'संवाद' के मंच पर अमोघ लीला दास
'अमर उजाला संवाद' कार्यक्रम में जाने माने मोटिवेशनल स्पीकर अमोघ लीला दास ने शिरकत की। इस दौरान उनसे अध्यात्म से जुड़े कई विषयों पर बात की। अमोघ लीला दास ऐसे विषयों पर अपनी बात रखी, जिनसे सार्थक जीवन की राह निकलती है।
एक युवती के 'कॉमेंटेटर जनता की आवाज की तरह काम करता है' सवाल पर मुरली कार्तिक ने कहा कि बहुत सारे रॉल हैं हमारे। कभी-कभी इतने सारे लोग बात करते हैं, कभी कभी वो कुछ गलत दे देते हैं तो हम गलत बोल देते हैं, तो लोगों को लगता है कि हम गलत बोल रहे हैं।
संवाद कार्यक्रम में मुरली कार्तिक से लोगों ने सवाल भी किए।
मुरली कार्तिक ने कहा कि सिर्फ कुलदीप यादव ही नहीं, जो भी आपको लगता है कि आपके प्लेइंग-11 में डिजर्व करता है, उसे मौका देना चाहिए। आपके पास बुमराह हैं, लेकिन वो सारे मैच नहीं खेलने वाले। वहां पहले मैच से पता चल गया कि गेंदबाजी आपकी अगर हल्की सी भी कमजोर हुई तो इंग्लैंड के लाइन अप के खिलाफ काफी मुश्किल होने वाला है। ऐसे में कुलदीप जो शानदार रहे हैं और वो विकेटटेकर हैं। उनका स्किल वैसा है कि वो किसी भी विकेट पर अच्छा कर सकते हैं।
मुरली कार्तिक ने कहा कि समय किसी का इंतजार नहीं करता। जो खिलाड़ी बने हैं वो अपने दम पर बने हैं अपने बलबूते बने हैं। अपने प्रदर्शन से बने हैं। तो जब कोई जाता है तो आप चाहते हैं कि जल्दी वो ट्रांजिशन हो जाए। या आप चाहते हैं कि छह साल बाद रिप्लेसमेंट मिले विराट कोहली का? इस मैच में भारतीय बल्लेबाजी दो बार ढही है, भले ही लोअर ऑर्डर हो। आप एक प्लेयर को जरूर मिस करेंगे। उनको कई उपनाम मिले, जैसे चेज मास्टर या जो भी उनको उनके प्रदर्शन की वजह से मिली है। रोहित शर्मा को व्हाइट बॉल ग्रेट कहा जाता है क्योंकि उस प्रारूप में उन्होंने इतने रन बनाए हैं। तो मिस तो जरूर करेंगे। भले पहले मैच में नहीं किया हो और आगे करेंगे, लेकिन मिस तो जरूर करेंगे। इसका दूसरा पहलू ये है कि आप चाहते हैं कि उनके रिप्लेसमेंट जल्दी मिल जाएं और अच्छी बात है अगर बल्लेबाजों ने रन बनाए तो।
मुरली कार्तिक ने कहा कि मुझे नहीं पता। आप मुझसे पुछिए कि मैं रिटायर हुआ था या लिवाया गया था तो मैं आपको इसका जवाब दूंगा। मैं रिटायर हुआ था क्योंकि मैं बूढ़ा हो गया था। अब आप सोचिए उन्होंने कहा कि हम टी20 जीत गए तो रिटायर हो गए। सबका मोटिवेशन अलग अलग होता है।
मुरली कार्तिक ने कहा कि ये सवाल चयनकर्ताओं से करना चाहिए। जब टीम चुनी जाती है तो 18-19 खिलाड़ियों के पूल से चुनी जाती है। मुख्य चयनकर्ता ही टीम चुनता है। मुझे नहीं लगता कि उसमें किसी व्यक्तिगत फैसले लिए जाते हैं। सबकी सोच के साथ टीम बनती है, कप्तान की राय, कोच की राय चयनकर्ताओं की राय सबसे मिलकर टीम बनती है। ये सवाल आप चयनकर्ताओं से पूछें कि फैसले आप एक टीम के तौर पर ले रहे हैं या कोई व्यक्तिगत फैसले लिए जा रहे हैं।
मुरली कार्तिक ने कहा कि नहीं मुझे नहीं लगता ऐसा। सबको खुश करना मुश्किल है। हर फैसले से कोई न कोई नाराज होगा। जो बंदा डिसीजन लेता है वो अपनी सोच के हिसाब से लेता है। यहां किसी ने किसी को आपत्ति होगा ही। मुझे नहीं लगता कि किसी एक की मर्जी से चलता है। हर कोई टीम को आगे रखकर ही फैसला करता है। मैं भी चाहूंगा कि मैं जो फैसले लूं उससे मेरा नाम हो। ऐसा नहीं हुआ तो तलवार मेरी गर्दन पर होगी।
मुरली कार्तिक ने कहा कि आप अगर उनका कप्तानी करियर देखें तो जिस साल उन्होंने कप्तानी शुरू की गुजरात टाइटंस के लिए शुरू की तो वो कप्तानी को फील कर रहे थे। फ्रेंचाइजी क्रिकेट अलग है। कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऊपर से काफी दबाव है। क्रिकेट ही नहीं, साइड से जो चीजें चलती हैं, उसका दबाव रहता है। वो शुभमन गिल को हैंडल करना, खासकर गुजरात एक ऐसी टीम जो आते ही चैंपियन बनी। अगले साल चैंपियन बनते बनते रह गई। ऐसे में आप एक ऐसे फ्रेचाइजी की कप्तानी कर रहे जिसका कप्तान कहीं दूसरी फ्रेंचाइजी में चला गया हो, उस साल उनको वक्त लगा कप्तानी के साथ भी और बल्ले के साथ भी। आप जॉब के साथ चीजें सीखते हो, वही फील आ रहा था। अब उनकी कप्तानी देखिए, इस साल आईपीएल में वो शानदार रहे। लीड्स टेस्ट में पहली पारी में वो सही खेल रहे थे। दूसरी पारी में वह दबाव में आए तो तितर बितर हो गए। सब हुए। तो इसलिए मैंने कहा कि संयम बरतना होगा। समय के साथ बिल्कुल वो इम्प्रूव करेंगे और बेहतर होते जाएंगे।
