यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधि ने सीएम आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धराली आपदा मैं राहत कार्यों के लिए एक करोड़ की राशि का चेक भेंट की।
धराली में आपदा के बाद पिछले नौ दिन से लापता लोगों की तलाश जारी है। डॉग स्क्वाड, थर्मल कैमरा और जीपीएस से मलबे में दबे लोगों का पता लगाया जा रहा है। राहत और बचाव दल को अब तक इसमें बड़ी कामयाबी नहीं मिली। मलबे से अब तक मात्र एक शव मिला है। एसडीआरएफ के आईजी अरुण मोहन जोशी बताते हैं कि डॉग स्कवाड और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों से जहां संभावना होती है वहां मलबे में दबे लोगों का पता लगाया जा रहा है। हर दिन बैठक करने के बाद तय करते हैं कि किस तरह से लापता की तलाश की जानी है। सड़कें बंद हैं, ऐसे में सारे मलबे को हटाया जाना भी संभव नहीं है।
धराली में आपदा से प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने और इस घटना के कारणों को जानने के लिए शासन की ओर से गठित विशेषज्ञों की टीम बुधवार को धराली पहुंच गई। टीम ने प्रभावित क्षेत्र में आपदा से हुए नुकसान, उसकी प्रवृत्ति और कारणों की पड़ताल की। पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की यह टीम पूरे आपदाग्रस्त क्षेत्र का सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। विशेषज्ञों की इस टीम में उत्तराखंड भूस्खलन शमन एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक शांतनु सरकार, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.डीपी कानूनगो, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के निदेशक रवि नेगी, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ.अमित कुमार, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण और प्रबंधन केंद्र के प्रधान सलाहकार मोहित कुमार शामिल हैं। बुधवार को विशेषज्ञों ने धराली में पसरे मलबे के नमूनों को भी परखा। खीरगाड के प्रवाह क्षेत्र और मलबे के प्रसार का भी जायजा लिया। स्थानीय लोगों से घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की। आज बृहस्पतिवार को भी विशेषज्ञों की टीम धराली में अलग-अलग स्थानों पर जाकर बीते पांच अगस्त को खीर गंगा में आई तबाही के कारणों को तलाशने का काम करेेंगी।
25 जवानों को हर्षिल हेलीपेड की सुरक्षा और संचालन के लिए तैनात किया गया है। बढ़ते जल स्तर की पूर्व चेतावनी के लिए हर्षिल एसवीएल केंद्र में दो पीटीजेड कैमरे लगाए गए हैं, जिससे निगरानी का काम हो सकेगा। निचले सैन्य शिविर में खोज एवं बचाव के लिए छह श्वान दल तैनात किए हैं। आर्मी ने निचले कैंप हर्षिल में क्षेत्र में खोज-बचाव अभियान भी चलाया है।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, आर्मी ने बुधवार को भी खोजबीन, रेस्क्यू अभियान चलाया। कई जगह मैन्युअली खोदाई भी की गई। आईटीबीपी की टीम ने धराली में क्षतिग्रस्त एक घर से दो खच्चरों के शव बरामद किए। अभियान में हेलिकॉप्टर के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में 48 लोगों और राशन को पहुंचाया गया। खीरगंगा में जल स्तर बढ़ने पर खोज व बचाव दलों के लिए बनाई गई संपर्क पुलिया बह गई थी, इसे तैयार कर लिया गया। संचार सेवा को भी शाम को बहाल कर लिया गया। धराली गांव के बचे हुए हिस्से में वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट तक पीटी रेडियो का उपयोग कर इंटरनेट का विस्तार किया गया है। इसके अलावा जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी छह, एम्स ऋषिकेश और एमएच देहरादून में दो-दो, आईटीबीपी कंपोजिट हास्पिटल में (11) घायल भर्ती हैं।
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धराली में खोजबीन, रेस्क्यू अभियान जारी है। एनडीआरएफ की ओर से धराली में मलबे में दबे लोगों को ढूंढने के लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रिकल डिटेक्टर वेब किसी मलबे में करीब 40 मीटर नीचे तक दबे किसी भी तत्व की जानकारी बताता है। इसमें मंगलवार को दो खच्चरों और एक गाय के शव मिले हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्र को चार सेक्टर में बांट कर मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है। इसमें दो सेक्टर में एनडीआरएफ और दो में एसडीआरएफ की ओर से कार्य किया जा रहा है। शासन ने आपदा के कारणों के अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की जो टीमें बनाई थीं, वह भी पहुंच गई हैं। कई जगह मैन्युअली खोदाई भी की गई।
जीपीआर से मिले संकेतों पर खुदाई की जा रही
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आरएस धपोला ने बताया कि इसकी मदद से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उससे यह जानकारी मिली है कि धराली में आपदा प्रभावित क्षेत्र में करीब आठ से 10 फीट नीचे होटल और लोग दबे हुए हैं। कुछ स्थानों पर जीपीआर से मिले संकेतों पर खुदाई की जा रही है।
इससे पूर्व बुधवार को मौसम साफ होने के बाद 11 बजे से हेलिकॉप्टर उड़ान भर सके। धराली में संचार सेवा बुधवार को भी दिनभर ठप रही। इसके अलावा अब दो चिनूक और एक एमआई हेलिकॉप्टर धरासू व चिन्यालीसौड़ में तैनात करने का फैसला लिया गया है। साथ ही एक एएलएच हेलिकाप्टर भी पहुंच गया है। वहीं, शासन ने आपदा के कारणों के अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की जो टीमें बनाई थीं, वह भी पहुंच गई हैं।