घटस्थापना शुभ मुहूर्त
1. कलश स्थापना का पहला मुहूर्त
प्रातः 6:15 मिनट से प्रातः 7:22 मिनट तक।
2. नवरात्रि के घटस्थापना के लिए दूसरा शुभ मुहूर्त
प्रातः 11:46 से दोपहर 12:33 मिनट के बीच घटस्थापना कर सकते हैं।
कलश स्थापना
मिट्टी, मिट्टी का घड़ा, मिट्टी का ढक्कन, कलावा, जटा वाला नारियल, जल, गंगाजल, लाल रंग का कपड़ा, एक मिट्टी का दीपक, मौली, थोड़ा सा अक्षत, हल्दी।
कलश स्थापना विधि
- पूजा से पहले कलश स्थापना का विधान है।
- आप सबसे पहले एक मिट्टी के पात्र को लेकर उसमें थोड़ी सी मिट्टी डाल दें।
- फिर इस पात्र में जौ के बीज डालकर उसे मिलाएं।
- इसके बाद मिट्टी के पात्र पर पानी से छिड़काव करें।
- अब आप एक तांबे का लोटा लेकर उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
- उसके ऊपरी हिस्से में मौली बांधकर साफ जल भरें।
- इस जल में दूब, अक्षत, सुपारी और कुछ पैसे रख दें।
- अशोक की पत्तियां कलश के ऊपर रख दें।
- अब पानी के एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर मौली बांध दें।
- इस नारियल को कलश के बीच में रख दें, और बाद में इसे पात्र के मध्य में स्थापित कर दें।
दिल्ली: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन छतरपुर के श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर में सुबह की आरती की जा रही है।
वाराणसी, यूपी: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन भक्तों ने अष्टभुजा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की
पूजन विधि
- नवरात्रि की पूजा से पहले विधि-विधान से घट स्थापना करें।
- वहीं नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री माता की पूजा की जाती है।
- आप पूजा करने के लिए सबसे पहले अग्यारी करें और उसपर लौंग का जोड़ा रखें
- अब देवी के समक्ष ज्योति जलाएं।
- फिर कुछ मौसमी फल और बताशे प्रसाद के रूप में रखें।
- अब कुमकुम, हल्दी, सफेद चंदन, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें।
- इसके अलावा आप पान, सुपारी, लौंग, नारियल 16 श्रृंगार का सामान चढ़ा सकते हैं।
- नवरात्रि के पहले दिन देवी को सफेद रंग का पुष्प अर्पित करें।
- फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- अब मां शैलपुत्री के बीज मंत्रों का जाप करें और आरती करना शुरू करें।
- अंत में माता की आरती करते हुए गलतियों की माफी मांगे।
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मां दुर्गा की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर, आसन के लिए लाल रंग का कपड़ा, फूल, फूल माला, आम के पत्ते, बंदनवार, पान, सुपारी, लौंग और बताशे। इसक अलावा हल्दी की गांठ, थोड़ी पीसी हुई हल्दी, मौली, रोली, कमलगट्टा, शहद, शक्कर, पंचमेवा, गंगाजल, नैवेध, जावित्री, नारियल जटा वाला और सूखा नारियल भी रख लें। आप नवग्रह पूजन के लिए सभी रंग या फिर चावलों को रंग लें, दूध, वस्त्र, दही, पूजा की थाली, दीपक, घी, अगरबत्ती को भी शामिल करें।
मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार की लिस्ट
लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, काजल, मेहंदी, महावर, शीशा, बिछिया, इत्र, चोटी, गले के लिए माला या मंगलसूत्र, पायल, नेल पेंट, लिपस्टिक, रबर बैंड, नथ, गजरा, मांग टीका, कान की बाली, कंघी, शीशा आदि।
अखंड ज्योति के लिए सामग्री
पीतल या मिट्टी का साफ दीया, रुई की बत्ती, रोली या सिंदूर, चावल।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का महत्व
अखंड ज्योति का जलाना नवरात्रि के दौरान विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह ज्योत भक्तों की विशेष इच्छाओं की पूर्ति के लिए जलायी जाती है। अगर कोई व्यक्ति 9 दिनों तक लगातार दीपक जलाए रखता है, तो इसे अखंड ज्योति कहा जाता है। माना जाता है कि इस तरह से जलने वाली ज्योत से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
अखंड ज्योति जलाने का नियम
- अखंड ज्योति को प्रतिपदा तिथि से लेकर दशमी तिथि तक लगातार जलाना चाहिए। यह नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूरे 9 दिनों तक यह दीपक जलता रहता है, जिससे देवी दुर्गा की कृपा बनी रहती है।