मुरली कार्तिक ने कहा कि जब मैं मैच देख रहा था तो बाल खींचने की कोशिश कर रहा था। मैं खुद आश्चर्य था कि बुमराह के अलावा हम क्यों नहीं कर पा रहे। यही चीज ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी देखने मिली थी। सब गेंदबाज अच्छे हैं, इन सभी गेंदबाजों ने बेहतर प्रदर्शन किया है तभी टीम में आए हैं, लेकिन प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रहे ये एक बड़ा सवाल है। इसका जवाब वही लोग दे पाएंगे यहां बैठकर मैं नहीं दे पाऊंगा।
मुरली कार्तिक ने कहा कि आपको एक चीज याद रखनी पड़ेगी कि हम काफी भावुक हैं। खासकर हम क्रिकेट के साथ काफी भावुक हैं। हम चाहते हैं कि हर बार भारत जीते। हारे कभी नहीं। आपने कहा विराट कोहली नहीं है, रोहित शर्मा नहीं है। अगर हमारा इतिहास निकाले तो देखेंगे कि बहुत बड़े-बड़े दिग्गज खिलाड़ी बने। दिग्गज खिलाड़ियों ने छोड़ा तो वो कहते हैं न कि उनकी जगह की भरपाई करना आसान नहीं होता। पर कोई न कोई खरा उतरा है। आप अनिल कुंबले या हरभजन को ले लीजिए तो उसके बाद अश्विन और जडेजा आए। आप सचिन और द्रविड़ की बात ले लीजिए तो उसके बाद विराट कोहली जैसा बड़ा प्लेयर मिला। उन्हें देखकर लगा था कि वो सचिन के 100 शतकों के रिकॉर्ड को भी पार कर लेंगे। अब आप शुभमन गिल और उनकी टीम की बात कर रहे हैं। आप कभी एराज को कंपेयर न करें। मैं खुद को बिशन सिंह बेदी या प्रसन्ना से कंपेयर नहीं कर सकता क्योंकि वो काफी ऊपर थे। आगे चलकर किसी को भी कुंबले या हरभजन से कंपेयर नहीं करना चाहिए, क्योंकि वो अलग वक्त दौर था, अलग खेल था और अलग सोच था। ये मॉडर्न टीम जो है, सबसे पहली बात सबको खुश करना मुश्किल है। हर कोई कुछ न कुछ कहेगा। कोई कहेगा श्रेयस अय्यर नहीं है। अरे शमी फिट थे ...इनको लेना चाहिए था.. उनको लेना चाहिए था। सबको खुश नहीं रख सकते। हमें थोड़ा संयम से काम लेना होगा। कई खिलाड़ी अभी अभी आए हैं। इंग्लैंड खेलने के लिए आसान नहीं है। आपको एडजस्ट करने में समय लगेगा। एक दो बार वहां का दौरा करेंगे फिर आप कुछ अच्छा करेंगे। ये खिलाड़ी काफी टैलेंटेड हैं। इन्हें वक्त देना पड़ेगा। पहला टेस्ट हम हार गए जो हमें नहीं हारना चाहिए था। हमें उन पर विश्वास करना होगा।
भारत के पूर्व क्रिकेटर मुरली कार्तिक अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में 'खेल की बात' सत्र में चर्चा कर रहे हैं।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर स्थगित हुआ है। सरकार बेहद साफ है कि अब अगर कोई हमला होगा तो जवाब दिया जाएगा। इसमें कोई संशय नहीं है कि अब अगर आतंकवाद फैलाया जाएगा तो भारत आत्मरक्षा करेगा। पहले भी सारी स्ट्राइक ऐसी हुई हैं। न्यायोचित अधिकार के लिए युद्ध में जाना पाप नहीं है। इसमें सबको अपनी भागीदारी करनी होगी।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि अमेरिका युद्ध के जरिये अपना व्यापार बढ़ाता है। इसलिए वे संघर्ष से उत्साहित होते हैं। मगर युद्ध भारत की प्रगति में रोड़ा बनता है। हाल के युद्धों को देखें तो भारत काफी प्रभावित हुआ है। इसलिए युद्ध नहीं होने चाहिए।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि तकनीक अच्छाई भी लाती है और बुराई भी लाती है। लोग व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर देश विरोधी कोई पोस्ट साझा न करें। लोग ऐसा न करके देश का सहयोग कर सकते हैं। लोग साइबर सिक्योरिटी के तहत राष्ट्र की रक्षा और देशहित में काम कर सकते हैं।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि राष्ट्र रक्षा का संकल्प सभी का है। बच्चे फौज में जाते हैं तो यह अच्छा है। विकसित भारत के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। ब्रह्मोस उत्तर प्रदेश में बन रही है। मध्यप्रदेश में टैंक बन रहे हैं। राष्ट्र रक्षा में सबका सहयोग जरूरी है। विकास तभी होगा जब सुरक्षा होगी। आने वाले पीढ़ियां विकसित होंगीं।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत के जहाजों पर 600 मिसाइल तैनात थीं। भारत की नौसेना आगे भी तैयार है। जब संघर्ष होता है सभी सेनाएं एक समय पर अपना काम करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भले ही नौसेना को जवाब देने का मौका नहीं मिला लेकिन नौसेना तैयार थी। शायद इसलिए सीजफायर हुआ।
