगार करने का महत्व है। इसमें सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा उपासना करती हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज पर मेहंदी के बिना अधूरा माना जाता है। हरतालिका तीज समेत अन्य तीज पर्व पर हाथों में मेहंदी जरूर रचाई जाती है। मेहंदी का गहरा लाल रंग पति के प्रेम को दर्शाता है। तीज पर्व पर मेहंदी लगाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती ने मन में भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और उन्हें प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए हाथों में मेहंदी लगाई थी जिसे देखकर भगवान अत्यंत प्रसन्न हुए थे और मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

08:18 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज व्रत करने के नियम 

हरतालिका तीज का व्रत पूरे दिन निर्जला रखते हुए किया जाता है। ऐसे में जो सुहागिन महिलाएं इस तीज का व्रत और पूजा पहली बार करने जा रही हैं उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि वे किसी भी परिस्थिति में व्रत को बीच में न छोड़े। जिन महिलाओं को इस बीच पीरियड से गुजरना पड़ रहा है वे भगवान की मूर्ति और पूजा सामग्रियों को न छुएं और दूर रहते हुए कथा आदि सुनें। पूजा के बाद रात्रि का जागरण करते हुए मंत्रों और कथा का पाठ करते रहना चाहिए।

08:03 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका पूजा विधि

- हरतालिका तीज के लिए सबसे पहले भगवान शिव, माता पार्वती,भगवान गणेश, पुत्र कार्तिकेय और नंदी की बालू और काली मिट्टी का इस्तेमाल करते हुए अपने हाथों से प्रतिमा बनाएं।
- इसके बाद पूजा का संकल्प लेते हुए पूजा स्थल की साफ सफाई करके वहां पर चौकी रखें और चौकी को माला फूल और केले के पत्ते से सजावट करते हुए बनाई गई शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें।
- हरतालिका व्रत का पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद का समय प्रदोष काल जाता है।
- इसके बाद सभी देवताओं का आवहन करते हुए सबसे पहले भगवान गणेश की आराधना करते हुए भगवान शिव,माता पार्वती और भगवान गणेश व कार्तिकेय का षोडोशओपचार पूजन करें।
- भगवान शिव को अर्पित करने के लिए एकत्रित सभी पूजा सामग्रियों का एक के बाद एक उन्हें अर्पित करें फिर माता पार्वती को सुहाग की सभी चीजों को माता पार्वती को चढ़ाएं।
- पूजन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और बाद में सभी महिलाएं मिलकर हरतालिका तीज व्रत की कथा सुने और रात्रि में जागरण करें।

07:24 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

तीज का त्योहार आपकी जीवन में खुशियां लेकर आए,
जीवनसाथी और बच्चों के लिए सेहत का वरदान लाए
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

हरतालिका तीज व्रत है प्यार का,
दिल में श्रद्धा और सच्चे विश्वास का,
बिछिया पैरों में हो माथे पर बिंदिया,
हर जन्म में मिले आपको शिव जी सा पिया
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

हरतालिका तीज का त्योहार है,
गुझियों की बहार है,
पेड़ों पर पड़े हैं झूले,
दिलो में सबके प्यार है…
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

07:16 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका पूजा थाली की जरूरी सामग्री 

तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। हरतालिका तीज का त्योहार भी इसी में एक है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस साल हरतालिका तीज व्रत आज यानी 30 अगस्त 2022 को है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती संग उनके परिवार के सभी गणों की पूजा करती हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से बहुत लाभ मिलता है। हरतालिका तीज में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्रियों का होना बहुत ही जरूरी होता है। भगवान शिव की पूजा उपासना के लिए हरतालिका पर्व पर उन्हें बेलपत्र, शमी,धतूरे का फल, घी, शहद, गुलाल, चंदन, मंजरी, कलावा, इत्र, पांच फल, सुपारी, अक्षत, धूप, दीप, कपूर, गंगाजल, दूर्वा और जनेऊ आदि अर्पित किया जाता है वहीं माता पार्वती के लिए श्रृंगार की चीजों को चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। जिसमें सुहाग की सामग्री में बिंदी, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, बिछिया, काजल, चूड़ी, कंघी, महावर आदि को शामिल किया जाता है।
 

07:04 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका व्रत में सुहाग सामग्री का महत्व

हरतालिका तीज पर सुहाग की चीजों को विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज में मां पार्वती संग भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इसमें माता पार्वती को सुहाग की सभी चीजों का चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। हरतालिका तीज में सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए शाम के समय शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए पूजा प्रारंभ करती हैं। इसमें मां पार्वती को सुहाग की सभी चीजें जैसे बिंदी, सिंदूर,बिछिया, चूड़ी, कंघी, कुमकुम, ओढ़नी,महावर और मेहंदी अर्पित करती हैं।

06:57 AM, 30-Aug-2022

हरतालिका तीज व्रत का महत्व

हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में से एक है। इसमें सुबह से बिना कुछ खाए व पिए दिनभर निर्जला व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि मां पार्वती ने कठोर तपस्या करते हुए भगवान शिव को पति रूप में पाया था। तभी से हर वर्ष यह हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महीलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए रखती हैं। इसमें व्रती सुहागिन महिलाएं सुहाग की सभी चीजों को मां पार्वती को अर्पित करती हैं।  
 

06:15 AM, 30-Aug-2022

Hartalika Teej 2022 Live: Hartalika Teej 2022 Live: जानें हरतालिका तीज व्रत के पारण का समय, विधि, मंत्र और उपाय

 Hartalika Teej 2022 Vrat Katha, Aarti, Mantra And Parana Vidhi In Hindi: आज विशेष रूप से उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अखंड सौभाग्य का त्योहार हरतालिका तीज मनाया जाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसे भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए दिन भर बिना कुछ खाए व पीए व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती,भगवान गणेश और कार्तिकेय भगवान की पूजा करते हुए महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना करते हुए व्रत रखती है। हरतालिका तीज वर्ष में आने वाले सभी तीनों तीज के त्योहार में सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

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