- दीपक में शुद्ध तेल (घी या सरसों का तेल) का उपयोग करें और इसे चावल, जौ या गेहूं के ऊपर रखें। यह सामग्री शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए। टूटे हुए चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अशुद्ध माना जाता है।
- ज्योत जलाते समय, "करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते" इस मंत्र का जाप करना चाहिए। यह मंत्र घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने के साथ-साथ शत्रुओं से रक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए है।
अखंड ज्योति जलाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- अखंड ज्योति को कभी भी अकेला न छोड़ें। इसका मतलब है कि ज्योत को जलता हुआ बनाए रखें। अगर किसी कारणवश यह बुझ जाए, तो इसे तुरंत पुनः जलाकर सही स्थिति में रखें। ज्योत का बुझना अशुभ माना जाता है।
- जहां पर अखंड ज्योति जल रही हो, वहां पूरे स्थान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। जगह को स्वच्छ रखें और कोई नकारात्मक ऊर्जा न आए, इसके लिए घर के वातावरण को शांत बनाए रखें।
- पूजा में पूरी श्रद्धा और ध्यान रखें। जब आप अखंड ज्योति जलाते हैं, तो इसे एक धार्मिक अनुष्ठान की तरह लें और इसे श्रद्धा, विश्वास और शुद्ध भाव से करें। नकारात्मकता और भ्रम से बचें, ताकि मां दुर्गा की कृपा का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
Maa Ambe Aarti On Chaitra Navratri: नवरात्रि में करें मां अम्बे की आरती
अंबे जी की आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
Mantra Jaap On Chaitra Navratri : नवरात्रि में करें इन मंत्रों का जाप
नवरात्रि के नौ दिनों तक कुछ मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से माता रानी की विषेश कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं दुर्गा माता के चमत्कारी मंत्र कौन से हैं।
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।।
Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें देवी की पूजा, मिलेगी विशेष कृपा
मां शैलपुत्री को लगाएं इन चीजों का भोग
देवी शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय होता है। इसलिए उनकी पूजा में सफेद रंग की चीजों का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है, जैसे- सफेद फूल, वस्त्र, मिष्ठान आदि। ऐसी मान्यता है कि जो कुंवारी कन्याएं श्रद्धापूर्वक मां शैलपुत्री की पूजा करती हैं, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
Chaitra Navratri 2025 Tithi: चैत्र नवरात्र की तिथि
- 30 मार्च 2025 प्रतिपदा (मां शैलपुत्री)
- 31 मार्च 2025 द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी) और तृतीया (मां चंद्रघंटा)
- 1 अप्रैल 2025 चतुर्थी (मां कुष्मांडा)
- 2 अप्रैल 2025 पंचमी (मां स्कंदमाता)
- 3 अप्रैल 2025 षष्ठी (मां कात्यायनी)
- 4 अप्रैल 2025 सप्तमी (मां कालरात्रि)
- 5 अप्रैल 2025 अष्टमी (मां महागौरी)
- 6 अप्रैल 2025 नवमी (मां सिद्धिदात्री)
Chaitra Navratri Durlabh Sanyog: चैत्र नवरात्रि पर बन रहे दुर्लभ संयोग
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक लगभग 100 वर्षों बाद नवरात्रि के प्रथम दिन पंचग्रही योग का निर्माण भी हो रहा है। इस साल चैत्र नवरात्रि में अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। नवरात्रि के पहले दिन इंद्र योग और रेवती नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। इस योग में किया गया पूजा पाठ बेहद पुण्यतिथि माना जाता है।
Chaitra Navratri Maa Durga Dream: सपने में मां दुर्गा के दर्शन क्या देते हैं संकेत
स्वप्न ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवी के दर्शन शुभ संकेत माने जाते हैं और यह दर्शाते हैं कि साधक पर देवी की विशेष कृपा है।
मां दुर्गा का दर्शन
स्वप्न में माँ दुर्गा का दर्शन होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं समाप्त होंगी। यह शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि का संकेत देता है।
मां लक्ष्मी का दर्शन