सवाल: पाकिस्तान के साथ सीजफायर क्यों किया गया?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि सीजफायर का फैसला इसलिए लिया गया कि क्योंकि पाकिस्तान के पास कुछ खोने को नहीं है। पाकिस्तान ने जब गुहार लगाई तो भारत ने सीजफायर किया। यह संघर्ष ज्यादा दिन चलता तो हमारे नागरिक प्रभावित होते।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि परमाणु मुद्दों पर ज्यादा चर्चा नहीं की जानी चाहिए। इस पर अंदरूनी तौर पर काफी चर्चा होती है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना तैयार थी। नौसेना भी अलर्ट थी। मार्च में ही नौसेना अभ्यास कर चुकी थी। इसलिए पहलगाम के बाद हमने तेजी और मुस्तैदी से जवाब दिया।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर बिल्कुल अलग था। हमारा नेतृत्व बहुत अलग था। हमारी लीडरशीप बहुत क्लीयर थी। राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व का रुख साफ था। अच्छी बात यह है कि भारत पहले ही कई सारे हमले झेल चुका था। तो भारत ने इन सबको सोचते हुए पाकिस्तान को जवाब दिया।
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि एक हजार पहले यह साफ था कि आपके पास नौसेना है तो आपका प्रभाव बढ़ेगा। भारत के पास जमीनी क्षेत्र ज्यादा है। मगर हम नौसेना के जरिये आत्मनिर्भर बने हैं। मेक इन इंडिया को भारत की नौसेना ने 1960 के दशक में शुरू किया था। सबसे पहले नौसेना ने आईएनएस अजय बनाया। भारत अभी भी काफी जहाज बना रहा है। आज हमारे रक्षा उद्योग ने काफी काम किया।
उन्होंने कहा कि नौसेना के पास पनडुब्बियां हैं। इसमें मिसाइल होती हैं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण पनडुब्बी परमाणु ऊर्जा से लैस है। यह सब भारत में बनाई जाती हैं। नौसेना के पास 140 जहाज हैं। नौसेना आज के आयाम पर काम करती है। दुनिया में हर जगह संघर्ष है। इस्राइल-ईरान संघर्ष से हम दो प्रभाव पड़े हैं। हमारे तेल स्रोत बंद होंगे और व्यापार प्रभावित होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत की आपूर्ति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जरूरी था। चीन को हमने करारा जवाब दिया। यह भारत के विकास को दर्शाती है। सभी देश चाहते हैं कि भारत का विकास न हो। इसलिए हमारा मजबूत होना जरूरी है
'अमर उजाला संवाद' के मंच पर वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह मंच पर 'राष्ट्र रक्षा का संकल्प' विषय पर अपनी बात रख रहे हैं। वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भोपाल से मेरा नौसेना का सफर शुरू हुआ था। मेरा प्रयास आपको नौसेना के बारे में बताने है। नौसेना विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। नौसेना 11 हजार किमी लंबे तट क्षेत्र को सुरक्षित करती है। यह विकसित भारत के लिए काम कर रही है। यह हिंद महासागर की सबसे बड़ी नौसेना है। समुद्री क्षेत्र में जागरूकता रखती है। नौसेना पर सैटेलाइट है जो अंतरिक्ष से समुद्र तट पर नजर रखती है। नौसेना के पास कई सारे हवाई जहाज है। इस पर 275 एयरक्राफ्ट हैं। इसमें से 30 मानव रहित हैं। ये सभी जहाजों से उड़ते हैं। समुद्री सतह पर नौसेना के पास कई जहाज है।
विश्वास सारंग ने कहा कि हम ताकत के साथ कहते हैं कि हम हिंदू हैं। ये मैं सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए नहीं कहते। कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति इतनी आगे बढ़ा दी कि मैं हिंदू हूं तो ये स्वीकार नहीं किया जाता। मैं लैंड जिहाद या लव जिहाद की बात करता हूं तो हमें सांप्रदायिक करार दे दिया जाता है। हिंदू होना मेरा मूल है और हमें इस पर गर्व है। हमारा तन हिंदू, मन हिंदू, जीवन हिंदू यही तो हमारा मूल है। अगर मैं ये बोलता हूं कि लव जिहादी की छाती पर गोली क्यों नहीं मारी तो मैं उस पर अभी भी कायम हूं। अगर किसी बहन बेटी से सिर्फ धर्म बदलने के लिए शादी करने कि क्या इसकी इजाजत दी जा सकती है!
