हनुमान जयंती तिथि : Hanuman Jayanti Date
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 को प्रात: 03 बजकर 20 मिनट पर होगा। साथ ही अगले दिन 13 अप्रैल 2025 को सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर इसका अंत होगा। इसलिए हनुमान जयंती 2025 में 12 अप्रैल को मनाया जाएगा।
हनुमान जयंती शुभ मुहूर्त : Hanuman Jayanti Shubh Muhurat
इस बार हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला मुहूर्त 12 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 34 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 46 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।
हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व: Importance Of Hanuman Janmotsav
हनुमान जन्मोत्सव पर करें ये उपाय: Hanuman Jayanti Par Karein Ye Upay
बजरंगबली को केला अत्यंत प्रिय फल है और यह सदैव उनके भोग में शामिल किया जाता है। हनुमान जन्मोत्सव के दिन 11 केले लें और हर एक में एक लौंग लगा दें। इसके बाद इन फलों को हनुमानजी को समर्पित करें और फिर प्रसाद स्वरूप बच्चों में बांट दें। ऐसा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं
- ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट
- ॐ नमो भगवते हनुमते नमः
- ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय। सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा
- ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते, हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये। नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
हनुमान जी क्यों कहलाते हैं अष्ट सिद्धि के दाता?: Hanuman Jayanti Asht Siddhi Data
हनुमान जयंती पर हम श्रीराम के परम भक्त और अष्ट सिद्धियों के स्वामी हनुमान जी की महिमा को याद करते हैं। उन्हें माता जानकी से अष्ट सिद्धियां और नव निधियां प्राप्त थीं, जिनकी शक्ति से उन्होंने असंभव कार्यों को संभव किया।
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अणिमा: सूक्ष्म रूप धारण कर कहीं भी पहुंचने की क्षमता।
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महिमा: अपना रूप विशाल करने की शक्ति।
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गरिमा: भारी रूप धारण करने की क्षमता।
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लघिमा: शरीर को हल्का कर गति बढ़ाने की शक्ति।
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प्राप्ति: किसी भी वस्तु, जानकारी या स्थान की त्वरित प्राप्ति।
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प्राकाम्य: जल, आकाश या पाताल में विचरण करने की क्षमता।
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ईशित्व: नेतृत्व, नियंत्रण और पुनर्जीवन की शक्ति।
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वशित्व: मन और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण।
हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है मंगलवार और शनिवार को ?
हनुमान जी की पूजा मंगलवार को उनके जन्म और मंगल ग्रह से संबंधित होने के कारण शक्ति और साहस के लिए की जाती है, जबकि शनिवार को शनि दोष निवारण और शांति के लिए की जाती है, क्योंकि हनुमान जी शनि के भक्त माने जाते हैं।
Hanuman Jayanti 2025: क्या हैं हनुमान जी की नव निधियां
हनुमान जी को अष्ट सिद्धियों के साथ नव निधियों का भी दाता माना जाता है। ये नव निधियां- पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुक्ता, कुंद, नील और खर्व धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक हैं। इन निधियों में जल, पृथ्वी, आकाश और चेतना के तत्व समाहित हैं, जिन्हें हनुमान जी अपने भक्तों के लिए उपयोग करते हैं।
हनुमान जयंती पर महिलाएं पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें
- हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे, इसलिए महिलाओं को उनके सामने सिर नहीं झुकाना चाहिए।
- हनुमान जी की प्रतिमा पर महिलाओं को जल या वस्त्र अर्पित नहीं करना चाहिए।
- हनुमान जी की पूजा में महिलाओं को सिंदूर अर्पित नहीं करना चाहिए।
- महिलाओं को हनुमान जी के चरण नहीं छूने चाहिए।
- हनुमान जी को कोई भी वस्तु अर्पित करते समय उसे उनके सामने रखना चाहिए।
Hanuman Janmotsav 2025 Wishes
- फोटो : अमर उजाला
बजरंग जिनका नाम है,
सत्संग जिनका काम है,
ऐसे अंजनिपुत्र को मेरा बारम्बार प्रणाम है
हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं।
हनुमान तुम बिन राम हैं अधूरे,
करते तुम भक्तों के सपने पूरे
मां अंजनि के तुम हो राजदुलारे
राम-सीता को लगते सबसे प्यारे।
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू को डरना
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
मंगल को जन्मे,
मंगल ही करते,
पवनपुत्र हनुमान।
हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को दी हनुमान जयंती की शुभकामनाएं
हनुमान जन्मोत्सव के दिन करें ये 3 कार्य
- राम नाम चढ़ाएं: पीपल के पत्ते पर चमेली तेल और सिंदूर से 'राम' नाम लिखकर हनुमान जी को चढ़ाएं।
- आटे का दीपक जलाएं: बजरंगबली के सामने आटे का दीपक जलाएं, इससे कर्ज से मुक्ति मिल सकती है।
- पान का बीड़ा अर्पित करें: मंदिर में पूजा के बाद हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करें, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान जन्मोत्सव पर इन चीजों की करें खरीदारी
