हर्षिल सैन्य कैंप और हेलिपैड में तबाही मचाने वाली तेलगाड के मुहाने पर एकत्रित मलबा अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर खीरगंगा की तबाही की कहानी करीब पिछले सात से आठ वर्षों से बन रही थी। क्योंकि वहां पर आसपास की बुग्याल की भूमि पर लगातार कटाव जारी था। कई वर्षों में पहली बार क्षेत्र में अधिक बारिश होने के कारण उसने पानी और मलबे के रूप में तबाही का रूप ले लिया। यही स्थिति अब तेलगाड के ऊपर बन रही है। बीते पांच अगस्त को धराली में खीर गंगा ने ऐसी तबाही मचाई की उसके जख्म शायद ही कभी कोई भूल पाएगा। वहीं उसके बाद तेलगाड के उफान पर आने के कारण सेना का बहुत नुकसान हुआ। हालांकि उसके बाद दोनों का कहर थम गया लेकिन अभी भी संकट के बादल हटे नहीं हैं। हर्षिल के सेना कैंप और हेलिपैड को क्षति पहुंचाने वाली तेलगाड के मुहाने की तस्वीर जो सामने आई है। वह बहुत ही चिंताजनक है। क्योंकि वहां पर अभी भी पहाड़ी पर मलबा एकत्रित है। जो कि कभी भी बड़ी आपदा का रूप ले सकता है।
अपराह्न तीन बजे तक मातली हेलीपैड पर 124 लोगों को और चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर 53 लोगों को रेस्क्यू कर लाया जा चुका है।
धराली, हषिल क्षेत्र में ड्रोन उड़ने पर जिला प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया। अपर जिला अधिकारी मुक्त मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी दी। बताया कि इससे हेलिकॉप्टरों के उड़ान में बाधा हो सकती है।
धराली से लौटकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करना माहरा ने प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने धराली हादसे में पीड़ित परिवारों के दुःख दर्द को साझा किया। बीते दिनों करन माहरा ग्राउंड जीरो में पहुंचे थे।
उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धराली में पानी और खाने की व्यवस्था नहीं की गई। लोग विस्थापित होने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल पूछे। कहा कि भारी संख्या में मजदूर लापता हैं। होटल और होम स्टे में रुके श्रद्धालुओं और मजदूरों की सूची जारी की जानी चाहिए।
अपराह्न 12 बजे तक मातली हेलीपैड पर 53 लोगों को और चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर 25 लोगों को रेस्क्यू कर लाया जा चुका है। मातली और चिन्यालीसौड़ में रेस्क्यू किए लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के सभी इंतज़ाम भी सुनिश्चित किए गए हैं। इस दौरान खाद्य पदार्थों और जरूरी समान की खेप भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लगातार भेजी जा रही है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी और पौड़ी जिलों के विभिन्न गांवों में हाल ही में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
धराली हर्षिल आपदा के बाद राहत बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सुबह 11 बजे तक मतली हेलीपैड पर 20 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लाया जा चुका है। प्राथमिक जांच के बाद उन्हें गंतव्य के लिए भेजा जा रहा है। धराली हर्षिल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में जरूरी समान की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है । खाद्य पदार्थ व अन्य राहत सामग्री घर घर पहुंचाने का कार्य शुरू किया जा चुका है।
धराली में पांच अगस्त की आपदा के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों/तीर्थयात्रियों का रेस्क्यू जारी है। पिछले तीन दिनों में वायुसेना के विमान, चिनूक, एमआई-17 और चीता हेलिकॉप्टर की मदद से कुल 170 लोगों को दून एयरपोर्ट लाया जा चुका है। शनिवार को चिनूक और एमआई-17 हेलिकॉप्टर से कुल 58 तीर्थयात्रियों को हर्षिल से देहरादून एयरपोर्ट लाया गया। इसके साथ ही हैदराबाद के चार वैज्ञानिकों की एक टीम को धराली भेजा गया है। देहरादून एयरपोर्ट पर लाए जा रहे यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण, जरूरी उपचार, निःशुल्क दवा वितरण और रिफ्रेशमेंट कराने के बाद बसों से आईएसबीटी देहरादून और ऋषिकेश भेजा जा रहा है। जहां से सभी लोग अपने घरों को रवाना हो रहे हैं। शनिवार को एयरपोर्ट से 125 केवी का जेनसेट, ऑयल बैरल सहित जरूरी राहत सामग्री धराली भेजी गई।
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