सरयू जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरयू तट पर पहुंचकर मां सरयू की पूजा अर्चना की। इसके साथ ही सरयू महोत्सव का आगाज हो गया। आज गंगा दशहरा भी है। माना जाता है आज से ही द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। सरयू तट से सीएम योगी मणिराम दास छावनी जाएंगे और राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2014 के पहले की सरकारों ने विकास का जो मॉडल तैयार किया था उससे विकास तो नहीं हुआ बल्कि गंगा मैली हो गई। नमामि गंगे के माध्यम से किए गए भगीरथ प्रयासों के कारण ही आज गंगा अविरल और निर्मल हो सकी है। यही कारण है कि प्रयागराज में आयोजित हुए महाकुंभ में देश-दुनिया के 66 करोड़ लोगों ने गंगा स्नान किया।
रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है। एक वर्ष पहले 500 साल बाद 22 जनवरी 2024 को पांच सौ वर्षों के बाद अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी और आज उसकी दूसरी कड़ी राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है। इसके लिए मैं अयोध्यावासियों को हृदय से बधाई देता हूं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज गंगा अवतरण का दिवस है और पर्यावरण दिवस भी है। मां गंगा सिर्फ एक नदी ही नहीं है बल्कि लोगों का पेट भरने का भी काम करती है। इसके जल से किसान अन्न उत्पादन करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगीरथ की तरह ही नमामि गंगे योजना के माध्यम से गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए काम कर रहे हैं। जो काम भगीरथ ने किया था वही काम पीएम मोदी भी नमामि गंगे योजना के माध्यम से कर रहे हैं।
रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है। एक वर्ष पहले 500 साल बाद 22 जनवरी 2024 को पांच सौ वर्षों के बाद अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी और आज उसकी दूसरी कड़ी राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है। इसके लिए मैं अयोध्यावासियों को हृदय से बधाई देता हूं।
मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या के रामकथा पार्क में 3038.50 लाख रुपये की लागत के 50 कार्यों का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने 3508.81 लाख के 92 विकास कार्यों का शिलान्यास किया। कार्यक्रम का आयोजन नगर निगम के दो वर्ष पूरे होने पर किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अयोध्या की पुष्प वाटिका में पौधरोपण किया। उन्होंने पीपल, नीम और बरगद के पौधे लगाए।
अयोध्या में राम दरबार समेत आठ विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम की नगरी में मौजूद हैं। यहां पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया और फिर रामलला के दरबार पहुंचे। जहां आरती में शामिल हुए। इसके बाद वह राम मंदिर के प्रथम तल पर आयोजित प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचे और अनुष्ठान में भाग लिया। इसके साथ ही तय समय पर राम दरबार का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने से पहले हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन किया। इसके बाद वह रामलला के दरबार पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंच गए हैं। उनका हेलीकॉप्टर रामकथा पार्क में उतरा। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनकी अगवानी की। यहां से वह हनुमानगढ़ी में दर्शन करने और रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने जाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन दिन है। गंगा दशहरा की पावन तिथि है आज ही के दिन मां गंगा का उतरन इस धरा पर हुआ था...आज ये पावन तिथि महाराज भगीरथ के बाद इस कार्य को अविरल और निर्मल गंगा के नाम पर नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से पीएम मोदी ने देशवासियों को दिया। हम इसके लिए पीएम मोदी के आभारी हैं। आज विश्व पर्यावरण दिवस भी है पूरी दुनिया पर्यावरण के कठिन चुनौतियों से जूझ रही है। ये चुनौती मनुष्य द्वारा ही निर्मित चुनौती है और इसके समाधान का मार्ग भी मनुष्य को ही उठाना पड़ेगा और इसलिए पीएम मोदी ने पूरे भारतवासियों को आह्वान किया है कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें प्रकृति के साथ एक समन्वय और संवाद बनाना पड़ेगा। इस समन्वय और संवाद का नाम उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम' दिया। आज उत्तर प्रदेश में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। 'एक पेड़ मां के नाम' ये कार्यक्रम आज से लेकर लगातार चलेगा और 23 जून को इसका एक बेहद रूप प्रदेश में देखने को मिलेगा...35 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण का लक्ष्य हम लोगों ने इस बार भी रखा है ये क्रम 15 अगस्त तक लगातार चलेगा.."
अयोध्या में हो रहे समारोह को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर कहा है कि प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या धाम में आज श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर श्री राम दरबार सहित अष्ट देवालयों में पवित्र देव विग्रहों की प्राण- प्रतिष्ठा हेतु आयोजित कार्यक्रम का साक्षी बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह पावन अवसर ''एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' की नूतन अभिव्यक्ति है।
राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा पांच जून को गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर सुबह 11:25 से 11:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में होगी। गंगा दशहरा के दिन सिद्ध योग भी बन रहा है। इसी दिन रामेश्वरम की भी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। सुबह छह बजे से प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू हो गया। सुबह देवताओं का पूजन यज्ञमंडप में किया गया। इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू कर दिया गया।
पूजन, भोग, आरती के बाद अनुष्ठान का समापन होगा। समारोह में संघ, विहिप व भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है। स्थानीय साधु-संतों की भी मौजूदगी रहेगी। जातीय मंदिरों के संतों को भी बुलाया गया है। सभी के लिए परिसर में ही लंच पैकेट की व्यवस्था की गई है।
बुधवार प्रातः साढ़े छह बजे से यज्ञमंडप में दो घंटे तक देवताओं का पूजन किया गया। अन्नाधिवास सुबह नौ बजे से 9:30 बजे तक संपन्न हुआ। यज्ञमंडप में हवन 9:35 से 10:35 बजे तक चला। 10:40 12:40 तक राम दरबार समेत सभी देव विग्रहों का अभिषेक किया गया। जिस मंदिर में देव विग्रह की स्थापना होनी है, वहां भी अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई। दोपहर दो बजे से तीन बजे तक उत्सव विग्रहों ने परिसर भ्रमण किया।
इसके लिए पालकी पर चांदी की चौकियों पर राम दरबार की समस्त उत्सव मूर्ति, परकेाटा के छह मंदिरों की उत्सव मूर्ति को विराजमान कर परिसर भ्रमण कराया गया। मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र समेत अन्य यजमानों ने पालकी को कंधे पर उठाकर श्रीराम जय राम, जय जय राम...के जयघोष के साथ मंदिर परिसर की परिक्रमा की।
गंगा दशहरा पर अयोध्या के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आज राम मंदिर परिसर में राजाराम समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा पूरी भव्यता के साथ की जाएगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। वहीं, इस पल के साक्षी देश भर से आए श्रद्धालु भी बनेंगे।
इससे पहले प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के दूसरे दिन बुधवार को विभिन्न अधिवास हुए और उत्सव विग्रहों का परिसर भ्रमण कराया गया। भारत की 21 पवित्र नदियों के जल से सभी देव विग्रहों का अभिषेक हुआ।