वानर की प्रतिमा
घर के लिए वानर की प्रतिमा खरीदें, जो हनुमान जी की वानर सेना की याद दिलाती है और शुभ प्रभाव डालती है।
तांबे का छोटा फरसा
तांबे का फरसा घर लाकर वास्तु दोष दूर करें। इसकी आकृति त्रिशूल जैसी होती है।
हनुमान जी की गदा
हनुमान जी का प्रिय अस्त्र गदा खरीदें और मंदिर में रखें, जिससे उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है।
हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने के लाभ
हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से भूत-पिशाच, शनि दोष, ग्रह बाधाएं, रोग-शोक, कोर्ट-कचहरी के विवाद, दुर्घटना और कर्ज की समस्याएं दूर होती हैं। इसे मंगलवार और शनिवार को चढ़ाना शुभ माना जाता है।
Hanuman jayanti 2025 Date: हनुमान जी के इन नामों का करें जाप
हनुमान जयंती पर मंगलवार को हनुमान जी के 12 प्रमुख नामों का जाप अत्यंत लाभकारी होता है। ये नाम हैं:
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हनुमान
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अंजनीसुत
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वायुपुत्र
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महाबल
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रामेष्ट
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फाल्गुनसखा
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पिंगाक्ष
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अमितविक्रम
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उदधिक्रमण
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सीताशोकविनाशन
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लक्ष्मण प्राणदाता
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दशग्रीवदर्पहा
Hanuman Jayanti 2025: हनुमान जी अपने पास क्यों रखते हैं गदा?
हनुमान जी को गदा कुबेर देव से प्राप्त हुई थी, जिन्होंने उन्हें यह आशीर्वाद दिया कि वे कभी भी युद्ध में परास्त नहीं होंगे। गदा से ही हनुमान जी दुष्टों का संहार करते हैं और भक्तों की समस्याओं का समाधान करते हैं।
Hanuman Jayanti 2025: कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म?
धार्मिक कथा के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। जब भगवान श्रीराम के रूप में विष्णु ने अवतार लिया, तो शिव जी ने उनकी मदद के लिए हनुमान जी का जन्म लिया। माता अंजना और राजा केसरी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें एक ऐसा पुत्र मांगा, जो बल में रुद्र, गति में वायु और बुद्धि में गणपति जैसा हो। शिव जी ने अपनी रौद्र शक्ति पवन देव के रूप में अर्पित की, जो बाद में अंजना के गर्भ में प्रविष्ट हुई, और हनुमान जी का जन्म हुआ।
Hanuman Jayanti 2025 Chalisa Paath: हनुमान जन्मोत्सव पर करें हनुमान चालीसा का पाठ
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज,निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु ,जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
हनुमान चालीसा का पाठ करने में कहीं आप भी नहीं करते हैं ऐसी गलतियां? जानें पढ़ने का सही तरीका और फायदे
Hanuman Jayanti 2025 Bhog: हनुमान जी का भोग
हनुमान जी को बूंदी के लड्डू बहुत प्रिय हैं। इसके अलावा, उन्हें गुड़-चना, इमरती, जलेबी, लड्डू, पान का बीड़ा, खीर और फल भी अर्पित किया जा सकता है।
Hanuman Jayanti 2025 Pujan Samagri: हनुमान जयंती 2025 पूजन सामग्री:
- हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र
- लाल वस्त्र और लंगोट
- लाल फूल और माला
- अक्षत (धुले चावल)
- चंदन, धूप और दीपक (गाय के घी से)
- चमेली का तेल
- पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची
- सिंदूर
- हनुमान जी का ध्वज
- जनेऊ
- चरण पादुका
- हनुमान चालीसा
- शंख और घंटी
- नैवेद्य (बूंदी के लड्डू या मिठाई)
Hanuman Jayanti Bhadra 2025: हनुमान जयंती पर भद्रा का समय
भद्रा आरंभ- सुबह 06 बजकर 22 मिनट पर
भद्रा समाप्त- शाम 04 बजकर 35 मिनट पर
Hanuman Janmotsav 2025 Shubh Muhurat: हनुमान जन्मोत्सव पूजा का शुभ मुहूर्त
शुभ – उत्तम: सुबह 07:35 से 09:10 तक
लाभ – उन्नति: दोपहर 01:58 से 03:34 तक
अमृत – सर्वोत्तम: दोपहर 03:34 से शाम 05:09 तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से 05:14 तक
Hanuman Jayanti 2025 Panchgrahi Yog: हनुमान जयंती पर बन रहा है पंचग्रही योग
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार हनुमान जयंती पर पंचग्रही योग बन रहा है, जिसमें सूर्य, शनि, शुक्र, बुध और राहु मीन राशि में हस्त नक्षत्र में एक साथ होंगे। यह योग सालों बाद बन रहा है।
Hanuman Jayanti Puja Vidhi : हनुमान जयंती पूजा विधि
- हनुमान जयंती पर पूजा विधि विशेष रूप से महत्व रखती है। सबसे पहले, हनुमान जी की मूर्ति को गंगाजल, दूध, दही, शहद और चंदन से स्नान कराएं, ताकि उनकी शुद्धि हो सके।
- इसके बाद, हनुमान जी को लाल कपड़े पहनाएं और उन्हें सजाएं।
- अब उन्हें एक पवित्र आसन पर स्थापित करें और उनके सामने दीपक जलाएं, ताकि पूजा स्थल का वातावरण दिव्य बने।
- इसके बाद, हनुमान जी के मंत्रों, हनुमान चालीसा और उनके नामों का जाप करें। उन्हें माथे पर सिंदूर चढ़ाएं, क्योंकि यह उन्हें प्रिय है, और उन्हें फूलों की माला अर्पित करें।