विश्वास सारंग ने कहा कि मुझे खुशी है कि मुझे ये श्रेय मिल सका कि मेरे चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहते हुए मेडिकल में हिंदी की पढ़ाई शुरू हो सकी। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बात की और तकनीकी और मेडिकल शिक्षा को भी हिंदी में कराने की बात की। हमने उसे चुनौती के तौर पर लिया। जब हमने पहली बार अपने अधिकारियों के साथ बैठकर इस पर चर्चा की तो अधिकारियों की शारीरिक भाषा देखकर लगा पूरी नकारात्मकता लगी, लेकिन हमने शुरुआत की और मेडिकल टीचर्स की फैकल्टी को समझाया।
हमने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मंदार नाम से वार्ड रूम बनाया और लगभग आठ महीने की मेहनत के बाद मेडिकल की किताबों का रूपांतरण किया। हम हिंदी और इंग्लिश का झगड़ा नहीं कराना चाहते थे इसलिए मेडिकल शब्दों को इंग्लिश नामों से ही लिखा। इससे मेडिकल छात्रों को परेशानी नहीं हुई।
अमर उजाला संवाद के मंच पर 'कैसे बनाएं युवाओं के सपनों का प्रदेश' सत्र में राज्य के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने अपने विचार रख रहे हैं।
विश्वास सारंग ने कहा कि अगर इस देश और समाज को आगे बढ़ाना है तो युवा को व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है। अगर हम युवा को व्यवस्थित और संस्कारित करने की बात करते हैं तो उसमें खेल एक बड़ा तत्व है। व्यक्ति से नागरिक बनने की प्रक्रिया है, उसके आयामों में खेल भी एक आयाम है। अब देश में खेलों को लेकर परिवर्तन आया है और इसे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने परिवर्तित किया है। पहली बार कोई प्रधानमंत्री हुआ, जिन्होंने रात दो बजे भी खिलाड़ी के स्वर्ण पदक जीतने पर उसकी हौसला अफजाई करते हैं। खेल के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की बात हो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के सीएम मोहन यादव भी लगातार काम कर रहे हैं। सरकारी नौकरी में खेलों को प्रतिनिधित्व दे रहे हैं। सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं एलाइड सेक्टर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जैसे मेडिकल साइंस हैं, बाकी खेलों से जुड़ी हुई और विधाएं हैं। एक फोटो ग्राफी है। स्पोर्ट्स फोटोग्राफी एक बहुत बड़ा आयाम हैं। उस पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ।
हमने मध्यप्रदेश में अलग-अलग एकेडमी खेलों की बनाई है। खेलों के उन्नयन के लिए, उत्कर्ष खिलाड़ी बनाने के लिए काम करती हैं। हम स्पोर्ट्स की एलाइड सर्विस हैं। उसमें भी युवाओं को ट्रेनिंग देंगे। खेल के माध्यम से जो अच्छा खेल रहा है, जो उत्कर्ष खिलाड़ी हैं, उसको सरकारी नौकरी तो मिले ही मिले। प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी मिले। उसके साथ-साथ वो नौकरी देने वाला भी हो। रोजगार युवाओं को मिले, ये हमारी प्राथमिकता है। हमने पिछला बैकलॉग क्लीयर कर दिया है और पुलिस में भी हम खिलाड़ियों को नौकरी दे रहे हैं।
'हम कहते हैं अवध में प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। हमने पत्थर तो नहीं बिठाया, हमने प्रतिमा तो नहीं बिठाई। हमने उसके साथ प्राण प्रतिष्ठा नाम लगाया। जब रामलला में प्राण पड़ गए तो उन रामलला के सामने हम अशुद्ध और मलीन सरयू का जल रखेंगे तो उनके फेफड़े संक्रमित नहीं होंगे। अगर वो रामलला अशुद्ध वायु को ग्रहण करेंगे तो वे बीमार नहीं हो जाएंगे। अगर मानवीयकरण ही करना है तो तरीके से करना चाहिए। कुछ समय के लिए प्राण प्रतिष्ठा करके फिर उसे पत्थर मानकर अपने-अपने घर चले जाना.. इतनी असंवेदनशीलता कम से कम मुझमें नहीं है।'