यदि नवरात्रि में किसी व्यक्ति को माँ लक्ष्मी के दर्शन होते हैं, तो इसका अर्थ है कि आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और धन-संपत्ति की प्राप्ति होगी। यह समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
मां सरस्वती का दर्शन
मां सरस्वती का स्वप्न में आना विद्या, ज्ञान और सफलता का संकेत है। यह विद्यार्थियों और कला-संगीत से जुड़े लोगों के लिए विशेष शुभ होता है।
नवरात्रि में करें जौ से जुड़े ये खास उपाय
- नवरात्रि के दिनों में आप एक छोटे से तांबे के थाल में जौ के कुछ दानों को रख लें। इसके बाद इन्हें पूजा स्थल पर रखें और अगले दिन इन जौ को पक्षियों को डाल दें। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को धन लाभ की प्राप्ति होती हैं।
- ज्योतिषियों के मुताबिक जौ और नारियल, तिल, दूर्वा, कोयला, कच्चा दूध जल में प्रवाहित कर दें। इससे जातक को राहु के प्रभाव से मुक्ति प्राप्त होती है। वहीं जौ को कबूतर को खिलाने से भी राहु-केतु के प्रभाव से बचा जा सकता है।
- आप एक मुट्ठी जौ को लाल रंग के वस्त्र में बांध लें और इसे बेड के नीचे रख दें। इसके बाद अगली सुबह इसे जरूरतमंदों को दान में दे दें। इस उपाय से कर्ज संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
नवरात्रि प्रतिपदा तिथि- मां शैलपुत्री
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नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की आरती
आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
अपनी राशि के अनुसार करें उपाय
- मेष राशि वाले नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल रंग का फूल या चुनरी चढ़ा सकते हैं। इससे कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होंगी।
- वृषभ राशि के लोग नवरात्रि में देवी को सफेद रंग के फूल अर्पित करें। इससे मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
- मिथुन राशि के जातक देवी को केवड़ा के पुष्प अर्पित कर सकते हैं। इस दौरान आप देवी को हरे रंग का कोई फल भी चढ़ा सकते हैं।
- कर्क राशि वाले नवरात्रि के दिनों में देवी की विधि विधान से पूजा करें। इस दौरान उन्हें सफेद वस्त्र भी अर्पित करें।
- सिंह राशि वालों के लिए माता को गुड़ का भोग लगाना लाभकारी साबित होगा। इससे कार्यों में मनचाहे परिणामों की प्राप्ति हो सकती हैं।
- कन्या राशि के जातक नैवेद्य में खीर का भोग लगाकर देवी को हरे वस्त्र अर्पण करें।
- तुला राशि के लोग नवरात्रि की पूजा के बाद कन्याओं को सफेद रूमाल भेंट कर सकते हैं। इस उपाय से नौकरी में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं।
- वृश्चिक राशि वाले देवी की पूजा करें। इसके बाद सप्तश्लोकी दुर्गा का 18 बार पाठ करें। मान्यता है कि इससे धन लाभ के योग बनते हैं।
- धनु राशि के जातक नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का संपूर्ण पाठ करें। यह आपके लिए कल्याणकारी साबित होगा।
- मकर राशि के जातक अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा को हलवे और चने का भोग लगाएं। इससे देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- कुंभ राशि के लोग गुड़हल के फूल देवी को अर्पित करें। इससे कार्यों में सफलता के योग बनते हैं।
- मीन राशि वालें पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। फिर नवमी तिथि पर देवी की पूजा करें और खीर का भोग लगाएं।
हाथी पर सवार होकर आ रही हैं दुर्गा मां, जानें इसका महत्व
इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ 30 मार्च रविवार से हुआ है। इसका अर्थ है कि मां दुर्गा का वाहन हाथी है। मान्यता है कि मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा होने लोगों के धन में वृद्धि होती है और देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि में अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। नवरात्रि के पहले दिन इंद्र योग और रेवती नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।
Chaitra Navratri 2025
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मां दुर्गा के कौन-कौन से वाहन हैं?