- अब, हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, खीर या अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं।
- इस दिन रामचरितमानस और बजरंग बाण का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अंत में, हनुमान जी की आरती उतारें और प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।
- विशेष ध्यान रखें कि हनुमान जी के साथ राम और सीता की पूजा भी इस दिन अवश्य करें, ताकि पूजा पूर्ण रूप से संपन्न हो।
Hanuman Chalisa Paath: हनुमान चालीसा के पाठ से फायदे
- हनुमान चालीसा से भय और मानसिक अशांति का नाश होता है।
- आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- हनुमान चालीसा से जीवन में आने वाली विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
- रोज़ाना हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
- हनुमान चालीसा का पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने में भी हनुमान चालीसा सहायक है।
Hanuman Ji Ki Aarti हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
Hanuman Jayanti 2025: रोग मुक्ति के लिए आज करें ये उपाय
गंगा जल से स्नान करें, बजरंगबली को चमेली का तेल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। रोगों से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए हनुमान जी से प्रार्थना करें।
Hanuman Jayanti Hanuman Ashtak Path: हनुमान अष्टक पाठ
॥ हनुमानाष्टक ॥
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ ॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ॥
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ॥
रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ॥
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ॥
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो ॥ ॥
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,य जय जय कपि सूर ॥
Hanuman Lucky Leaves : हनुमान जी को प्रिय पत्ते
हनुमान जी को हमेशा ये पत्ते अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र से वीरता, तुलसी दल से भक्ति में स्थिरता, आक के पत्ते से शत्रु बाधा दूर होती है। पीपल के पत्ते शनि दोष और मानसिक तनाव में राहत देते हैं।
Hanuman Jayanti 2025 Favourite Flowers: हनुमान जयंती के प्रिय फूल
गेंदा – शक्ति और आरोग्य का प्रतीक
गुड़हल – आत्मविश्वास और विजय दिलाने वाला
लाल गुलाब – भक्ति और एकाग्रता में सहायक
कनेर – समर्पण, दीर्घायु और बाधाओं से रक्षा करने वाला
Hanuman Jayanti 2025: बजरंग बाण का करें पाठ
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमन्त सन्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलम्ब न कीजै।आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा।सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका।मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा।सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिन्धु महं बोरा।अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा।लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई।जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी।कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।आतुर होइ दु:ख करहुं निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुख सागर।सुर समूह समरथ भटनागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।महाराज प्रभु दास उबारो॥
ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो।बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा।ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
सत्य होउ हरि शपथ पायके।रामदूत धरु मारु धाय के॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा।दु:ख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा।नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं।तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥
पाय परौं कर जोरि मनावों।यह अवसर अब केहि गोहरावों॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता।शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥
बदन कराल काल कुल घालक।राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर।अग्नि बैताल काल मारीमर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।राखु नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो।ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा।सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा॥
चरण शरण करि जोरि मनावों।यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई।पांय परौं कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता।ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल।ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो।सुमिरत होय आनन्द हमारो॥
यहि बजरंग बाण जेहि मारो।ताहि कहो फिर कौन उबारो॥
पाठ करै बजरंग बाण की।हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै।तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥
धूप देय अरु जपै हमेशा।ताके तन नहिं रहे कलेशा॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
Hanuman Jayanti 2025: हनुमान जयंती दो बार क्यों मनाई जाती है?
हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है क्योंकि इससे जुड़ी दो धार्मिक घटनाएं हैं। पहली बार चैत्र पूर्णिमा को इसे भगवान हनुमान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। दूसरी बार कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को यह पर्व उनके अमरत्व प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। दोनों ही अवसर भक्तों के लिए पवित्र माने जाते हैं, और श्रद्धालु इन दिनों व्रत, पूजा और भक्ति के माध्यम से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
घर पर करें हनुमान जी की पूजा इस आसान विधि से
- हनुमान जन्मोत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और लाल या नारंगी कपड़ा बिछाएं।
- उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, साथ में भगवान राम और माता सीता की तस्वीर भी रखें।
- सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर रखें, साथ ही लाल फूल, माला, जनेऊ, दीपक, धूप, कपूर, नारियल, गुड़-चना, लड्डू, केला, पंचामृत और तुलसी पत्ते रखें।
- गंगाजल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें और मन में अपनी मनोकामना दोहराएं।
- सबसे पहले भगवान राम और माता सीता की पूजा करें, फिर हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
- सिंदूर और चमेली के तेल से हनुमान जी को चोला चढ़ाएं, नए वस्त्र और जनेऊ पहनाएं।
- लाल फूल और माला अर्पित करें, फिर गुड़-चना, लड्डू, फल और पंचामृत का भोग लगाएं।
- दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हनुमान जयंती के अवसर पर प्राचीन हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हनुमान जयंती पर अष्टधातु हनुमान मूर्ति की पूजा की।
Hanuman Jayanti 2025 Bhajan: हनुमान जयंती पर सुनें ये भजन
दुनिया चले ना श्री राम के बिना
दुनिया चले ना श्री राम के बिना, राम जी चले ना हनुमान के बिना ।
जब से रामायण पढ़ ली है, एक बात मैंने समझ ली है,
रावण मरे ना श्री राम के बिना, लंका जले ना हनुमान के बिना ॥
लक्ष्मण का बचना मुश्किल था, कौन बूटी लाने के काबिल था,
लक्ष्मण बचे ना श्री राम के बिना, बूटी मिले ना हनुमान के बिना ॥
सीता हरण की कहानी सुनो, ‘बनवारी’ मेरी जुबानी सुनो,
वापिस मिले ना श्री राम के बिना, पता चले ना हनुमान के बिना ॥
बैठे सिंघासन पे श्री राम जी, चरणों में बैठे हैं हनुमान जी,
मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना, भक्ति मिले ना हनुमान के बिना ॥
हे दुःख भंजन मारुति नंदन
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविधाता।
सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उद्धार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार॥
अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी ।
भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे, कर दुखों से पार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
जपूं निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा ।
रामभक्त मोहे शरण मे लीजे, भाव सागर से तार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
कीजो केसरी के लाल
कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम,
मैं राम संग जपता तुम्हारा सदा नाम,
अपने राम जी से कह देना जय सिया राम
दीन हीन के सहारे महावीर तुम हो,
अपने भक्तो की जगाते तकदीर तुम हो,
हर दुखिया का हाथ तुम लेते हो थाम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम
महाबली महायोद्धा महासंत तुम हो,
लाते सूखे हुए बागो में बसंत में तुम हो,
तेरी भक्ति से आत्मा को मिलता आराम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम
पूरी सदा ही हमारी हर आस करना,
बाबा भक्तो को कभी ना निराश करना,
दोनों चरण तुम्हारे हैं ‘लख्खा’ के सुखदाम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम
Hanuman Jayanti 2025 Paran Time: हनुमान जयंती व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
हनुमान जयंती पर यदि आपने व्रत रखा है तो अगले दिन यानी 13 अप्रैल 2025 को इसका पारण किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 58 मिनट के बाद पूजा अर्चना करके व्रत का समापन करें।
Hanuman Jayanti Vrat Paran Niyam: हनुमान जयंती व्रत पारण नियम
- सुबह स्नान कर हनुमान जी का ध्यान करें।
- मंदिर जाकर चोला व सिंदूर अर्पित करें।
- पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें, 5 दीपक जलाएं।
- आरती करें, हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करें।
- ॐ हनुमंते नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
- अंत में ज़रूरतमंदों को भोजन या दान दें।