'अयोध्या के 50 किलोमीटर के अंदर 5 लाख पौधे इतनी दूर तक लगाऊंगी कि रामलला शाम को कहीं टहलने भी जाएं तो शुद्ध वायु ग्रहण करें। सभी देववृक्ष पीपल, नीम, बरगद और अशोक से हम लोगों ने वहां पोधारोपण शुरू किया है। अब तक 3 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, लेकिन ये विरह में अभी थोड़ी दूर है। 2 लाख पौधे और लगेंगे, तब ये विरह दूर होगा। इसके बाद मैं उनके दर्शन कर पाऊंगी।'
'किसको क्या करना चाहिए अगर इस पर ध्यान दूंगी तो फिर आलोचना और धरणा प्रदर्शन की महिला सशक्तिकरण के नाम पर उसी पंक्ति में बैठ जाऊंगी, जिसमें हमारी आज की बहन-बेटियां बैठतीं हैं। वो ये भूल रही हैं कि धरने से नहीं, बल्कि धारणा से भारत बदलेगा। हम जब कहते हैं कि हमारी आधुनिकता में ये बदलाव हो रहा है, नहीं हमारी सृष्टि और हमारा भारत सबसे आधुनिक था। हमारे भारत में वो सबकुछ हुआ है, जो आज हो रहा है। आज का जो भारत जिसमें आप एक शब्द देते हैं 'सिंगल मदर'। हजारों वर्ष पहले जंगल में मां सीता ने जुड़वा बच्चों को जन्म देकर पाल दिया, लेकिन किसी पंचायच में, किसी चौराहे पर, किसी कोर्ट में उन्होंने ससुराल मायके और पति की विवेचना नहीं की। अगर वो करती तो वो सीता रह जातीं, नहीं किया इसीलिए वो सीता मां हैं।'
कार्यक्रम में वॉटर वुमन शिप्रा पाठक ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि "बच्चे के जन्म के 3 से 5 दिन बाद उसका नाम रखा जाता है। मेरा नाम ‘शिप्रा’ रखा गया, जिसका मतलब है कि प्रकृति ने मुझे एक उद्देश्य के साथ भेजा था।"
उन्होंने बताया, "मैंने 13 से 15 देशों में काम किया और कई स्कूलों की स्थापना की। इसके बाद जल के प्रति मेरी संवेदनशीलता लगातार बढ़ती गई। मां नर्मदा की 3600 किलोमीटर की यात्रा और मानसरोवर की यात्रा ने मेरी सोच को बदल दिया। मुझे लगा कि जिंदगी बहुत छोटी है, सिर्फ अपना बिज़नेस बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ करना। इसलिए मैंने जल संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया।"
अमर उजाला संवाद के मंच पर वॉटर वुमन शिप्रा पाठक ने जल संवर्धन से जुड़े मामलों पर अपने विचारों से रूबरू कराया। शिप्रा पाठक ने 'जल है तो कल है' विषय पर चर्चा करते हुए जल संवर्धन पर अपने विचार रखे।
रवि किशन: मैं तीन बेटियों का पिता हूं। एक बेटी सेना की तैयारी कर रही है। मेरी बेटियां अपना खुद का करियर चुन रही हैं। मैं पत्नी को अपनी शक्ति मानता हूं। हिंदी को लेकर कहूंगा कि मुझे नौ भाषाएं आती हैं। मैं धारा प्रवाह अंग्रेजी बोल सकता हूं। लेकिन मैं भोजपुरी और हिंदी बोलता हूं क्योंकि यह मेरी मातृभाषा है। हर देश में लोग अपनी मातृभाषा बोलते हैं।
रवि किशन: पाकिस्तान भिखारी है। उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। पहलगाम में आतंकियों ने निर्दोषों को मारा गया। इसके जवाब में हम लड़े। हमने उनको अपनी ताकत बताई। पाकिस्तान कांप गया तो वह ट्रंप के पैरों में गिरा। हमारी ताकत है कि हम पाकिस्तान को स्वाहा कर देंगे। उसको हमारी ताकत का अंदाजा नहीं है। हमारे पास जुनून है। हमारे पास खोने को बहुत कुछ है। इसलिए संघर्ष को रोका गया है।
रवि किशन: 2027 में उत्तर प्रदेश में 300 से ज्याद सीटें जीतेंगे। धोखा बार-बार नहीं होता है। इसलिए अब आपातकाल को याद दिलाते हैं कि बार-बार जनता से धोखा न हो।
सवाल: अखिलेश भाजपा पर जातिवादी होने का आरोप लगा रहे हैं, आप क्या कहेंगे?