अलग-अलग वार के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा के वाहन डोली, नाव, घोड़ा, भैंसा, मनुष्य व हाथी होते हैं।
कैसे तय होता है माता के आगमन का वाहन ?
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कैसे तय होता है माता के आगमन का वाहन ?
मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्रि सोमवार या रविवार से शुरू हो रही है तो मां का वाहन हाथी होता है जो अधिक वर्षा के संकेत देता है। वहीं यदि नवरात्रि मंगलवार और शनिवार शुरू होती है, तो मां का वाहन घोड़ा होता है, जो सत्ता परिवर्तन का संकेत देता है। इसके अलावा गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होने पर मां दुर्गा डोली में बैठकर आती हैं जो रक्तपात, तांडव, जन-धन हानि का संकेत बताता है। वहीं बुधवार के दिन से नवरात्रि की शुरुआत होती है, तो मां नाव पर सवार होकर आती हैं और अपने भक्तों के सारे कष्ट को हर लेती हैं।
Hindu New Year 2025
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हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं
इस बार 30 मार्च 2025 यानी आज से नवरात्रि के साथ-साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो रही है। इस बार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 के रूप में आया है, जिसमें सूर्य और चंद्र देव दोनों मीन राशि में मौजूद हैं।
शैलपुत्री माता
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नवरात्रि के पहले दिन लगाएं मां शैलपुत्री को ये भोग
नवरात्रि के प्रतिपदा तिथि पर मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-आराधना करने की धार्मिक मान्यता है। मां शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं इस कारण से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री को सफेद रंग बेहद प्रिय है। इस दिन मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना गया है। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।
lucky zodiac sign on navratri
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चैत्र नवरात्रि पर इन राशि वालों को मिल सकता है लाभ
इस बार 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। इससे एक दिन पहले यानी 29 मार्च को न्याय के देवता शनि मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं। ऐसे में इन राशि वालों के लिए चैत्र नवरात्रि का समय बेहद कल्याणकारी हो सकता है।
कन्या राशि
यह समय कन्या राशि वालों के लिए और भी खास है। आपको नौकरी में सम्मान की प्राप्ति होगी। किसी नए के आने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। कोई अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है।
तुला राशि
नवरात्रि में आपके घर में किसी महंगी वस्तु का आगमन हो सकता है। निवेश के लिए समय शुभ रहेगा। किसी के आने से आपको विशेष लाभ होगा।
मकर राशि
नवरात्रि में देवी की कृपा से लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। आपको सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलेगा। उधार दिया हुआ धन वापस मिलेगा।
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चैत्र नवरात्रि 2025 का 9 दिनों का पूजा कैलेंडर
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। प्रत्येक दिन एक देवी का पूजन किया जाता है, और हर देवी के स्वरूप में अलग-अलग प्रकार की शक्ति और आशीर्वाद समाहित होते हैं।
| दिन |
तिथि |
वार |
देवी पूजा |
| प्रतिपदा |
30 मार्च 2025 |
रविवार |
मां शैलपुत्री |
| द्वितीया |
31 मार्च 2025 |
सोमवार |
मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीया |
31 मार्च 2025 |
सोमवार |
मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थी |
1 अप्रैल 2025 |
मंगलवार |
मां कूष्मांडा |
| पञ्चमी |
2 अप्रैल 2025 |
बुधवार |
मां स्कंदमाता |
| षष्ठी |
3 अप्रैल 2025 |
गुरुवार |
मां कात्यायनी |
| सप्तमी |
