सुरंग में फंसे सभी 41 मजदूर अलग-अलग राज्यों से हैं। फिलहाल उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां देखें उनके नामों की सूची...
मोदी हैं तो मुमकिन है, पुष्कर धामी जिंदाबाद के नारे लगा रहे भाजपाई। सुरंग के बाहर मौजूद लोग इस सफलता की खुशी में एक दूसरे को मिठाई बांट रहे हैं।
उत्तराखंड में 12 नवंबर से सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों में से पांच श्रमिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। फिलहाल सभी मजदूर सिल्कयारा टनल के अंदर सेफ्टी टनल में हैं।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान रेस्क्यू के लिए सुरंग के अंदर दाखिल हो गए हैं, कुछ ही मिनटों में मजदूरों को बचाने का ऑपरेशन शुरू होने वाला है।
सिलक्यारा सुरंग में पाइप के पार एनडीआरएफ के जवान पहुंचे गए हैं। बचाव स्थल से कुछ देर पहले रवाना हुए सीएम धामी फिर से साइट पर लौट आए हैं। इस बीच साइट पर हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि कुछ देर में मजदूर बाहर आ जाएंगे।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा है कि प्रदेश के लोगों की मदद के लिए एक टीम उत्तरकाशी भेजी गई है। दिल्ली के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय के संपर्क अधिकारी राजदीप दत्ता के नेतृत्व में टीम उत्तरकाशी के सिल्कयारा में सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने और पश्चिम बंगाल में उनके घरों तक सुरक्षित वापसी में मदद करेगी।
12 नवंबर से उत्तराखंड टनल हादसे में फंसे 41 मजदूरों को रेस्क्यू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। रेस्क्यू को लेकर मिर्जापुर वासियों की दिल की धड़कन बढ़ी रही। टनल में फंसे मिर्जापुर के युवक अखिलेश की सुरक्षित वापसी को लेकर अदलहाट में रह रहा परिवार टकटकी लगाए टीवी देखता रहा। साथ ही फोन से संपर्क कर रेस्क्यू में लगने वाले समय इत्यादि की जानकारी भी लेता रहा। गांव में भी लोग अखिलेश की सुरक्षा को लेकर भगवान से कामना करते देखे गए।
सूत्रों ने बताया कि सभी मजदूरों का स्वास्थ्य ठीक है। सुरंग के अंदर मेडिकल की टीम मौजूद है। किसी भी वक्त मजदूरों को बाहर लाया जा सकता है।
एक्यूरेट कंक्रीट सॉल्यूशंस के एमडी अक्षत कात्याल कहते हैं कि पाइप को बिना किसी बाधा के बहुत सावधानी से अंदर धकेला गया है, एक सफलता हासिल की गई है और पाइप गुजर गया है। मजदूरों को बचाने का काम शुरू हो गया है। कम से कम तीन लोग हैं। चार चरण में रेस्क्यू ऑपरेशन होगा। एनडीआरएफ की टीमें अंदर घुस चुकी हैं। रैंप बनते ही मजदूरों को बाहर निकाला जाएगा
बचाव अभियान के चलते सुरंग के अंदर अस्थायी चिकित्सा सुविधा का विस्तार किया गया है। फंसे हुए मजदूरों को निकालने के बाद यहीं पर स्वास्थ्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आठ बेड की व्यवस्था की गई है और डॉक्टरों एवं विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है।
गद्दे और स्ट्रेचर सुरंग के अंदर ले जाए गए हैं। मजदूरों के लिए गर्म कपड़े भी सुरंग के अंदर ले जाए गए हैं। मजदूरों को सीधा अस्पताल ले जाया जाएगा। मजदूरों के साथ परिजन भी जाएंगे।
श्रमिकों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ में तैयारियां पूरी हो गई हैं। वहीं, सुरंग के पास लोग श्रमिकों के लिए मालाएं लेकर पहुंचे हैं।
माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने कहा, सुरंग में अब दो से तीन मीटर ड्रिलिंग ही बची है। हम शाम पांच बजे तक कुछ परिणाम देखने की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जल्दी मजदूरों को निकालने की उम्मीद है। सुरंग के अंदर मैन्युअल ड्रिलिंग में तेजी है। 57 मीटर तक ड्रिलिंग होनी है। 57 मीटर की दूरी पर सुरंग में पहुंचेंगे। सीएम धामी ने बचाव अभियान की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फिर से रेस्क्यू का जायजा लेने पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी है। सीमेंट को अभी काटा जा रहा है। सुरंग में सब ठीक है, जल्द मजदूरों को निकाल लिया जाएगा। 52 मीटर अंदर जा चुके हैं, ज्यादा दिक्कत नहीं है। बड़ी बाधाएं दूर कर ली गई हैं।
वर्टिकल ड्रिलिंग 36 मीटर तक हो गई है। अभी 50 मीटर तक वर्टिकल ड्रिलिंग की जानी है। लेकिन, वर्टिकल ड्रिलिंग में लोहे के गार्टर को भेदना आसान नहीं होगा। रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों ने भी इसे बड़ी चुनौती बताया है।
सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों की मानसिक स्थिति जानने के लिए रेस्क्यू रोबोटिक्स सिस्टम की मदद ली जाएगी। सोमवार को लखनऊ से रेस्क्यू रोबोटिक्स वैज्ञानिक मिलिंद राज सिलक्यारा पहुंचे। उन्होंने बताया, इस तकनीक से 24 घंटे सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की मानसिक स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।