रवि किशन: ये उनका चुनावी शिगूफा है। ये सब ड्रामेबाज हैं। अखिलेश यादव दलित, पिछड़ों के लिए कुछ नहीं करेंगे।
रवि किशन: एक बार हम चूक गए हैं। अगली बार नहीं होगा। विरोधियों को भाजपा से पीड़ा होती है। छोटी सोच वालों को लगता है कि दिल्ली -लखनऊ के बीच जम नहीं रही है। सब अपने मन से सोच रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं है।
रवि किशन: मैं सांसद ही ठीक हूं। मुझे कोई लालच नहीं है। मैं जीवन का खेल जान चुका हूं। मुझे मंत्री नहीं बनना है। मेरा कोई काम प्रधानमंत्री जी मना नहीं करते हैं। जिस दरवाजे खड़ा हो जाता हूं, काम हो जाता है। जनता साथ दे रही है और काम हो रहे हैं। हम सेवा सांसद के तौर पर करना चाहते हैं।
रवि किशन: लोकसभा चुनाव में हम केयरलैस हो गए थे। विपक्ष ने संविधान का गंदा झूठ पिरोया था। उपचुनाव में इनका पर्दाफाश हो गया। 2027 में हम फिर जीतेंगे। योगी जी लगातार काम कर रहे हैं।
रवि किशन: उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि कानून व्यवस्था है। अब उत्तर प्रदेश सुरक्षित है। उत्तर प्रदेश बाहुबली, गुंडो, माफिया से सुरक्षित हुआ है। ये ऐसा है जैसे आजादी मिली हो। आज यह उत्तम प्रदेश बन गया है।
रवि किशन: हर इंसान जीवन में गलती करता है। मुझसे भी गलती हुई थी, वो गलती थी कांग्रेस। कारण था कि मैं सिनेमा की शूटिंग कर रहा था, अचानक शूटिंग से गया, एक महीने में गया, हारा और निपट गया। कृपाशंकर सिंह जी मुझे कांग्रेस में लाए थे। यह अब तक किसी को पता नहीं था। भाजपा ने मुझे 2019 में गोरखपुर से मौका दिया। जनता ने जिताया। इसके बाद दोबारा 2024 में जनता ने जिताया। गोरखपुर अब बदल रहा है। यह राजधानी की तरह विकसित हो रहा है। गोरखपुर पहले अपराध का अड्डा था, अब वहां कानून व्यवस्था बेहद बेहतर है। गोरखपुर में काफी काम हुए हैं। यह फ्लाइंग मशीन का टेकऑफ बन गया है। अब गोरखपुर में सब बेहतर हो रहा है। पूर्वोत्तर में पहले बहुत क्राइम हुआ है। अब सब कुछ खत्म हो गया है।
रवि किशन: बहुत चुनिंदा सांसदों को यह पुरस्कार मिलता है। मैं संसद में सवाल बहुत पूछता हूं। मेरे प्राइवेट बिल बहुत होते हैं। भारत और भविष्य को लेकर मेरे बहुत सवाल होते हैं। जिसकी मैं पढ़ाई करता हूं। लाइब्रेरी का लाभ लेता हूं, मैं वहां पढ़ाई करता हूं। 21 जुलाई फिर मॉनसून सत्र शुरू होगा। उसमें मेरे प्रश्न रहेंगे। मैं सबसे ज्यादा प्रश्न पूछता रहता हूं। अच्छ प्रश्न पूछने के लिए मुझे 26 जुलाई को सांसद रत्न मिलेगा।
रविकिशन: बलराज साहनी साहब, वे नेचुरल एक्टर रहे। एक्टिंग शब्द नहीं जीना है। दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, इरफान खान, नसीरुद्दीन शाह। हर कलाकार हमें कुछ देता है। मुझे रोज कोई न कोई प्रेरित करता हूं। मैं सिनेमा देखकर एक्टिंग करता हूं। इसके अलावा अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, इरफान खान कई ऐसे अभिनेता हैं जो मुझे पसंद हैं। अभिनेत्रियों में मुझे दीपिका पादुकोण, माधुरी दीक्षित जैसे कई नाम हैं। मैं माधुरी दीक्षित के साथ एक फिल्म भी कर रहा हूं। यह एक लव स्टोरी है, जिसका नाम 'मां बहन' है। इसके अलावा भी आप मुझे कई और फिल्मों में देखेंगे। अब मैं कुछ एक रोमांटिक फिल्मों में भी नजर आऊंगा।
कार्यक्रम में रवि किशन ने आगे कहा कि मुझ पर एक ठप्पा लग गया था कि मैं भोजपुरी स्टार हूं। मुझे भोजपुरी की वजह से पीछे ढकेल दिया जाता था, जबकि मैं सिनेमा का शिष्य हूं। लेकिन इस फिल्म के बाद मेरे प्रति नजरिया बदला है। अब लोगों को लगता है कि मैं अच्छा कलाकार हूं। अब मेरे पास अच्छी स्क्रिप्ट और अच्छे ऑफर आते हैं।
रवि किशन: अमेरिका में पक्षपात बहुत होता है। भारतीय फिल्मों को तवज्जो नहीं देते हैं। हमारी ऑफिशियल एंट्री हो चुकी थी। बार-बार होती रही। ऑस्कर में बड़ी मार्केटिंग लॉबी है, जिसको बारीकी से रीड करके अगली बार हम लोगों को प्रयास करना चाहिए। एक बहुत बड़ी लॉबी है, हम लोग लॉबी का शिकार हो जाते हैं। मैं भी विदेश की लॉबी का शिकार हुआ हूं।