4 अप्रैल 2025 |
शुक्रवार |
मां कालरात्रि |
| अष्टमी |
5 अप्रैल 2025 |
शनिवार |
मां महागौरी |
| नवमी |
6 अप्रैल 2025 |
रविवार |
मां सिद्धिदात्री |
नहीं रख पा रहे हैं नवरात्रि के सारे व्रत, बस कर लें ये काम
चालीसा पाठ करें
यदि व्रत नहीं रख सकते तो मां दुर्गा का ध्यान करें और दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।
नौ दिनों तक जागरण करें
अगर व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो नौ दिनों तक रात में मां दुर्गा के भजन सुनें या परिवार के साथ मिलकर जागरण करें।
प्रसाद बांटें
पूजा के बाद, घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरण करें। यह मां दुर्गा की कृपा पाने का एक तरीका है।
वास्तु दोष दूर करने के लिए करें ये उपाय
घी का दीपक जलाएं
देवी-देवताओं की आरती करते समय घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। नवरात्र के दौरान इस दीपक को दाहिने हाथ की तरफ रखें। इससे घर में मां दुर्गा का आगमन होता है और वास्तु दोष दूर होता है।
अखंड ज्योत जलाएं
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दीपक को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से घर के सभी दोष समाप्त होते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
Chaitra Navratri 2025 Wishes
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1. सुख, शांति और समृद्धि की
मंगलमय कामनाओं के साथ
आप और आप के परिवार को नवरात्रि की हार्दिक मंगल कामनाएं
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
2.लक्ष्मी का हाथ हो,
सरस्वती का साथ हो,
गणेश का निवास हो,
और मां दुर्गा के आशीर्वाद से
आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो…।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
3.मैंने शरण जो मां की पाई
मेरी चिंता मां ने मिटाई
नाचूं गाऊं बजाऊं मैं ताली
मेरे घर में है हर दिन दिवाली
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
Shri Durga Chalisa Path: चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें दुर्गा चालीसा पाठ
श्री दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तन बीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
आभा पुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।
जब लगि जियऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥
Navratri 2025 9 Days Puja Mantra: चैत्र नवरात्रि में 9 दिनों के 9 मंत्र
- ॐ शैलपुत्र्यै नमः
- ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः
- ॐ चंद्रघंटायै नमः
- ॐ कूष्माण्डायै नमः
- ॐ स्कंदमातायै नमः
- ॐ कात्यायन्यै नमः
- ॐ कालरात्र्यै नमः
- ॐ महागौरिये नमः
- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
Navratri 2025 Rules for 9 days: नवरात्रि के 9 दिनों में क्या न करें
नवरात्रि के 9 दिनो में इन नियमों का करें पालन
- मांस-मछली या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
- बाल-दाढ़ी और नाखून कटवाने या काटने से बचें।
- घर पर कलह-क्लेश जैसी स्थिति उत्पन्न न करें और वाद-विवाद से दूर रहें।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और घर को गंदा बिल्कुन न रखें।
Chaitra Navratri 2025 Upay: नवरात्रि में लौंग चढ़ाने की विधि
नवरात्रि में लौंग चढ़ाने का खास महत्व है। इससे मां दुर्गा की कृपा मिलती है, नकारात्मकता का नाश होता है, सकारात्मकता का संचार होता है। नवरात्रि के 9 दिनों तक आप रोजाना शाम के समय दीप में लौंग के जोड़े को डालकर दीप जलाएं और इसे धुएं को पूरे घर में दिखाएं।आरती करते हैं भी कपूर में लौंग के जोड़े को डालकर आरती कर सकते हैं।
Chaitra Navratri 2025: इस साल चैत्र नवरात्रि 9 नहीं 8 दिनों की
इस साल चैत्र नवरात्रि के दौरान द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन है, जिस कारण नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिनों की होगी।