विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन परिचय हम सबको दिशा देने वाला है। हमने ऐसा व्यक्तित्व खोया है जिसकी देश को आवश्यकता थी। उन्होंने पूर्व विधायक चंद्रशेखर भट्टे वाले को भी याद किया।
मंत्री सतपाल महाराज ने पूर्व पीएम स्व. डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वित्त मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ऐतिहासिक माना जाता है।
अब सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ज्वालापुर के पूर्व विधायक स्व. चंद्रशेखर भट्टे वाले को भी श्रद्धांजलि दी। सीएम ने कहा कि वह जो प्रेरणा समाज को देकर गए निश्चित रूप से लोग उससे आगे बढ़ेंगे। जितने वो साधारण थे उतना ही उनका असाधारण व्यक्तित्व भी था। उनका योगदान बहुत बड़ा है। उनका निधन सबके लिए अपूरणीय क्षति है।
देहरादून और हल्द्वानी के स्टेडियम के पूरे नाम न लिखने पर विपक्ष के विधायक सुमित हृदयेश ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दो पूर्व प्रधानमंत्री का पूरा नाम निमंत्रण पत्र पर सम्मान से लिखने के बजाय सरकार ने शार्ट में क्यों लिखा। इस पर मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि उनका नाम लिखा गया है, लेकिन दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। इसी के साथ प्रश्नकाल समाप्त हुआ।
प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सीएम धामी भी विधानसभा सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंच गए है। सदन में राशन कार्ड को लेकर सत्तापक्ष के विधायकों ने भी सवाल किए। नए राशन कार्ड बनने पुराने की समीक्षा पर सवाल किए गए। मंत्री ने कहा, राशन कार्डों की समीक्षा को लेकर अभियान चलाए जाते हैं। रिक्ति के सापेक्ष ही नए राशन कार्ड बन सकते हैं
सदन में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि प्रदेश में 1,76,000, अंत्योदय कार्ड की डिमांड है। कहा कि अगर कोई लगता है कि राशन कार्ड अपात्र की श्रेणी में आ गया है तो इसकी सूचना विभाग या सीएम पोर्टल पर दे सकते हैं।
मंत्री और कांग्रेस विधायक की तीखी तकरार को लेकर सदन में हंगामा जारी है। सत्ता पक्ष ने कहा, विपक्ष आपत्तिजनक भाषा के लिए सदन से माफी मांगे।
विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। इस बीच मदन बिष्ट और संसदीय कार्य मंत्री के बीच हुई बहस के मामले में सदन में हंगामा शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने आचरण समिति को मामला सौंपा।
सीएम धामी ने विपक्ष पर तंज कर कहा कि एक तरफ आप कहते हैं कि सदन की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं, सदन की जो अवधि रखी गई उसमें भी आप चर्चा नहीं करते हैं। जो समय राज्य के विकास के लिए चर्चा में लगाया जाना चाहिए, उसे हो-हल्ला करके नष्ट करते हैं। राज्य के संसाधन खराब करते हैं।