अभिनेता ने आगे अपने पॉपुलर शो 'मामला लीगल है' को लेकर एक बड़ा अपडेट देते हुए कहा कि जल्द ही मामला लीगल है का सेकंड सीजन भी आ रहा है। वकीलों की भी कई दिक्कतें होती हैं, कई परेशानियां होती हैं। इन सभी मुद्दों को इसमें छुआ गया है। मैं सेकंड सीजन में जज के किरदार में नजर आऊंगा।
मेरी अगली फिल्म सन ऑफ सरदार टू आ रही है। अजय देवगन हैं, हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं। उनके साथ अभी हमने सिंघम की थी। धमाल की। ये फिल्म उन्होंने ही दिलवाई हमें। फिल्म सन ऑफ सरदार टू में संजय दत्त इस फिल्म किरदार करने वाले थे। फिल्म सन ऑफ सरदार वन में वो थे। संजय दत्त किसी कारण नहीं कर पाए। लेकिन अब मैं कर रहा हूं। फिल्म 25 जुलाई को रिलीज हो रही है। इस फिल्म के लिए मैंने सीएम योगी से लेकर पीएम मोदी तक को पत्र लिखकर परमिशन मांगी क्योंकि उस समय मैं पार्लियामेंट में व्यस्त था।
रवि किशन: 'संवाद' के मंच पर सांसद रवि किशन ने कहा कि फिल्मी कॅरियर की शुरुआत हिंदी फिल्मों से की। 2001 से भोजपुरी फिल्मों में गए। बिग बॉस में गए। मैं पुजारी का लड़का हूं। गरीबी खूब देखी है। जब मुझे मदद की जरूरत थी तो देखा कि लोग संपन्न को ही देखते हैं। तो महादेव से कहा कि मुझे कुछ बना दो तो मैं गरीबों की मदद करूंगा। महादेव ने सुना और गोरखनाथ बाबा ने बुलाया। धन्यवाद दूंगा, मोदी जी, योगी जी, अमित शाह जी का। संगठन ने हमें वहां भेजा। वो शिव अवतारी जगह है, नाथ संप्रदायक की। वहां पर हम सांसद बने। लाखों वोट से जनता ने हमें जिताया। दोबारा भी लाखों वोट से जितवाया। जब उत्तर प्रदेश में झूठ की आंधी चल रही थी तो जनता ने मुझे जिताया।
मुख्यमंत्री- शिप्रा नदी के लिए हमने दो तरीके से काम किया है। शिप्रा जी के ऊपर कोई ग्लेशियर नहीं है और शिप्रा बरसाती नदी है। शिप्रा नदी के जल को स्वच्छ करने के लिए हमने बारिश के समय ही पानी को सेलारखेड़ी में पानी को इकट्ठा कर लेंगे औऱ वो ऊपरी इलाके में है। जैसे ही बरसात का समय चला जाएगा, तो नदी का पानी धीरे-धीरे छोड़कर प्रवाह को सामान्य रखा जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है और 40 फीसदी काम हो भी गया है।
सीएम मोहन यादव ने अमर उजाला अखबार की प्रति की सराहना की।
सीएम यादव ने कहा कि विरासत से विकास अभियान के तहत रानी दुर्गावती जैसे जैसे जितने भी नाम हैं, उन सबका इतिहास हम लोगों के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। अटल ली का जन्म शताब्दी वर्ष है। अभी हमने घोषणा की है कि हम अटल जी के सम्मान में ग्वालियर में कैबिनेट बैठक करने वाले हैं। अटल जी ने गांवों में सड़कें बनाकर जो किया, उसका देश के विकास में बड़ा योगदान है। एयर स्ट्राइक के लिए जो एयरस्ट्राइक हुई थी, वो लड़ाकू विमान ग्वालियर की धरती से ही उड़े थे। तो इस सबको लोगों के सामने लाया जाएगा।
प्रश्न- उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारी हो रही है। आप खुद उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे हैं। सिंहस्थ के लिए कई योजनाएं बनती हैं, लेकिन 12 साल बाद वो काम की नहीं रहतीं, तो क्या ऐसी योजनाएं नहीं बन सकतीं, जिनसे स्थायी विकास हो, वो केवल सिंहस्थ तक ही न रहें।
मुख्यमंत्री- इस बार सिंहस्थ का कोई काम स्थायी होंगे और ये ऐतिहासिक होगा। अब की बार हमने उज्जैन में 30 किलोमीटर घाट बनाए हैं। इससे एक दिन में पांच करोड़ लोग स्नान कर सकें। इसके अलावा साधु संतों के लिए जो टेंट बनते हैं, उनके लिए जमीन खरीदने का प्रावधान करें, जिससे उनके स्थायी निवास बन सकें। तो हरिद्वार के तर्ज पर उज्जैन को बनाने की योजना है।
प्रश्न- आपका संकल्प है विरासत से विकास तक। उज्जैन में विक्रमादित्य जी को लेकर आपने कोशिश की कि उस खोई हुई विरासत को प्रतिष्ठित किया और अहिल्याबाई को लेकर कार्यक्रम आयोजित हुए। लेकिन क्या सचमुच जो आज की राजनीति है, उसमें भी सुचिता स्थापित हो सकेगी या हम सिर्फ पिछली विरासत का ही महिमामंडन करेंगे?
मुख्यमंत्री- आपने दो नाम बताए, लेकिन एक नाम और है और वो है रानी दुर्गावती का। दुर्भाग्य से रानी दुर्गावती के जीवन पर जो उजाला आना चाहिए था, वो उन्हें नहीं मिल पाया। रानी दुर्गावती ने 52 में से 51 युद्धों में जीतीं। उन्होंने अपने समय के सबसे बड़े राजा अकबर की सेना का मुकाबला किया और तीन बार उसकी सेना को भी धूल चटा दी। रानी दुर्गावती के शासन में 36 हजार गांव थे। रानी दुर्गावती ने न सिर्फ युद्ध में बल्कि कला, संस्कृति और जल संरचना में भी काम किया। हालांकि उन्होंने नवाचार की दिशा में काम नहीं किया, जिससे 52वें युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। विपक्षी सेना ने तोप का इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री- एक साल में हमने अपने सारे वर्गों के पैसे बढ़ाए हैं और किसी योजना के पैसों में कटौती नहीं की। हम जो बाजार से राशि उठा रहे हैं, जिसमें हम केवल 10 प्रतिशत बाजार से उठा रहे हैं और बाकी 90 प्रतिशत हम खुद लगा रहे हैं। हमारा बजट चार लाख इक्कीस हजार करोड़ का बजट है, जिसमें हम एक साल में 35-40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले रहे हैं। पूरे राज्य पर सिर्फ चार लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बावजूद हमारी विकास दर भारत सरकार के मापदंड के अनुसार है। राज्य की वित्तीय तरलता तय मानकों के तहत है। हमारा एकमात्र राज्य है, जिसका देश के अंदर योगदान है। हम सबसे कम दर पर बिजली दे रहे हैं। 2002-03 तक प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रुपये प्रतिव्यक्ति थी, जो आज 1,55,000 के आसपास पहुंच रही है। जब मध्य प्रदेश बना तब 94 रुपये कुंतल गेहूं की खरीद थी, जब हमारी सरकार आई तो ये सिर्फ 500 रुपये कुंतल तक ही पहुंची और अब हम 2600 रुपये कुंतल में खरीद रहे हैं।
मध्य प्रदेश के राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में आयोजित हो रहे इस 'संवाद' कार्यक्रम का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारत की महान परंपरा का पालन करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित किया। मुख्यमंत्री के साथ ही मशहूर अभिनेता और सांसद रविशंकर ने भी दीप प्रज्वलित किया।दीप प्रज्वलन के बाद अमर उजाला संवाद के मंच पर अमर उजाला परिवार की तरफ से पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का औपचारिक स्वागत किया गया।
विकास से जुड़ी नीतियां, अर्थव्यवस्था, सिनेमा, खेल और अध्यात्म जैसे विषयों पर सारगर्भित चर्चा के लिए पहचाने जाने वाले 'अमर उजाला संवाद' का मंच पहली बार मध्य प्रदेश में सज गया है। राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में यह 'संवाद' हो रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम में पहुंच चुके हैं और थोड़ी ही देर में वे राज्य के विकास के रोडमैप पर अपने विचार रखेंगे।13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से वे मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में थोड़ी देर में अमर उजाला 'संवाद' शुरू होगा। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंच गए हैं।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे महामंडलेश्वर दादू जी महाराज
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे सांसद रवि किशन
'सिनेमा और सियासत’ विषय पर बोलेंगे रवि किशन
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर से भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन भी मंच की शोभा बढ़ाएंगे। रवि किशन 'सिनेमा और सियासत' विषय पर अपनी बात रखेंगे।
सज चुका है मंच
अब से थोड़ी देर में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अमर उजाला के संवाद का मंच सज चुका है। अब से थोड़ी देर में मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। वे यहां प्रदेश से जुड़ी नीति, योजना और कई मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करेंगे।
'अमर उजाला संवाद' में हिस्सा लेंगे विश्वास सारंग
राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में आज होने वाले 'संवाद' में जहां अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जुटेंगी और मध्य प्रदेश के विकास समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगी। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग भी प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर संबोधित करेंगे।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज होने जा रहे अमर उजाला संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई जानी मानी हस्तियां जुटेंगी। संवाद के इस मंच पर बात होगी तेजी से आगे बढ़ते देश के साथ विकसित होते मध्य प्रदेश की। बात होगी मध्य प्रदेश को युवाओं के सपनों का प्रदेश बनाने की। विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी जीवन के लिए जरूरी जल और उसके संवर्धन की। खेल और मनोरंजन जगत की हस्तियां भी संवाद करेंगी। राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे से इस संवाद की शुरुआत होगी।